संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के पाँच देशों की वीटो पावर 1955 मे तकनीकी दृष्टि से मृतप्रायः : – बदलती विश्व व्यवस्था के नेतृत्व की पहली पंक्ति में भारत का होना आवश्यक

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गाजियाबाद। कासा लीमा बैंकट , जी टी रोड , गाजियाबाद में विगत 26 नवंबर को एक अत्यंत विशेष और अत्यंत विशिष्ट कार्यक्रम का आयोजन किया गया । वर्ल्ड कांस्टीट्यूशन एंड पार्लियामेंट एसोसिएशन डब्ल्यूसीपीए के इंडिया चैप्टर राष्ट्रीय सैनिक संस्था के द्वारा यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस वैश्विक संस्था के ग्लोबल अध्यक्ष डा ग्लेन टी मार्टेन और मिस फाइलिस ट्रक(अमेरिका) ने बताया कि डब्ल्यूसीपीए को 1958 मे अमेरिका मे स्थापित किया गया। जिसने संयुक्त राष्ट्र की असफलताओ को देखते हुए एक नई विश्व व्यवस्था की कल्पना की और बहुत सारे देशों के विशिष्ट व्यक्तियों के 25 साल तक चले मंथन के बाद एक “ वैश्विक संविधान “ बनाया गया । इस वैश्विक संविधान अर्थात अर्थ कंस्टीटूशन के अंतर्गत अलग अलग देशों में प्रोविजनल वर्ल्ड पार्लियामेंट अर्थात डी
पी.डब्ल्यू.पी. आयोजित की जाती रही है | हिंदुस्तान में 1985 मे एक प्रोविजनल वर्ल्ड पार्लियामेंट आयोजित की गई थी। जिसका उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति माननीय श्री ज्ञानी जैल सिंह जी ने किया था ।
,कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य सभा सांसद श्री अनिल अग्रवाल जी ने कहा कि अब समय बदल चुका है । एक नई विश्व व्यवस्था उभरती हुई नजर आ रही है । इस नई विश्व व्यवस्था नेतृत्व संबंधी पंक्ति में भारत का होना आवश्यक है! उन्होंने कहा कि आज जो प्रस्ताव यहां रखा जा रहा है में उसे प्रधान मंत्री और लोक सभा के अध्यक्ष के पास इसी सत्र में पहुंचाऊंगा । कार्यक्रम को अन्य गणमान्यों ने भी संबोधित किया। कर्नल त्यागी व वरिष्ठ पत्रकार इतिहासकार एवं लेखक डॉ राकेश कुमार आर्य को वर्ल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।विशिष्ट अतिथि टेंपल ऑफ अंडरस्टैंडिंग के महासचिव डा ए के मर्चेन्ट ने सुझाव दिया कि प्रथम चरण में वीटो पावर के इस्तेमाल के लिए गाइड लाइंस बना देनी चाहिए ।
आंध्रा प्रदेश के सलाहकार और विशिष्ट अतिथि श्री राजन छिब्बर ने कहा कि हम वसुधैव कुटुंबकम की बात तब से करते आ रहे है जब बहुत सारे देशों को घुटनों के बल चलना भी नही आता था । झांसी मण्डल के पूर्व डिवीजनल कमिश्नर डा अजय शंकर पांडे ने बताया कि भारत पहले से स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रजों के अध्यादेशों में वीटो पावर का विरोध करता रहा है!उन्होंने कहा कि यह कार्य चरणों में किया जाना चाहिए !श्री गुरु डॉक्टर पवन सिन्हा ने कहा कि संविधान की धारा 51 में फेडरल विश्व सरकार के लिए वकालत की गई है। हम चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्यों को भी अब बदल दिया जाए।
डब्लूसीपीए के इंडिया चैप्टर राष्ट्रीय सैनिक संस्था के अध्यक्ष कर्नल तेजेन्द्र पाल त्यागी ने खुलासा किया कि दूसरे महायुद्ध के बाद जब संयुक्त राष्ट्र का गठन हो रहा था तब 26 जून 1945 को भारत के प्रतिनिधि डा रामास्वामी मुंडलिआर ने यू एन चार्टर पर हस्ताक्षर करने से पहले विटो पावर की समीक्षा के लिए 10 वर्ष का समय तय किया था । यह बात संयुक्त राष्ट्र की धारा 109 मे अंकित है , परंतु यह नही हुआ अर्थात 1955 मे तकनीकी दृष्टि से विटो पावर समाप्त हो चुकी थी या मर चुकी थी | राकेश छोकर ने भी आवाहन किया कि जो विटो पावर 1955 मे ही समाप्त हो जानी चाहिए थी उस लाश को क्यों हम अब तक ढो रहे है ?इस अवसर पर से संकल्प लिया गया कि हर समय , हर स्तर पर और हर तरह से यह बात आम आदमी तक पहुंचाई जाएगी , हमारी अधिकतर समस्याओ की जड़ मे है पाँच शक्तिशाली देशों की विटो पावर । इसे खत्म करने के लिए हमे एक जूट हो जाना चाहिए | निर्णय लिया गया की सरकार से मांग की जाएगी की ।संयुक्त राष्ट्र की जनरल एसेम्बली मे वीटो पावर समाप्ति का मुद्दा उठाया जाए । अभी हाल में हुई एक बैठक में 25 देश यह मांग पहले ही कर चुके हैं ।
वक्ताओं का मानना था कि आज के परिवेश में किसी भी देश को वीटो पावर से सुसज्जित करना उसे तानाशाही के अधिकार देना है। वर्तमान विश्व व्यवस्था में इस प्रकार के विशेष अधिकारों से सुसज्जित कोई भी देश दूसरे देश पर अपनी तानाशाही थोप सकता है। तानाशाही की इस प्रकार की प्रवृत्ति को किसी भी दृष्टिकोण से लोकतांत्रिक नहीं कहा जा सकता। संयुक्त राष्ट्र के वीटो पावर संपन्न देशों ने कभी भी विश्व शांति के प्रति अपनी निष्ठा को व्यक्त करते हुए अपनी वीटो पावर का सदुपयोग न करके अपने हितों में प्रयोग किया है। जिससे ना चाहते हुए भी विश्व 5 देशों की मुट्ठी में बंद सा दिखाई देता है।

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