भारत के विश्व स्तर पर बढ़ते सम्मान को देखकर भारत के दो प्रकार के शत्रुओं के पेट में दर्द हो रहा है। इनमें से एक बाहरी शत्रु हैं तो दूसरे भीतरी शत्रु हैं। बाहरी शत्रुओं में सर्वप्रमुख पाकिस्तान और चीन हैं, जबकि भीतरी शत्रुओं में भारत के भीतर बैठे पाक-चीन समर्थक तो हैं ही साथ ही वे लोग भी हैं जो श्री मोदी के विरोधी हैं, और जो उनसे राजनीतिक और व्यक्तिगत शत्रुता रखते हैं।
कोई भी सार्वभौम देश अपने शत्रुओं के बाहरी स्वरूप से तो सदा सजग और सावधान रहता है पर वह अपने भीतरी शत्रुओं को पहचानने में अक्सर चूक कर जाता है। क्योंकि बाहरी शत्रु अपने शत्रुभाव से सहज ही पहचानने में आ जाता है-पर ‘आस्तीन के सांप’ तो अपनों में अपने बने खड़े रहते हैं। वे ‘भारत माता की जय’ भी बोलते हैं और ‘वंदेमातरम्’ भी बोलते हैं-पर वैसे शत्रुभाव रखते हैं और देश की एकता और अखण्डता को पूर्णत: उपेक्षित करके पाकिस्तान जैसे शत्रु देश की भूमि पर जाकर भी ‘मोदी को हटाने’ के लिए वहां के लोगों से सहयोग मांग लेते हैं। जब स्वदेश लौटने पर इनके कपड़े फाड़े जाते हैं तो ये ‘भाषण और अभिव्यक्ति’ की स्वतंत्रता की दुहाई देकर अपने आपको दूध का धुला सिद्घ करने का अतार्किक प्रयास करते हैं।
भारत में अब हम राजनीति के जिस घटिया स्तर को देख रहे हैं वह सचमुच चिंता का विषय है। इस समय व्यक्ति विरोध कब राष्ट्रविरोध में बदल जाए?- कुछ कहा नहीं जा सकता। लोकतंत्र में प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री का विरोध करना आवश्यक भी होता है और अपेक्षित भी होता है। इसीलिए इस शासन प्रणाली में विपक्ष की व्यवस्था की गयी है। पर ध्यान रहे कि यह विरोध पद का है पदासीन व्यक्ति का नहीं है। सचमुच पद और पदासीन व्यक्ति के बीच उतना ही अंतर है जितना स्वाभिमान और अभिमान के बीच में है। स्वाभिमानी व्यक्ति को जैसे अभिमानी बनने की पता नही चलती वैसे ही पद के विरोधी को पदासीन व्यक्ति का विरोधी होने में देर नहीं लगती। मोदी का विरेाध प्रधानमंत्री के रूप में किया जाना विपक्ष का अधिकार भी है और हथियार भी है, परंतु इस सिद्घांत की भी सीमाएं हैं-इसे आप विदेशी शत्रु देश की भूमि पर खड़े होकर नही ंअपना सकते। वहां जाते ही प्रधानमंत्री किसी पार्टी के नहीं रहते, अपितु वे ‘हमारे प्रधानमंत्री’ हो जाते हैं। अत: शत्रु देश में जाकर ‘हमारे पीएम’ की आलोचना करना निंदनीय और राष्ट्रविरोधी कृत्य है।
हमारे विपक्ष को प्रधानमंत्री मोदी इसलिए अप्रिय लग रहे हैं कि वे अगले लोकसभा चुनावों में भी उसे सत्ता में आते हुए दिखायी दे रहे हैं। जनता आज भी उन्हें उतना ही चाह रही है, जितना 2014 में चाह रही थी। राहुल गांधी ना तो विपक्ष को साथ लगा पा रहे हैं और ना ही कांग्रेस को साथ लेकर चल पा रहे हैं। वह विपक्ष के साथ लगते हैं ना कि विपक्ष को साथ लगाते हैं, इसी प्रकार वह कांग्रेस पर थोपे जा रहे हैं-ना कि कांग्रेस उन्हें चाहती है। यह स्थिति मोदी के लिए उपयुक्त है और कांग्रेस सहित सारे विपक्ष के लिए ‘खतरे की घंटी’ के सच को समझने की आवश्यकता है। वह स्वयं दुर्बल और रोगग्रस्त है और यही कारण है कि वह झल्ला-झल्लाकर अपनी दुर्बलता को बार-बार प्रकट कर रहा है। उसे प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता ऐसा झल्लाहट भरा प्रदर्शन करने के लिए बार-बार प्रेरित कर रही है।
जैसे भारत की भीतरी परिस्थितियां हैं वैसी ही बाहरी परिस्थितियां हैं। चीन और पाकिस्तान भारत के प्रधानमंत्री मोदी की विश्व मंचों पर बढ़ती स्वीकार्यता और ग्राहयता इन दोनों देशों को रूचिकर नहीं लग रही हैं। वे मोदी जी की विश्वमंचों पर बढ़ती लोकप्रियता से उतने ही झल्लाये हुए हैं जितना भारत का विपक्ष मोदी के विरूद्घ झल्लाया हुआ है। विश्व मंचों पर इस समय कहने के लिए तो इन देशों की ओर से भारत विरोध किया जा रहा है, परंतु वास्तव में वह भारत विरोध न होकर मोदी विरोध है। उनकी मान्यता है कि यदि भारत से मोदी हट जाएं तो उनके पश्चात जो कोई वहां आएगा उससे तो वह आराम से निपट लेंगे। ऐसी परिस्थितियों में मोदी के बाहरी और भीतरी शत्रुओं का एक ‘सांझा कार्यक्रम’ अघोषित रूप से बन चुका है-कि ‘मोदी हटाओ चांदी कमाओ।’ कांग्रेस के जिस नेता ने पड़ोसी पाकिस्तान की धरती पर जाकर मोदी हटाने की अपील की थी-वह अब रंग ला रही है। ये दोनों पड़ोसी शत्रु देश मोदी को युद्घोन्मादी बनाने के लिए या सिद्घ करने के लिए युद्घ के जैसी परिस्थितियों का निर्माण कर रहे हैं-ये भारत को युद्घोन्मादी देश सिद्घ कर रहे हैं। इधर भारत के ‘जयचंद’ भी मोदी को देश को युद्घ में धकेलकर अपनी सत्ता मजबूत करने के आरोप लगाने लगे हैं। बात स्पष्ट है कि देश के बाहरी और भीतरी शत्रुओं के स्वर एक जैसे बन गये हैं। भारत की राजनीति का यह घटिया स्तर अब से पूर्व नहीं देखा गया था, जब बाहरी शत्रुओं की भाषा देश के राजनीतिक दल बोलने लगे हों।
ऐसे में देश की जनता को बड़ी सावधानी से राजनीति की इस मंडी में खड़े हर ‘व्यापारी’ की आवाज को पहचानने और ध्यान से सुनने की आवश्यकता है-हम सभी ध्यान दें कि ये व्यापारी ‘भिण्डी करेला’ ही बेच रहे हैं या उनकी ओट में कहीं देश को तो नहीं बेच रहे हैं? हमें हर व्यक्ति और हर दल से पहले देश चाहिए।

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
holiganbet güncel giriş
holiganbet güncel
holiganbet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
klasbahis giriş
klasbahis giriş
holiganbet güncel
imajbet güncel
holiganbet güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betyap güncel
betpark giriş
betpark giriş
betyap giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
matbet giriş
matbet giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
matbet giriş
matbet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
holiganbet giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betwoon giriş
betwoon giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
betwoon giriş
betwoon giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
maxwin giriş
maxwin giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
sahabet giriş
sahabet giriş