‘आओ, जलायें एक राष्ट्रदीप’

राष्ट्र हम सबकी भावनाओं का आईना होता है। इस पर हर उस व्यक्ति का अधिकार होता है जो अपने देशवासियों की उन्नति में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं डालता है और जो शान्तिपूर्ण जीवन जीने में स्वाभाविक रूप से विश्वास रखता है। ऐसे व्यक्ति का मजहब, जाति, सम्प्रदाय चाहे जो हो उसके लिए राष्ट्र की यह भावना सर्वप्रथम वन्दनीय होती है। हम बिना किसी जातीय और साम्प्रदायिक भेदभाव के ऐसे हर व्यक्ति को राष्ट्रवादी मानते हैं जो इस देश को अपना मानता है, इसकी विरासत को अपनी मानता है, इसके पूर्वजों को अपना मानता है और ऐसा मानकर अपनी मातृभूमि को अर्थात ‘मादरे वतन’ को कृतज्ञतावश शीश झुकाता है। जो लोग आईएस और लश्करे तैय्यबा की सोच को प्रोत्साहित करते हैं और ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’, या ‘वन्देमातरम्’ का विरोध करते हैं-और देश में किसी भी प्रकार से आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देकर उपद्रव और उन्माद को अपनाते हैं, वे देशवासी हो सकते हैं-परंतु राष्ट्रवादी नहीं। माना कि देश में बहुत सी समस्याएं हैं और लोगों को अपनी समस्याएं उठाने का संवैधानिक अधिकार है, उन्हें भाषण और अभिव्यक्ति की भी स्वतंत्रता है और वे शान्तिपूर्ण धरना प्रदर्शन करने का भी संवैधानिक लोकतांत्रिक अधिकार रखते हैं, पर इसका अभिप्राय यह तो नहीं कि इन सब लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करते-करते ‘टूण्डा’ पैदा किये जाने लगें और ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ के नारे लगाये जाने लगें। ना ही इसका अर्थ ये है कि कुछ लोग टी.वी. चैनलों पर बैठकर रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में घुस आने की छूट देने की सरकार से मांग करें और इसे एक मानवीय समस्या बताकर ‘इमोशनल ब्लैकमेलिंग’ की बात करने लगे।
इन तथाकथित मानवाधिकारवादियों को उन दर्जनों मुस्लिम देशों पर भी दबाव बनाना चाहिए जो इन रोहिंग्या मुसलमानों को अपने देश में लेने पर तैयार नहीं हैं। साथ ही इन्हें अपनी दोगली भाषा को भी जांचना चाहिए। इन्हें पता होना चाहिए कि पाकिस्तान से अपनी जान बचाकर भागे हुए हिंदुओं को जम्मू कश्मीर में आज तक भी अपने मानवाधिकारों से वंचित रखा गया है। यद्यपि इन हिंदुओं ने पहले दिन से भारत को अपनी भूमि मानते हुए इसके प्रति निष्ठा व्यक्त करने के लगातार प्रमाण दिये हैं, परंतु इनका दोष केवल ये है कि ये लोग हिंदू हैं और भारतमाता के प्रति शीश झुकाते हैं। 70 वर्ष से ये अपने अधिकारों के लिए केवल इसलिए जूझ रहे हैं और अनेकों कष्ट सह रहे हैं कि ये भारत मां को ‘डायन’ कहने और अपना मजहबी चोला बदलने को तैयार नहीं हैं। कश्मीर में पूरी तरह राष्ट्रवाद जेलों में बन्द पड़ा सिसक रहा है और सारे मानवाधिकारवादी और असहिष्णुता के विरूद्घ आवाज उठाने वाले पदकधारी शांत हैं। इन्हें रोहिंग्या चाहिएं और अपने ही भाईयों से इन्हें घृणा है। वाह री छद्मदेशभक्ति?
देश पुन: अपना एक महान पर्व दीपावली मना रहा है। यह देश ऐसा है जो वर्ष भर में एक दिन पूर्णिमा (होली पर) पर प्रकाश में नहाता है और नहा धोकर अपने सभी भाइयों को गले लगाता है, भूल-चूक पर प्रायश्चित करता है और नये जीवन के नये संदेश के साथ आगे बढ़ता है, तो इसी देश में एक अमावस्या (दीपावली) ऐसी भी आती है-जब यह अन्धकार के एकान्त में ज्ञान और प्रेम के दीप जलाता है और ऐसे दीप जलाता है जो वर्ष भर जलते रहते हैं और युग-युगों तक जलते रहने का जज्बा रखते हैं।
यह देश बिछुड़ों को गले लगाने वाला और खुशियों के दीप जलाने वाला देश है। शर्त केवल एक है कि बिछुड़े हुए दिल से प्रायश्चित करें और देश की मुख्यधारा में अपनी आस्था व्यक्त करें। इसी प्रकार जिनकी आंखों में 70 वर्ष से आंसू हैं उनके आंसू पोंछना भी हमारा राष्ट्रीय कत्र्तव्य है। रोहिंग्या मुसलमान हमारे बिछुड़े हुए भाई नहीं हैं, हमारे बिछुड़े हुए भाई तो वही पाकिस्तानी हिन्दू हैं जो पिछले 70 वर्ष से अपनी ही भूमि पर दु:ख के आंसू बहा रहे हैं। इन्हीं बिछड़़ों को गले लगाने की और इन्हीं के आंसू पोंछने की आवश्यकता है। रोहिंग्या तो एक आफत है, एक समस्या है जो अपने इन्हीं गुणों के कारण वर्मा से भगाये जा रहे हैं। जो अपने देश के नहीं हो सके, वे हमारे क्या होंगे।
इस समय आवश्यकता देश में एक राष्ट्र दीप जलाने की है, ऐसा राष्ट्र दीप जो सारे राष्ट्र की चेतना को प्रकाश से सराबोर कर दे, सारा राष्ट्र्र, रोशनी में नहा जाए। वह रोशनी ऐसी हो जो हर व्यक्ति को उसके अंतरतम में छिपे मैल का भान करा दे, और हर व्यक्ति उस प्रकाश में नहाकर जब बाहर निकले तो उसे ऐसा लगे कि वह राष्ट्र की मुख्यधारा का एक निष्ठावान सिपाही है। हमारा देश प्राचीनकाल से प्रकाश का उपासक देश रहा है। संपूर्ण भूमण्डल पर भारत ही एक ऐसा देश है जो प्रकाश की पूजा करने वाले इस प्रकाश पर्व को मनाता है, इसलिए इस पर्व को राष्ट्रीय पर्व घोषित कराने की आवश्यकता है। देश की सरकार को इस ओर ध्यान देना होगा। हम चाहेंगे कि देश का राष्ट्रपति राष्ट्रपति भवन में पहला ‘राष्ट्रदीप’ जलायें जो देश से आतंकवाद, क्षेत्रवाद, प्रान्तवाद, भाषावाद, जातिवाद और सम्प्रदायवाद के अंधकार को मिटाने का प्रतीक हो। उसके पश्चात सारा भारतवर्ष प्रकाश से सराबोर हो उठे।
हम चाहेंगे कि ऐसे राष्ट्रदीपों को प्रज्ज्वलित करने के कार्यक्रम राष्ट्रपति भवन से लेकर गली गली और चौराहे चौराहे पर आयोजित किये जायें, जिससे कि देश नये संकल्प की चांदनी में नया समाज और नया राष्ट्र बनाने का संकल्प ले सके। निश्चय ही आज देश को ऐसे ही ‘शिव संकल्प’ को लेने की और ऐसी ही दीपावली मनाने की आवश्यकता है।

Comment:

betnano giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betamiral giriş
betamiral giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betnano giriş
galabet giriş
betnano giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betnano giriş
betasus giriş
norabahis giriş
betasus giriş
betnano giriş
betnano giriş
betamiral giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betkare giriş
noktabet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betsat giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betorder giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
galabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
galabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betasus giriş
betplay giriş
betplay giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
betasus giriş
betkare giriş
betkare giriş
noktabet giriş
restbet güncel
imajbet giriş
imajbet güncel giriş
betparibu giriş
betparibu giriş
betnano giriş