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उगता भारत न्यूज़

ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया का साहित्योत्सव 2022

नई दिल्ली ( विशेष संवाददाता ) फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स और इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 26वें दिल्ली पुस्तक मेला 2022 में 24 दिसंबर, 2022 को ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने साहित्योत्सव 2022 का आयोजन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ अनिल शर्मा ‘जोशी’ उपाध्यक्ष, केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा, डॉ जीतराम भट्ट, सचिव, हिंदी अकादमी, दिल्ली, ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ श्याम सिंह शशि एवं गिल्ड के महासचिव डॉ एस एस अवस्थी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के सदस्यों द्वारा लिखित विभिन्न पुस्तकों का लोकार्पण समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर डॉ श्याम सिंह शशि द्वारा लिखित पुस्तक ‘भारतीय संविधान : रामराज्य संदर्भ, अखिलेश आर्येंदु की पुस्तक शाकाहार एवं मांसाहार का आर्थिक एवं वैज्ञानिक दर्शन, डॉ एस एस अवस्थी की पुस्तक रंगोली के रंग, संपादक डॉ हरिसिंह पाल की त्रैमासिक पत्रिका नागरी संगम सहित डॉ जनकराज जय, डॉ मधु भारद्वाज, डॉ सुदेश गोगिया, अरुण कुमार पासवान आदि की पुस्तकों का लोकार्पण हुआ।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में लेखकों की भूमिका विषय पर विचार गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए डॉ एस एस अवस्थी ने कहा – “दुनिया की हर क्रांति को लेखक वर्ग ने गति प्रदान की। इतिहास साक्षी है कि अमरीका, फ्रांस, रूस आदि सहित भारतीय क्रांति में लेखकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जंग-ए-आजादी में स्वामी दयानंद सरस्वती, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सावरकर, सुभद्रा कुमारी चौहान, माखनलाल चतुर्वेदी, और शांति स्वरूप भटनागर जैसे कलमकारों ने जनचेतना का संचार कर आंदोलन को सफल बनाने में अथक प्रयास किया था और हमें सफलता भी मिली।”
डॉ संदीप कुमार शर्मा ने साहित्य के इतर भारतीय वैज्ञानिक और विज्ञान लेखकों पर प्रकाश डालते हुए कहा – “सी वी रमन, मेघनाथ साहा, पी सी राय, अन्ना मणि अबाजी भीसे सहित अनेक वैज्ञानिकों ने अपने शोध, लेख एवं पुस्तकों के माध्यम से एक ऐसा चराग प्रज्ज्वलित किया जिसे अंग्रेज कभी बुझा नहीं पाए।” इनके अतिरिक्त मधु भारद्वाज और अरूण कुमार पासवान ने तत्कालीन साहित्यकारों और लेखकों की भूमिका का उल्लेख करते हुए स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
साहित्योत्सव 2022 के मुख्य अतिथि डॉ अनिल शर्मा’जोशी’ ने अपने उद्बोधन में कहा – “गुलामी के भयावह अंधकार को छांटने में तत्कालीन लेखकों ने अपनी परंपरागत शैली को अपनाते हुए प्राचीन ग्रंथों का हवाला देकर समाज में जो अलख जगाई वैसा उदाहरण दुनिया में और कहीं नहीं मिलता। हिंदी के पैरोकार मैथिलीशरण गुप्त, जयशंकर प्रसाद, निराला का अनुसरण करते हुए अनेक क्षेत्रीय भाषाओं के लेखकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में आजादी के समर को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।”
हिंदी अकादमी, दिल्ली के सचिव जीतराम भट्ट ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा – “अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध जनमानस को एकत्र करने में महर्षि अरविंद, तिलक आदि निर्भिक लेखकों ने तो मार्गदर्शन किया ही साथ-ही-साथ उस दौर में हमें एक ऐसा वर्ग भी मिलता है जिसने गुमनाम रहकर लोक प्रचलित रचनाओं को जन्म देकर अंग्रेजों को खुली चुनौती दी। संक्षेप में कहें तो समाज का हर वर्ग अपने स्तर पर, अपने सीमित संसाधनों से, क्षेत्रानुसार रचनाएं पेश कर रहा था और अंग्रेज भरसक प्रयास के बावजूद उन तक पहुंच नहीं पा रहे थे।”
डॉ हरिसिंह पाल ने आजादी के उन दीवानों पर, जिन्होंने लोक परंपराओं को अपनी ढाल बनाया था, प्रकाश डालते हुए कहा – “हिंदुस्तान विभिन्न संस्कृतियों का देश है और लोक परंपराएं तब भी जीवित थीं और आज भी जीवित हैं। उन्हीं लोकगीतों के माध्यम से समाज को दिशा प्रदान की।”
आकाशवाणी से सेवानिवृत्त लेखक अरूण कुमार पासवान ने कहा – “लेखक मुल्क के दर्द को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था और उसने दर्द की दवा को अपने लेख, कहानी, उपन्यास, कविता आदि से भारतीयों के नेत्रों में आजादी ज्योति पैदा की। यही वजह है कि तीव्र वेग से साहित्य का संचार हुआ और हम अंततः आजाद हो गये।”
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ नागेश्वर राव ने ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के साहित्योत्सव 2022 में शिरकत करते हुए कहा – “पुस्तकें हमारी सबसे श्रेष्ठ धरोहर हैं। वक्त पुरातन रहा हो या स्वतंत्रता संग्राम का कलमकारों ने सदैव अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है।” इनके अलावा डॉ सुरेश चंद्र ढींगरा, डॉ यशोयश, डॉ ओमप्रकाश शर्मा, राधेश्याम बंधु, जय बहादुर राणा और सूर्य प्रकाश सांसद ने भी सारगर्भित विचार रखे।
लगभग सात घंटे चले इस साहित्योत्सव 2022 का विशेष आकर्षण था – कवि सम्मेलन। सभागार में सुबह से बैठे श्रोताओं ने डॉ रेखा व्यास, ओमप्रकाश,मधु भारद्वाज, उमाकांत,जय बहादुर राणा,शशि राय, गुलबहार, डॉ अर्चना सक्सेना, प्रवीण व्यास, सुरेंद्र शर्मा, अटल मुरादाबादी, रणविजय राव, अशोक अग्रोही, भूप सिंह, राधेश्याम बंधु, कर्नल प्रवीण शंकर, सीमा कौशिक, डॉ पन्ना लाल, एस पी सिंह, गुस्ताख़ हिंदुस्तानी, डॉ श्याम सिंह शशि, डॉ हरिसिंह पाल, अंजलि अवस्थी और डॉ एस एस अवस्थी आदि की कविताओं का आनंद लिया। कवि सम्मेलन का संचालन अरूण कुमार पासवान ने किया।
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में पद्मश्री डॉ श्याम सिंह शशि ने वक्ताओं, कवियों और धैर्यवान श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा – “लेखक सदैव तत्पर रहता है समाज,देश और दुनिया का मार्गदर्शन के लिए और हमें भी एकजुट होकर उनके प्रयासों के दीप को सदैव प्रज्ज्वलित रखना चाहिए।”
ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के महासचिव डॉ एस एस अवस्थी के धन्यवाद ज्ञापन और अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला 2023 के निमंत्रण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।

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