दीपावली को राष्ट्रीय पर्व घोषित कराने का लें संकल्प

 प्रसन्नता व संपन्नता के प्रतीक प्रकाश पर्व की सकारात्मकता को अपनाये देश
 


भारत की संस्कृति अंधकार से प्रकाश की ओर चलने की उपासिका रही है। सृष्टि के प्रारम्भ में जब अंधकार ही अंधकार था-तब ईश्वर ने उस अंधकार को मिटाने के लिए पहला दीप सूर्य के रूप में जलाया। अंधकार हटा और प्रकाश फैल गया। हमारे ऋषियों ने यहीं से प्रकाश की उपासना को अंगीकार कर लिया। तब से लेकर आज तक हम अंधकार से प्रकाश की ओर चलने की प्रार्थना करते आ रहे हैं। इस प्रकार प्रकाश की उपासना भारतवासियों का मौलिक संस्कार है। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ का उपासक राष्ट्र केवल हमारा भारतवर्ष है। 
अपने इस मौलिक संस्कार को हम ज्ञानोपासना के माध्यम से सुरक्षित रखते चले आ रहे हैं। इस ज्ञानोपासना ने हमारी सार्वत्रिक चेतना को हर क्षेत्र में नेतृत्व दिया और हमारी प्रतिभा को मुखरित करने में सहायता दी। अपनी इसी विशिष्टता के कारण ही हम अपनी स्वतंत्रता को लेकर उसकी शत्रु रहीं विदेशी शक्तियों से दीर्घकाल तक संघर्ष करते रहे और अन्त में स्वतंत्र होकर संसार को यह दिखाया कि प्रकाश की उपासना का अर्थ क्या है? यह हमारी प्रकाशोपासना का ही परिणाम था कि हम पराधीनता के अन्धकार को मिटाने में सफल रहे और आज अपने धर्म व संस्कृति की रक्षा कर पाने में सफल हो सके हैं।
इस प्रकार दीपावली हमारा सबसे प्राचीन और सबसे प्रमुख राष्ट्रीय पर्व है। धर्मनिरपेक्षता के नाम पर इस पर्व की पावनता को भंग करके हमने इसके राष्ट्रीय स्वरूप को मिटाने का कार्य करके राष्ट्र के साथ छल किया है। जिसका परिणाम ये आया है कि देश में अंधकार के उपासक लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। ये वही लोग हैं जो देश के सांस्कृतिक मूल्यों में आस्था न रखकर देश की संस्कृति को मिटाने का कार्य कर रहे हैं, और देश में हिंसा, आतंकवाद, क्षेत्रवाद, प्रान्तवाद, भाषावाद, जातिवाद और सम्प्रदायवाद के नये-नये अखाड़े खोद-खोदकर भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को दिन दहाड़े मिटा रहे हैं। देश की सज्जनशक्ति को मौन रहने के लिए अभिशप्त कर दिया गया है।
अपने प्यारे प्रकाश पर्व दीपावली पर ‘उगता भारत’ समाचार पत्र ने एक अनोखी पहल की है। अपनी इस अनोखी पहल का नाम ‘उगता भारत’ ने ‘आओ! जलायें एक राष्ट्र दीप’ दिया है। इस दीप के माध्यम से हम देश को आतंकवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद, प्रान्तवाद, जातिवाद और सम्प्रदायवाद के अंधेरों से मुक्त करने के अपने संकल्प को व्यक्त करेंगे। हम चाहेंगे कि अन्धकार की उपासक ये शक्तियां सर्वत्र विनाश को प्राप्त हों, और सर्वत्र हमारी राष्ट्रीय चेतना का प्रकाश फैल जाए। सारा देश इन असुरों के विनाश का संकल्प ले और हर व्यक्ति एक दीप राष्ट्र के नाम जलाकर हमारी इस मुहिम में हमारी सहायता करे।
हम सामाजिक संगठनों और राष्ट्रवादी सभाओं, सोसायटियों व संस्थाओं से भी अपील करते हैं कि वे अपने-अपने स्तर पर अपने-अपने क्षेत्र में प्रकाश पर्व दीपावली के इस पावन अवसर पर एक दीप राष्ट्र के नाम जलाकर अपना फोटो हमें भेजें। जिसे हम ‘उगता भारत’ में प्रकाशित करेंगे। आप ‘उगता भारत’ के बैनर के नीचे आयोजक या सहयोगी संगठन के रूप में अपनी सभा, समिति, संगठन या संस्था का नाम डालकर हमें यह फोटो भेज सकते हैं, जिसे ‘उगता भारत’ के अगले अंक में प्रकाशित किया जाएगा।
अन्त में अपने प्रस्ताव को देश के महामहिम राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को इस मांग के साथ भेजा जाए कि अगले वर्ष से देश के महामहिम राष्ट्रपति दीपावली अर्थात प्रकाश पर्व के उपरोक्त आशय को स्पष्ट करने वाला एक दीप राष्ट्र के नाम जलाकर इस पर्व की राष्ट्रीय पवित्रता को जन-जन तक पहुंचाने का कष्ट करें। जिससे कि भारत का यह प्रकाश पर्व अपनी पावनता को पुन: प्राप्त कर सके और यह पर्व हमें पुन: उठने और आगे बढऩे का अपना पावन संदेश दे सके। हम चाहेंगे कि इस पर्व की पावनता को हर राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन और संस्थाएं आदि इसी उद्देश्य को दृष्टिगत रखकर मनाना आरम्भ करें। इसमें कोई साम्प्रदायिकता नहीं है, इसकी सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण करने की आवश्यकता है, और याद रहे कि यह हमारा प्यारा पर्व किसी भी ‘वेलेंटाइन डे’ से लाख गुना उत्तम है।

इस अवसर पर हम सभी एक ही संकल्प लेंगे-
 

”हम सभी उपस्थित जन यह संकल्प लेते हैं कि भारत की एकता और अखण्डता को नष्ट करने के राष्ट्रघाती कार्यों में लगी शक्तियों के काले कारनामों को हम सहन नहीं करेंगे, अपने प्रकाश पर्व दीपावली के इस पावन अवसर पर एक दीप राष्ट्र के नाम जलाकर हम पुन: अपनी ज्ञानोपासना के संकल्प के प्रति आस्था व्यक्त करते हैं और जो संगठन या संस्थाएं, या हमारी सरकार और हमारे सैनिक या अद्र्घसैनिक बल देश में आतंकवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद, प्रान्तवाद, जातिवाद और सम्प्रदायवाद आदि को मिटाने में लगे हैं-हम उनका तन, मन, धन से सहयोग करेंगे। हम इस व्रत को सरकार के ‘स्वच्छता अभियान’ का एक अंग मानकर धारण करते हैं और शपथ लेते हैं कि अपने प्यारे भारत को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने में पूर्ण तन्मयता से कार्य करेंगे।”

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