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स्किनर रेजीमेंट’ गुलामी की निशानी है ,थल सेना में*।

आर्य सागर खारी 🖋️

हमारा देश गणतंत्र आज गुलामी की निशानियां से मुक्त हो रहा है। 15 अगस्त 2022 को लाल किले की प्राचीर पर माननीय मोदी जी ने जो पांच संकल्प लिए थे उनमें एक संकल्प देश को गुलामी की निशानी से मुक्त करना भी था उसी संकल्प को पूर्ण करने की राह में प्रथम भारतीय नौसेना के ध्वज को बदला गया जो अंग्रेजों के द्वारा डिजाइन था जिसमें जॉर्ज क्रॉस था फिर दिल्ली के राजपथ का नाम कर्तव्य पथ किया गया । इंडिया गेट पर पर जॉर्ज पंचम की प्रतिमा के स्थान पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा लगाई गई… और कल ही अंडमान निकोबार के दीप नील हैवलॉक का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर शेष 21 दीपों का नाम भारतीय सेना के परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर किया गया। भारत एक विशाल गणतंत्र है गुलामी की निशानियां अभी भी बहुलता से शेष है जिन्हें चुन चुन कर हटाया जाना बाकी है। बात भारतीय थल सेना की ही करते हैं जो विश्व की सबसे बड़ी विशाल थल सेनाओं में एक मानी जाती है। भारत की थल सेना में आज भी एक अंग्रेज कर्नल द्वारा स्थापित रेजिमेंट काम कर रही है जो दुनिया की इकलौती रेजिमेंट है जो भारतीय थल सेना के साथ ब्रिटिश रॉयल आर्मी में आज भी फंक्शनल है। मैं बात कर रहा हूं ‘फर्स्ट स्किनर हॉर्स रेजीमेंट’ की 1803 में स्थापित यह रेजिमेंट आज भी भारतीय सेना का हिस्सा है… अपनी स्थापना से लेकर 1947 तक इस रेजिमेंट ने भारत के स्वाधीनता संग्राम सेनानियों देशभक्त छोटे-छोटे जागीरदारों रियासतों को निर्ममता से कुचला । राष्ट्रीय स्वाधीनता की राह में वीर मराठों, सिखो के सामने सबसे बड़ी बाधा यह रेजीमेंट रही है । नेहर सिंचाई के पानी पर पहरा लगाया। अंग्रेजों द्वारा स्थापित अंग्रेजों की रीति आदर्शों को लेकर संचालित यह रेजीमेंट इसका इतिहास बड़ा कुख्यात रहा है किसी भी देशभक्त स्वाभिमानी भारतीय को इस रेजीमेंट पर ना कभी गर्व था ना कभी होगा।

इस रेजिमेंट के इतिहास इसके संस्थापक के इतिहास को थोड़ा समझते हैं। 1765 के आसपास स्कॉटिश मूल का हरकुलिस स्किनर नाम का नौजवान अंग्रेज फौजी अधिकारी ईस्ट इंडिया कंपनी में तैनाती के साथ भारत आता है। 22 वर्ष की आयु में वह एक राजपूत राजकुमारी से शादी करता है । जिससे उसे 6 पुत्र व तीन पुत्रियों की प्राप्ति होती है। उस राजपूत राजकुमारी महिला का धर्मांतरण कराया जाता है… उसे नया नाम मिलता है जेनी। अंग्रेज पिता भारतीय माता से उत्पन्न संतान एंग्लो इंडियन कहलाती थी इस दंपति से दूसरे नंबर की जो संतान थी ‘जेंम्स स्किनर’ उसी ने स्कैनर हॉर्स रेजिमेंट की स्थापना की। जब वह 12 वर्ष का था उसकी मां ‘जैनी’ ने आत्महत्या कर ली। उसकी शिक्षा-दीक्षा कोलकाता के बोर्डिंग स्कूल में हुई। एंग्लो इंडियन होने के नाते अंग्रेजों की नीति के अनुसार उसे ईस्ट इंडिया कंपनी में ऑफिसर की रैंक नहीं मिल सकती थी बेमन से वह मराठों की उस समय की सुसज्जित सेना में भर्ती हो गया। लेकिन अंग्रेज चाहे एंग्लो इंडियन ही क्यों ना हो वह अपनी स्वजातीय स्वदेश मुल्यो को कभी नहीं भुलाता। भारतीय मराठों के साथ होते हुए भी उसकी निष्ठा कंपनी राज ब्रिटिश मिलिट्री की और थी यह अलग है कि अंग्रेज उसे घास भी नहीं डालते थे। समय के साथ-साथ जेंम्स के सैन्य कौशल में विकास हुआ वह माहिर लड़ाका बन गया। उसने अपनी जान पर खेलते हुए मराठों को हांसी हिसार के युद्ध में अंग्रेजो पर विजय दिलाई। मराठों की ओर से जीवाजीराव सिंधिया ने भी उसे भरपूर सम्मान दिया..।

लेकिन विडंबना तो देखिए जिस सिध्या राजवंश ने झांसी की रानी लक्ष्मी बाई तात्या टोपे के साथ 18 57 -58 में गद्दारी की थी वह खुद गद्दारी धोखे का शिकार हो चुके थे एंगलो इंडियन जेंम्स स्किनर द्वारा… आंग्ल मराठा युद्ध में मराठों की हार के पश्चात जेंम्स स्किनर ने पाला बदल दिया अंग्रेज commander-in-chief गवर्नर जनरल लॉर्ड लेक के नेतृत्व में इंडियन ब्रिटिश आर्मी में शामिल हो गया। 1803 में मराठों की सैन्य रणनीति के आधार पर उसने स्किनर हॉर्स रेजिमेंट की स्थापना की घर का भेदी लंका ढाए की कहावत को चरितार्थ किया। अंग्रेजों को भारत में अनेक युद्धों में विजय दिलाई अंग्रेजों ने खुश होकर उसे 1818 में हांसी हिसार जिला हरियाणा की जागीर उपहार में दी जिसमें हिसार से लेकर गौतम बुध नगर अलीगढ़ बुलंदशहर के 900 गांव लगते थे ₹20000 सालाना उसकी पेंशन बांध दी। लाखों बीघा जमीन उसके आधिपत्य में थी इन 900 गांवो की गौतम बुध नगर की बिलासपुर नगर पंचायत में आज भी स्किनर स्टेट फार्म है हांसी मे भी उसका महल था खंडित अवशेष है दुर्भाग्य तो देखिए हरियाणा सरकार की टूरिज्म वेबसाइट पर उसकी किले शेष दुष्ट निशानियो को हेरिटेज बता कर प्रचारित आज भी किया जा रहा है। लेकिन उत्तर प्रदेश में स्थिति अलग है बिलासपुर गौतम बुध नगर में उसकी स्टेट को यहां हेरिटेज बताकर प्रचारित नहीं किया जाता उस पर उत्तर प्रदेश सरकार ने राजकीय बीज निर्माण कृषि पौधशाला की स्थापना की है सरकार खेती से जुड़े शोध पर इस्तेमाल उस स्थल का आज कर रही है हालांकि कुछ भू-माफिया का उस जमीन पर अतिक्रमण आज भी है। अव्वल दर्जे का अय्याश था जेंम्स स्किनर 14 विवाह उसने किए हजारों रुपए रोज लुटाता था लेकिन ईसायत के लिए पूरी तरह समर्पित था… पक्का ईसाई था। भारत के गरीब किसानों से लूटे गए अपने निजी कोष से ₹90000 खर्च कर 1836 के दौरान दिल्ली की सबसे बड़ी पुरानी चर्च सैंट जेम्स चर्च का निर्माण कराया कश्मीरी गेट के पास वही अपनी आलीशान हवेली बनवायी… 18 57 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के दौरान दिल्ली के गुर्जरों ने उस चर्च को तहस-नहस कर दिया उसके गोल्डन बाउल क्रॉस को जमींदोज कर दिया जो इटली वेनिस के चर्च की रैपलिका थी साथ के साथ ही उसके अजीज मित्र उसी के समान धूर्त शातिर जनरल मैटकॉफ के हाउस को भी आग लगाकर नष्ट कर दिया गुर्जरों ने बाद में चर्च सहित उसका पुन:र्निर्माण अंग्रेजों ने कराया दनकौर बिलासपुर के गुर्जरों के भय के कारण जेम्स स्किनर कभी भी बिलासपुर स्टेट में नहीं ठहरता था… इसमें दूसरा कारण यह भी था वीर मराठों के साथ दादरी रियासत के गुर्जर भाटी राव राजाओं की मैत्री थी मराठों ने गौतम बुध नगर के दादरी नगर पालिका कस्बे में महादेव मंदिर, चौपाल सहित गुलिस्तानपुर गांव में गरुड़ध्वज सैन्य कवायद के लिए जरूरी वॉच टावर का निर्माण कराया था जिसे आज आज स्थानीय लोग अपभ्रंश तौर पर गढगज कहते हैं जिसके धूमिल अवशेष ही अब शेष है बुलंदशहर की जाट मालागढ़ विरासत पर उसके द्वारा किए गए हमले का जवाब दादरी के रावो ने उसे दिया था।कंपनी राज के खत्म होने के पश्चात ब्रिटिश गवर्नमेंट एंपायर के भारत में उदय के पश्चात बाद में उसके लड़कों पोतो ने वहां अपनी कोठी बनवाई… स्किनर के वारिसों में स्टेट की अपार संपत्ति के बंटवारे को लेकर अनेको सिविल सूट चले देश की आजादी के पश्चात तक। बिलासपुर गौतम बुध नगर में आज ईसाइयों का एक कब्रिस्तान है लुटेरे स्किनर का परिवार बहुत बड़ा था कुछ लोग सेंट जेम्स चर्च के कब्रिस्तान दिल्ली में दफन है ।खुद जेम्स स्किनर की कब्र भी वही है तो कुछ बिलासपुर के कब्रिस्तान में दफ्न है। 4 दिसंबर 1841 में उसने अपनी आखिरी सांस ली…. मरने से पूर्व वह अपना काम पूरा कर गया था उसके द्वारा बनाई गई रेजिमेंट ने भारत को एक सदी उसकी स्वाधीनता से दूर रखा…. लेकिन दुर्भाग्य देखिए एक साधारण बुद्धि का व्यक्ति भी चाहे कितना ही कमजोर हो अपने ऊपर किये गये अत्याचार अन्याय को कभी नहीं भुलता अपने दोषी को सम्मानजनक पदवी कभी भी नहीं देना चाहेगा ना ही उसका गौरव गान करेगा। फिर आज देश के शौर्य स्वाभिमान अखंडता संप्रभुता की सर्वोच्च प्रतिनिधि भारतीय थल सेना में कैसे गुलामी की निशानी ‘स्किनर रेजीमेंट ‘को स्वीकार किया जा सकता है।

मैंने देश की महामहिम राष्ट्रपति महोदया मुर्मू जी को तथा माननीय प्रधानमंत्री जी को गुलामी की निशानी को मिटाने के लिए गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर एक पत्र प्रेषित किया है ।इस रेजीमेंट को भंग करते हुए इसका री इंफोर्समेंट करते हुए इसका नाम ‘तात्या टोपे’ रेजीमेंट या अहीर या गुर्जर रेजिमेंट कर देना चाहिए इन दोनों समुदायों की चिरअपेक्षित दशको से यह मांग है भूतपूर्व सैनिकों के अनेक संगठन इस विषय में आंदोलनरत है। कुछ बंधुओं को आपत्ति हो सकती है लेकिन सेना में जाति समुदाय सूचक अनेकों रेजीमेंट काम कर रही हैं। ऐसा कर यह देश के सात लाख से अधिक वीर वीरांगनाओं को सच्ची हमारी श्रद्धांजलि होगी जो आजादी की बलिवेदी पर कुर्बान हो गए। गुलामी की निशानियां मिट्नी चाहिए संसद से लेकर सेना तक न्याय पंचायत से लेकर सर्वोच्च अदालत तक कोई भी संस्थान देश के स्वाभिमान से बड़ा नहीं है ।

राष्ट्र देवता से पहले कोई नहीं ,राष्ट्र देवता से सर्वोपरि कोई नहीं।

लेख में वर्णित सामग्री का स्रोत।

(1) ‘सिकंदर साहिब द लाइफ ऑफ जेम्स स्किनर ‘रिटन डेनिश हिलमैन।

2)ब्रिटिश आर्मी म्यूजियम लंदन।

3) सेंट जेम्स चर्च नई दिल्ली की वेबसाइट।

4) जेंम्स स्किनर की उपलब्ध बायोग्राफी।

आर्य सागर खारी✍✍✍

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