उत्तर प्रदेश को ‘उत्तम प्रदेश’ बनाने की बात कहने वाले ‘बीमार प्रदेश’ बनाकर छोडक़र गये हैं। साम्प्रदायिक आतंकवाद से जूझता रहा उत्तर प्रदेश ‘सरकारी आतंकवाद’ से भी जूझता रहा। यह ‘सरकारी आतंकवाद’ जातीय आधार पर अधिकारियों की नियुक्ति या पुलिस में भर्ती के रूप में तो देखा ही गया,  साथ ही अधिकारियों और पार्टी के नेताओं ने मिलकर प्रदेश की जिस प्रकार लूट की-उसमें भी देखा गया। भूमाफिया, बिल्डर, शिक्षा माफिया, शराब माफिया, अवैध दवाई निर्माता माफिया और ऐसे ही अवैध धंधे करने वाले लोग सरकारी छत्रछाया में चारों ओर फैले और अपना भरपूर विकास करते रहे। इन सबका उद्देश्य पैसा कमाना था। इन्हें लग रहा था कि जितने समय के लिए ‘स्वर्ग’ मिला है उतनी देर में सात पीढिय़ों की दरिद्रता दूर करन्ने के लिए जितना किया जाए-उतना कर लिया जाए तो ही अच्छा है। इन्हें पता नहीं रहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए जंगलों की खाक छानने वाले परमदेशभक्त और ईमानदार महाराणा प्रताप के वंशज आज भी महलों में रहकर अपने गौरव पूर्ण अतीत पर गर्व अनुभव करते हैं। उनके पूर्वजों का पुरूषार्थ और ईमानदारी का भाव इस देश के लोगों ने सदा सराहा है उसे आयुष्य प्राप्त करने की अपनी सहृदयतापूर्ण शुभकामनाएं दी हैं इसलिए वे लोग आज भी सम्मानपूर्ण जीवन यापन कर रहे हैं। जबकि पापपूर्ण ढंग से इस देश के लोगों की अशुभकामनाएं लेने वाले मुगल अकबर और उसके वंशजों की पीढिय़ां आज मुंह छिपाकर जीवन जी रही हैं। उन्हें रोटी के भी लाले हैं। पिछली सरकार के लोग भूल गये कि कि अवैध ढंग से तिजोरी भरोगे तो वह स्थायी नहीं रहने वाली। स्थायी तो ‘महाराणा’ की साधना ही रहती है। 
अब योगी आदित्यनाथ की सरकार के चालीस दिन पूर्ण हुए हैं। उनके कार्यों की यदि समीक्षा की जाए तो पता चलता है कि उन्होंने प्रदेश में ‘सरकारी आतंकवाद’ को समाप्त करने के लिए तथा शासन प्रशासन को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाने के लिए एक से बढक़र एक निर्णय लिया है। जब योगी जी ने प्रदेश की कमान संभाली थी तब हमने भी उनसे यही अनुरोध किया था कि वे प्रदेश में ‘सरकारी आतंकवाद’ को समाप्त कर शासन प्रशासन को जनता का वास्तविक सेवक बनायें। काम न करने की शासन-प्रशासन की कार्यशैली को सुधारें और शासन प्रशासन के लोगों को जनसेवक का पाठ पढ़ाकर  उन्हें जनता के प्रति विनम्र बनायें, क्रियाशील और कार्यशील बनायें। पार्टी के कार्यकर्ताओं को लोगों के आवासीय भूखण्डों पर अवैध कब्जा करने सरकारी जमीनों को हड़पने और प्रदेश में खनन आदि के अवैध कार्यों को करने से रोकें। क्योंकि पार्टी के कार्यकर्ताओं की बदतमीजी और शासन-प्रशासन के लोगों की मूर्खताएं ही लोगों को चुनाव के समय सत्ता विरोधी लहर बनाने के लिए प्रेरित करती हैं।
योगी आदित्यनाथ ने दूर की कौडिय़ां बिछाकर अपनी पहली पारी का प्रारंभ किया है। उन्होंने चालीस दिन में शासन प्रशासन को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाने के लिए ठोस कार्य किया है। प्रदेश की कमान अपने हाथों में लेना एक अलग बात है और प्रदेश की कमान अपने हाथों में लिये रखने का अहसास कराना सर्वथा दूसरी बात है। योगी आदित्यनाथ ने सुबह 9 बजे सरकारी अधिकारियों का अपने कार्यालय में उपस्थित रहना अनिवार्य करते हुए उन्हें जनता की शिकायतें सुनने के निर्देश दिये हैं। ऐसे निर्देश निस्संदेह पूर्व में भी दिये जाते रहे हैं। पर इस बार के निर्देशों में एक विशेष बात है और वह ये कि मुख्यमंत्री स्वयं भी 9 बजे से 11 बजे प्रतिदिन जनता की शिकायतें सुनेंगे और उस समय प्रदेश के किसी भी जिलाधिकारी या प्रशासनिक अधिकारी को सीधे फोन पर किसी भी समस्या के बारे में पूछ सकते हैं।
इस निर्देश के कई लाभ होंगे। इससे सबसे बड़ा लाभ तो यह होगा कि अब सरकारी अधिकारी लोगों की समस्याओं के समाधान के प्रति अधिक गंभीर होंगे, और उन्हें सुलझाने के लिए अपना समय देंगे। उन्हें टरकाएंगे नहीं, क्योंकि अब उन्हें पता होगा कि यदि टरकाया गया तो यह व्यक्ति मुख्यमंत्री के पास भी जा सकता है और वहां से सीधे फोन पर हमें मुख्यमंत्री को जवाब देना पड़ सकता है। दूसरे, जिला या तहसील स्तर पर समाधान मिलने से लोग मुख्यमंत्री तक भागने से बचने लगेंगे। इससे शासन प्रशासन में सक्रियता आएगी।
अब आते हैं मुख्यमंत्री के एक अन्य निर्देश पर, जो कि उन्होंने अवैध शराब को लेकर दिया है। अब प्रदेश में विषैली शराब बनाने वालों के दिन लद गये हैं। जो लोग ऐसा करते हैं या करते पाये जाते हैं, उनके लिए कठोर दण्ड का प्राविधान किया गया है। यह निर्णय भी उचित ही कहा जाएगा। पूर्ण शराबबंदी की दिशा में बढऩे के लिए पहले अवैध शराबबंदी को प्रोत्साहित किया जाना आवश्यक है। शराब बंदी पर तो केवल शराबी के परिवार वालों का ही सहयोग सरकार को मिल सकता था परंतु अवैध शराबबंदी पर तो शराबी का समर्थन भी सरकार के साथ ही होगा। यह बहुत बड़ी बात है कि शराबबंदी की दिशा में बढ़ते योगी ने किसी बात पर शराबियों का भी समर्थन प्राप्त किया है। वास्तव में अब तक ये अवैध शराब बनाने वाले लोग शराब से बड़ी मोटी रकम कमाते थे और फिर उसमें से कुछ रकम अपनी पार्टी के कार्यालय में जाकर ‘मंदिर के देवता’ पर चढ़ा देते थे। इस भारत में तो दो तोले मिलावटी दूध को एक लोटा पानी में मिलाकर शिव को प्रसन्न करने की परंपरा है तो सत्तारूढ़ पार्टी के शिव मंदिरों (पार्टी कार्यालयों) में जब चांदी के या स्वर्ण जडि़त छत्र चढ़ते थे तो देवता भक्त पर बड़ी कृपा करते थे। उस कृपा से हमारे अवैध शराब निर्माता अभयदान लेकर निकलते थे और जनता को शराब पिला पिलाकर मारने का कार्य करते थे। इस प्रकार जनता को मारने में शासन ही सहयोग करता था। अब योगीराज में मंदिर के मुख्य पुजारी के योगी होने के कारण उसे पता है कि दूध में कितनी मिलावट है और छत्र चांदी का है या नहीं-इसलिए उसने ‘मंदिर की पवित्रता’ भंग हो इसलिए चोरों को बाहर ही रोक दिया है। उनका मंदिर (सरकारी तंत्र में प्रवेश) प्रवेश निषिद्घ कर दिया है-सचमुच ये चोर ही तो वास्तविक शूद्र हैं और इन्हीं दुष्टों का मंदिर प्रदेश निषेध कानून हमारी परंपरा है। इस शूद्र का अर्थ किसी जाति या समुदाय से लगाकर हमने पाप किया है, असली शूद्र तो योगी आदित्यनाथ ने बताये हैं। जिसके लिए वह बधाई के पात्र हैं पहले पशु हत्यारों को शूद्र बताकर मंदिर प्रवेश से रोका और अब अवैध शराब उत्पादकों को रोका है। कितना उच्च स्तर  का स्वच्छता अभियान है? वाह योगी जी वाह!

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