अखिलेश जी ! अतीक के अपने कारनामों का परिणाम है यह …..

images (77)

देश में एक ‘घड़ियाल’ के मरने के बाद घड़ियाली आंसू बहाने वालों की संख्या देखते ही बनती है। कुछ लोग हैं जो अतीक रूपी घड़ियाल के मरने के बाद ऐसे आंसू बहा रहे हैं जैसे उनकी बहुत बड़ी हानि हो गई हो। जबकि ये भली-भांति जानते हैं कि कुछ समय पहले यही अतीक अहमद कितने ही लोगों के लिए काल बन चुका था। इसका नाम सुनकर लोगों की कंपकंपी बंध जाती थी। उसके बारे में गरीब लोगों की भी शिकायतें मिलती रही हैं कि उनसे भी वह वसूली करता था या जबरन मारपीट पर उनसे बेगार लेता था। जिन लोगों के घरों के चिराग बुझाने का अपराध अतीक ने किया, जिन बहनों की राखी बांधने वाली कलाई को इस व्यक्ति ने उनसे छीन लिया या जिस बाप से उसका बुढ़ापे का सहारा छीना , या जिस महिला से उसका सुहाग छीन लिया या जिस मां से उसका लाल छीना,आज उनके दिलों से पूछा जाए कि उन्हें अतीक के मरने पर कैसा लग रहा है?
वैसे यह पहली बार नहीं है कि जब कोई ‘अतीक’ इस प्रकार मारा गया है। इससे पहले जहां अतीक जैसे अपराधियों को इतिहास ने अनेक बार मरते देखा है वहीं अनेक राजनीतिक हत्याएं भी इतिहास में दर्ज हैं। इतिहास इस बात का साक्षी है कि 4000 वर्ष पूर्व मिस्र में , 2291 ईसा पूर्व मिस्र के राजा की हत्या की गई थी। अमेरिका के 4 राष्ट्रपतियों की हत्या हो चुकी है। 14 अप्रैल 1865 को अब्राहम लिंकन, 1881 में जेम्स गार्फिल्ड, 1901 में विलियम मकिन्लि ,22 नवंबर 1963 को जॉन एफ कैनेडी की हत्या हुई थी।
19 वी सदी से लेकर 2010 तक अमेरिकी राष्ट्रपतियों की हत्या या हत्या का प्रयास अथवा षडयंत्र समय-समय पर होते रहे हैं। जिसमें 30 जनवरी 1835 को हत्या का प्रथम प्रयास एंड्रयू जैक्सन पर किया गया था। 1912 में थियोडोर रूजवेल्ट, 1981 में रोनाल्ड रीगन पर भी हत्या के प्रयास हुए हैं।
4 अप्रैल 1968 को सिविल आंदोलन के प्रणेता मार्टिन लूथर किंग की हत्या की गई थी। 7 जुलाई 2022 को जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्या की गई।
हम सभी यह भी भली प्रकार जानते हैं कि गांधीजी की नीतियों से असहमति व्यक्त करते हुए उनको भी नाथूराम गोडसे ने अपनी गोली का शिकार बनाया था। इसके पश्चात 31 अक्टूबर 1984 को देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को उनके अंगरक्षकों द्वारा ही मार दिया गया था। फिर इंदिरा गांधी के बेटे राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने । 1989 में वह चुनाव हार गए। 1991 की मई में नई लोकसभा के चुनाव हो रहे थे तो उस समय उन्हें भी हत्यारों ने मौत की नींद सुला दिया था।
भारत से बाहर और भारतीय उपमहाद्वीप के ही अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी राजनीतिक घटनाएं होती रही हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे जुल्फिकार अली भुट्टो को जहां वहां के एक सैनिक तानाशाह ने फांसी पर लटका दिया था, वही जुल्फिकार अली भुट्टो की बेटी बेनजीर भुट्टो को 27 दिसंबर 2007 को रावलपिंडी में मार दिया गया था। इजरायल के प्रधानमंत्री यित्जान रॉबिन की 4 नवंबर 1995 को हत्या हो गई थी। 28 जून 1940 को ऑस्ट्रिया हंगरी के युवराज आर्क ड्यूक फर्डिनेंड की हत्या हो गई थी। जिसके कारण प्रथम विश्व युद्ध हुआ था।
17 जनवरी 1961 को कांगो के पहले निर्वाचित प्रधानमंत्री प्रेटिस लुबुंंबा की हत्या हुई थी।1990 में नागासाकी सिटी जापान के मेयर मोटो सीमा पर हमला हुआ था। जापान में ही 1992 में राइट विंगर गनमैन ने लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के उपाध्यक्ष कोमारू शिनो को एक जनसभा में भाषण देते हुए मार दिया था। 1994 में पूर्व प्रधानमंत्री होशो कोवा मोरि हारो को टोक्यो होटल में गोली मारी। 1995 में आयुक्त जनरल कुनिमा ताकाजी को गोली मारी। 2007 में नागासाकी के मेयर यीतो यीचो को गोली मारी।
भाजपा के नेता प्रमोद महाजन को गोली मारी गई।उड़ीसा के स्वास्थ्य मंत्री नवल किशोर दास को गोली मारकर हत्या की गई।
31अगस्त 1995 को पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या हुई। 2 जनवरी 1975 को बिहार के मुख्यमंत्री ललित नारायण मिश्र की हत्या हुई।
जिन जिन लोगों की हत्या का उपरोक्त विवरण हमने यहां पर प्रस्तुत किया है यह आवश्यक नहीं कि वे सभी गलती पर थे। कई बार हत्यारा किसी राजनीतिक प्रतिशोध के चलते या व्यक्तिगत शत्रुता को साधते हुए या किन्ही दूसरे लोगों के उकसावे में आकर भी हत्या करता है। हत्या के हाथ दूसरे होते हैं जबकि उस हत्या से लाभ कोई दूसरा उठाता है। कई बार ऐसा भी किया जाता है कि हत्या के हाथों को भी हत्या के माध्यम से ही मिटा दिया जाता है। इस प्रकार हत्यारों का भी एक संसार है। जिसमें हत्याओं का ही खेल चलता रहता है और हत्याओं की ही गुत्थियां उधेड़ी बुनी जाती रहती हैं। हत्यारों की इस दुनिया में केवल हथियारों के फरमान जारी होते हैं और हत्यारों को ही तैयार किया जाता है।
वर्तमान में भारत में जिस अतीक अहमद और उसके अन्य पारिवारिक जनों की हत्या को लेकर चर्चा चल रही है, उनके बारे में सहानुभूति के दो शब्द बोलने से पहले हमें यह विचार करना चाहिए कि उनका संबंध और संपर्क कौन सी दुनिया से था? क्या वह हत्यारों की उस दुनिया से संबंध नहीं रखते थे जो केवल और केवल हत्याओं के फरमानों पर हस्ताक्षर करती है और हत्याओं की गिनती कर ठहाके लगाती है ? यदि ऐसा है तो अतीक अहमद और उसके किसी भी पारिवारिक जन या किसी भी संबंधी या किसी भी सहयोगी की हत्या पर हमें तनिक भी कष्ट नहीं होना चाहिए। ध्यान रहे कि सारी व्यवस्था इसलिए बनाई जाती है कि अतीक अहमद जैसे लोगों का विनाश हो और जो लोग कानून और कानून की व्यवस्था में विश्वास रखते हैं उन सभी विधेयात्मक शक्तियों का विकास हो। जनसाधारण को किसी प्रकार का कष्ट न होने देना ही राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य होता है। यदि आज राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक व्यवस्था में बैठा हुआ कोई भी व्यक्ति अतीक अहमद की मृत्यु पर शोक व्यक्त कर रहा है या इसे किसी भी दृष्टिकोण से अनुचित मान रहा है तो समझिए कि वह सारी व्यवस्था के लिए एक कोढ़ है।
हमारे यहां पर यह मान्यता रही है कि जब नालायक लोगों का सम्मान होता है तो दुर्भिक्ष, मरण और भय का साम्राज्य होता है। अयोग्य ,अपात्र अर्थात नालायक लोगों को यदि संसद विधानसभा या किसी भी संविधानिक संस्थान में या लोकतंत्र के मंदिर में देव बनाकर भेजा जाएगा तो ऐसी परिस्थितियों में जनसाधारण का जीना कठिन हो जाएगा। क्या यह सच नहीं है कि अतीक जैसे लोग किसी भी दृष्टिकोण से जनप्रतिनिधि होने की कोई योग्यता नहीं रखते थे? यदि यह सही है तो यह बात भी सोलह आने सही है कि उनके रहने से दुर्भिक्ष, मरण और भय का साम्राज्य व्याप्त हो रहा था। जैसी उनकी मति थी वैसी ही उनको गति मिली है। हत्या होना या हत्या करना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं माना जा सकता। पर जब किसी ऐसे व्यक्ति की हत्या होती है कि जो समाज की सामान्य व्यवस्था को बाधित करने का काम करता रहा हो तो वहां हत्या हत्या न होकर वध कहलाती है । इसे सामाजिक ,राजनीतिक और विधिक मान्यता हर काल में मिली रही है।
अतीक अहमद के पूरे आपराधिक रिकॉर्ड के दृष्टिगत उसकी हत्या को पहले तो हत्या ही नहीं कहा जा सकता, वह वध है। हत्यारे के वध को यदि हत्या कहा जाएगा तो उसकी सारी अपराधिक गतिविधियां अपने आप ही क्षम्य होकर उसे एक साधारण अर्थात कानून की व्यवस्था में विश्वास रखने वाले व्यक्ति की मान्यता दिला देता है। किसी भी हत्यारे के विषय में ऐसा दृष्टिकोण अपनाना उचित नहीं होता।
हत्यारों की हत्याएं कभी बंद नहीं हो सकती । चाहे वह तानाशाह हो ,चाहे कोई अपराधिक मानसिकता और सोच का व्यक्ति हो और चाहे आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहने वाला व्यक्ति हो। जहां तक अतीक प्रकरण में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका की बात है तो उन्होंने जब उमेश पाल हत्याकांड के विषय में विधानसभा में सपा के नेता अखिलेश यादव के शोर मचाने पर यह कहा था कि अपराधियों को मिट्टी में मिला देंगे तो उसके सही संदर्भ और अर्थ को भी समझने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ही नहीं बल्कि हर किसी जिम्मेदार मुख्यमंत्री, शासक या जनप्रतिनिधि से यही अपेक्षा की जाती है कि वह अपराधियों के प्रति ऐसी ही कठोर भाषा को अपनाए। क्योंकि उन्हें देश का सत्ता भार इसीलिए सौंपा जाता है कि अपराधियों का विनाश करे।
अतीक की मृत्यु के बाद कुछ ऐसे राजनीतिज्ञ भी शोर मचाते देखे जा रहे हैं, जिनकी पृष्ठभूमि स्वयं अपराध और अपराध की दुनिया से जुड़े रहे हैं जो स्वयं कभी न कभी किसी न किसी हत्या में संलिप्त रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए यह तथ्य भी कोई अर्थ नहीं रखता कि जनवरी 2007 में अतीक और अशरफ जब सांसद व विधायक थे तो उनके लोगों ने मदरसा से लड़कियों का जबरदस्ती अपहरण किया था और पूरी रात उनके साथ बलात्कार हुआ था। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। मानो उनका वह दरिंदगी कार्य किसी फरिश्ते द्वारा किया जा रहा कार्य था। इलाहाबाद में झलवा रोड पर 12 बीघे जमीन के लिए पिता और पुत्र को मार देना किस प्रकार से वैधानिक और उचित माना जा सकता है जिसकी पत्नी पिछले 35 वर्षों से लगातार इनके विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए कहते कहते वृद्ध हो गई लेकिन लेकिन कोई कार्रवाई नहीं। ना ही कोई सुनने वाला था।
ऐसे ही अनेक केस हैं जो इन लोगों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में और भिन्न-भिन्न स्थानों में दर्ज हैं परंतु इनके आतंक के कारण जज एवं पुलिस वाले भी डरते थे। जो आज इनकी मृत्यु पर छाती पीट रहे हैं उनसे पूछा जा सकता है कि जब यह इस प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त थे तो उनसे कौन से संविधान की रक्षा हो रही थी ? सपा के अखिलेश यादव को यह बात विशेष रूप से समझ लेनी चाहिए कि जो कुछ हुआ है वह अतीक के अपने कारनामों का परिणाम है।

देवेंद्र सिंह आर्य एडवोकेट
चेयरमैन : उगता भारत

Comment:

hititbet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
Betgaranti Giriş
betgaranti girş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
meritking giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
hiltonbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
hiltonbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
meritking giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
meritking giriş
meritking giriş
betorder giriş
betorder giriş
betorder giriş
betorder giriş
imajbet giriş
hiltonbet giriş
roketbet giriş
betnano giriş
betnano
betnano giriş
holiganbet giriş
betnano
betpark giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betorder giriş
betorder giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
betpark
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
elexbet giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
bets10 giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
betpark giriş
holiganbet giriş
roketbet giriş
roketbet giriş
roketbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
galabet giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
vdcasino
vdcasino giriş
vaycasino giriş
noktabet giriş
betgaranti
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
noktabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
bettilt giriş
roketbet giriş
roketbet giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
bettilt giriş
vaycasino
vdcasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
Safirbet giriş
Safirbet güncel adresi
betgaranti giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
bettilt
bettilt
vaycasino giriş
betnano giriş
Safirbet giriş
Safirbet güncel adresi
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
Safirbet giriş
madridbet giriş
norabahis giriş
madridbet giriş
maritbet giriş
maritbet giriş
betnano giriş
romabet giriş
romabet giriş
betnano giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
maritbet giriş
maritbet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş