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अमृतपाल के मामले में केंद्र और प्रदेश सरकार का समन्वय सराहनीय रहा

ललित गर्ग

वारिस पंजाब दे संगठन के प्रमुख और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को पुलिस ने मोगा जिले से गिरफ्तार कर लिया है जो 18 मार्च से फरार चल रहा था। गिरफ्तारी के बाद पंजाब पुलिस उसे बठिंडा के एयरफोर्स स्टेशन लेकर गई, जहां से उसे असम के डिब्रूगढ़ जेल भेज दिया गया। खालिस्तान की मांग का समर्थन करने वाले अमृतपाल सिंह के गिरफ्तार होने के बाद अब अलग-अलग प्रतिक्रयाएं आ रही हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पूरे घटनाक्रम पर कहा कि पिछले कुछ दिनों से पंजाब के अमन-शांति को बर्बाद करने की कोशिश की जा रही थी। अगर चाहते तो उस दिन ही सभी को पकड़ लिया जाता लेकिन पंजाब सरकार कोई खून-खराबा नहीं चाहती थी। उन्होंने कहा, पंजाब में पिछले कुछ महीनों से कानून-व्यवस्था और अमन-शांति को तोड़ने की कोशिश हो रही थी, जैसे ही हमें इसकी जानकारी मिली हमने एक्शन लिया। हम किसी बेकसूर को तंग नहीं करेंगे। हम कोई बदले की राजनीति नहीं करते। मान ने कहा कि वो 3.5 करोड़ पंजाबियों का इस बात के लिए धन्यवाद करते हैं कि इस 35 दिनों में उन्होंने अमन-शांति और आपसी भाईचारे को बनाकर रखा।

देखा जाये तो पंजाब में कृषि का जबरदस्त विकास मुख्यतः हरित क्रांति का परिणाम है, जिसने राज्य में आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी की शुरुआत की। अधिक पैदावार वाले गेहूँ और चावल के बीजों के आगमन के साथ ही इन फसलों के उत्पादन में कई गुना वृद्धि हुई। पंजाब का लगभग समूचा कृषि क्षेत्र सिंचित है और इस प्रकार यह देश का सर्वाधिक सिंचित प्रदेश है। सरकारी नहरें और नलकूप सिंचाई के प्रमुख साधन हैं। यहां के लोग संपन्न एवं मिलनसार होते हैं।

गिरफ्तारी के बाद पंजाब पुलिस के आईजी (हेडक्वॉर्टर्स) सुखचैन सिंह गिल ने बताया कि अमृतपाल सिंह के खलिाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की गई है। देर से ही सही, पंजाब पुलिस ने इस उग्र और अराजक खालिस्तानी समर्थक को पकड़ने में सफलता हासिल की। आखिरकार भगोड़े अमृतपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी गिरफ्तारी के संदर्भ में यह तथ्य चिंताजनक है कि वह एक गुरुद्वारे में शरण लिए हुए था। आखिर पंजाब के साथ देश की सुरक्षा के लिए खतरा बने एक चरमपंथी को गुरुद्वारे में शरण क्यों मिली? इस प्रश्न का उत्तर न केवल संबंधित गुरुद्वारे के व्यवस्थापकों को देना चाहिए, बल्कि उन पंथिक संगठनों को भी, जो पंजाब के माहौल में जहर घोल रहे अमृतपाल की निंदा करने की बजाय पंजाब सरकार और पुलिस पर अनावश्यक सवाल उठाने में लगे हुए थे। अमृतपाल के इरादे कितने खतरनाक थे, इसका पता इससे चलता है कि वह खुद को भारतीय नागरिक मानने से तो इंकार करता ही था, अपनी एक निजी सेना बनाने की तैयारी भी कर रहा था। उसके इरादों पर पानी फिरा तो इसीलिए, क्योंकि पंजाब में अब अलगाववादी सोच के लिए कोई स्थान नहीं बचा है।

चंद सिरफिरे मुट्ठी भर तत्व ही खालिस्तान की आवाज उठाते रहते हैं। इन तत्वों को सिर उठाने का अवसर नहीं दिया जाना चाहिए। यह तभी संभव होगा, जब पंजाब के राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठन अमृतपाल सरीखे खतरनाक तत्वों के खिलाफ एक सुर में बोलेंगे। जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा का हो तब फिर संकीर्ण स्वार्थों वाली राजनीति के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता। अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी जिस जगह से हुई वो इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि मोगा जिले का रोडे, ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान मारे गए जरनैल सिंह भिंडरांवाले का गाँव है। इसी गाँव में पिछले साल सितंबर में अमृतपाल को ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन का मुखिया बनाया गया था।

अमृतपाल सरीखे अराजक, अलगाववादी और विभाजनकारी तत्व की पैरवी करना आग से खेलना है। किसी के लिए भी समझना कठिन है कि विभिन्न पंथिक संगठनों ने उस अराजकता के खिलाफ आवाज उठाने में संकोच क्यों किया, जो अजनाला थाने में अमृतपाल और उसके समर्थकों की ओर से की गई थी। अजनाला में केवल अराजकता ही नहीं की गई थी, बल्कि श्री गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी भी की गई थी। इस बेअदबी की जांच कराने वाले जिस तरह मौन साध कर बैठ गए, उससे वे स्वतः ही कठघरे में खड़े दिख रहे हैं।

अमृतपाल को गिरफ्तार करके डिब्रूगढ़ भेज दिया गया है, लेकिन उससे गहन पूछताछ करने की आवश्यकता है, ताकि यह जाना जा सके कि वह दुबई से अचानक पंजाब किसके इशारे पर आया और किनके सहयोग और समर्थन से उसने पंजाब में अराजकता का माहौल बनाना शुरू किया। यह बिल्कुल भी अच्छा नहीं हुआ कि पंजाब के कुछ संगठन उसे दबे-छिपे रूप में और कुछ खुले तरीके से समर्थन दे रहे थे। वास्तव में इसी कारण वह भिंडरांवाला के गांव जाकर खुद को एक उपदेशक के रूप में पेश करने में सफल रहा। स्पष्ट है कि उसके समर्थकों को भी कठघरे में खड़ा करने की जरूरत है।

राजनीतिक दल के नेताओं ने अपने-अपने ढंग से इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। केजरीवाल ने लिखा, सीएम भगवंत मान साहिब ने इस मिशन को परिपक्वता और साहस से पूरा किया। बिना किसी रक्तपात और गोली चलाए पंजाब पुलिस ने कामयाबी हासिल की।’ आम आदमी पार्टी के ही राज्य सभा सांसद संजय सिंह इस गिरफ्तारी को साहसिक कदम बताया है। अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी पर शिरोमणि अकाली दल ने कहा है कि अब पंजाब पुलिस को सिख नौजवानों की बेवजह गिरफ्तारी रोक देनी चाहिए। वहीं, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी में हुई देरी को लेकर पंजाब सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘कानून के हाथ लंबे होते हैं। दहशत और भय फैलाने वालों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए। थोड़ा ज्यादा समय लगा पंजाब को, ये जल्दी होता तो और अच्छा था।’

वहीं, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक दिन पहले ही पंजाब पुलिस की तारीफ करके संकेत दे दिया कि राजनीतिक भेद-मतभेद चाहे जितने भी हों, लेकिन जब बात राष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने की हो, तो उनसे ऊपर उठना हम जानते हैं। इस दौरान अकाल तख्त ने जिस बारीकी से धर्म और उसके दुरुपयोग के बीच फर्क को रेखांकित करते हुए खुद को अमृतपाल की करतूतों से अलग किया, वह न केवल सराहनीय है बल्कि आगे के लिए भी मिसाल पेश करता है। सही समय पर दिखाई गई यही सावधानी, गंभीरता और जिम्मेदारी की भावना किसी राष्ट्र की असली ताकत होती है। यह सराहनीय है कि अमृतपाल के मामले में पंजाब और केंद्र सरकार ने आपसी सहयोग और समन्वय का परिचय दिया। यह आगे भी कायम रहना चाहिए।

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