Categories
पूजनीय प्रभो हमारे……

पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-76

नाथ करूणा रूप करूणा आपकी सब पर रहे

गतांक से आगे….
ऋग्वेद (3 / 18 / 1) के मंत्र की व्याख्या करते हुए स्वामी वेदानंद तीर्थ जी अपनी पुस्तक ‘स्वाध्याय संदोह’ में लिखते हैं कि-
‘हे ज्ञान दान निपुण! अग्रगन्त:! आदर्श ! ज्ञान विज्ञान की खान ! प्रकाशकों के प्रकाश ! परम प्रकाशमय! अज्ञानान्धकार विनाशक ! दुर्गुणघातक ! सदगुण प्रापक ! ज्ञानज्योति-द्योतक ! विद्यार्कप्रकाशक ! धम्र्मसुशिक्षक ! अधर्म निवारक ! प्रीतिसाधक ! शत्रुता विनाशक ! सुधम्र्म सुसाधक ! अधम्र्मसुबाधक ! सर्वाननंदप्रद ! पुरूषार्थप्रापक ! अनुत्साहविदारक! उत्साह सुधारक ! सज्जनसुखद प्रभो ! हमारी इच्छा तेरे पास आने की है। तू ‘सखा सखीनामविता:’ मित्रों का रक्षक मित्र है। सखे ! जब तू हमारा सखा है-तब तेरे पास आने में हमें प्रतिबंध क्यों है! मित्र ! स्नेहागार ! चाहे हम पापी हैं, दुव्र्यसनी हैं किंतु तेरे मित्र! सखे ! तूने स्वयं ही कहा-‘सखा सख्युर्न प्रमिनाति सगिरम्’ (9/86/16) = मित्र मित्र की बात कभी नहीं काटता। तो हे मित्र ! हम तो कह रहे हैं कि तेरे पास आना चाहते हैं तुझे प्राप्त करना चाहते हैं। क्यों सखे ! क्या अपराध ? तू केवल हमारा सखा ही नहीं वरन्-‘त्वं हि न: पिता वसो त्वं माता शतक्रतो बभूविथ। अघा ते सुम्नीमहे।’ (ऋ. 8/98/11) सबको बसेरा देने वाले (करूणा रूप हो) तू ही हमारा पिता है। जाना कम्र्म प्रवीण! तू हमारी माता है। हम तेरी मंगल कामना की कामना करते हैं।
पिता! क्या पुत्र को पिता के पास आने का अधिकार नहीं रहा? मातुश्री तेरे स्नेह से क्या मैं वंचित रहूंगा? तेरी प्रेम सनी गोदी में पुन: स्थान न पा सकूंगा? मां! मां में तो अथाह ममता होती है। पिता तो पुत्रवत्सल होता है। पिता ! अत: ‘सन:पिते व सूनवेअग्ने सूपायनो भव। सचस्वा न: स्वस्तये।’ (ऋ. 1/1/9) हे अग्ने ! पिता पुत्र के लिए जैसे सुपायन=सुगम्य = सरलता से प्रायणीय होता है, वैसे ही तू हमारे लिए हो, और हमें कल्याण से युक्त कर। पित: ! मात: ! तुमसे बढक़र हमारा कौन हितकारी है? भगवान ! जन-जन में वैराग्णि प्रदीप्त हो रही है? समाजशत्रु दानधम्र्म से विच्युत होकर संसार पर हिंसा के अंगार बरसा रहे हैं। उनकी इस प्रतिकूल भावना को भगवन ! भस्म कर दे। ईश्वर ! कोई किसी का अमंगल चाहने वाला न रहे। सभी सबके हितसाधक हों। तू हमारे लिए ‘सुमना’ हो और हमें ‘सुम्न’ दे।’
करूणानिधान ईश्वर के लिए पूज्य स्वामीजी महाराज ने इस मंत्र की व्याख्या में जितने भी विशेषणों का प्रयोग किया है वे सब के सब हृदयंगम करने योग्य हैं। जितना ही हम उस दयानिधान कृपालु ईश्वर के निकट आते जाते हैं-उतने ही अनुपात में उसकी करूणा के पात्र हम बनते जाते हैं और हमें अनुभव होता जाता है कि उसके कितने विशेषण हो सकते हैं? जब हम उसकी करूणा के पात्र बन जाते हैं तो फिर हमें उसके साथ संवाद स्थापित करने में एक तो देर नहीं लगती, दूसरे उस समय हमारे और उसके संवाद के आनंद को हम वैसे ही अनुभव करने लगते हैं-जैसे गूंगा गुड़ के अनुभव को अनुभव करता है। हम कहने लगते हैं :-
कस्मै देवाय हविषाविधेम्। (ऋ. 10/121/1-9) अर्थात उस सुखस्वरूप, शुद्घ परमात्मा के लिए योगाभ्यास और अति प्रेेम से विशेषभक्ति किया करें।
करूणा का शाब्दिक अर्थ है-अनुकम्पा, दया, दयालुता। ईश्वरीय करूणा की प्राप्ति का अभिप्राय है-उसकी दया का, उसकी अनुकम्पा का और उसकी दयालुता का अपने आपको अधिकारी बना लेना। वह करूणामयी है-अर्थात वह सदय है, निर्दय नहीं है। वह हमारे कर्मों का फल देने में भी अपनी दयालुता का परिचय देता है, कर्म का परिणाम या दण्ड उसी अनुपात में निश्चित करता है-जितने दण्ड के या पुरस्कार के हम अधिकारी हैं। उससे रत्तीभर भी आगे पीछे कुछ नहीं करता है। उसका हृदय से पसीजा हुआ रहता है-वह हमें एक पिता की भांति अथवा एक अध्यापक की भांति सुधारने के लिए या सही मार्ग पर लाने के लिए ही दंडित करता है। इसलिए वह दयालु है। वह करूणा निधान है-दया का भण्डार है। करूणामय अर्थात अत्यंत कृपालु है।
महर्षि दयानंद जी महाराज ने दयालु शब्द से ईश्वर के दयावान होने का प्रतिशदन किया है-‘दय दानगति रक्षण हिंसादानेषु’ इस धातु से दया शब्द सिद्घ होता है।
दयते अनया सा दया।
दान नाम अभय का देना, गति का नाम यथावत गुण दोषों का विज्ञान, रक्षण नाम जगत की रक्षा करना, हिंसा नाम दुष्ट कर्मचारियों को दण्ड का होना, आदान नाम सब जगत के ऊपर वात्सल्य से कृपा करना इसका नाम दया है।
उस दया के नित्य विद्यमान होने से (नित्य का अभिप्राय निरंतर अबाध, अटूट और अखण्ड माना जाना चाहिए) परमेश्वर का नाम दयालु माना है। किसी अन्य न्यायाधीश के न्याय में निर्दयता आ सकती है परंतु ईश्वर के न्याय में केवल सदयता ही रहती है। क्रमश:

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
kralbet
otobet giriş
xslot giriş
otobet giriş
otobet giriş
otobet giriş
betyap giriş
betyap giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
betnano
betnano
betnano
kralbet
kralbet
kralbet
setrabet
setrabet
kralbet
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla Lenf Drenaj
Kolaybet Giriş
Betgaranti Giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot
xslot
hititbet
kralbet
kralbet
betnano
betnano
betpark giriş
betpark giriş