राजसत्ता से ही वैदिक सिद्धांतों व महर्षि दयानंद के विचारों को समाज तथा देश में लागू करना संभव ::– डॉ. आनन्द कुमार आई पी एस एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्र निर्माण पार्टी

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शस्त्र शास्त्र संतुलन बनाओ सत्य गुलाम नही होगा…प्रो. डॉ सारस्वत मोहन मनीषी

महरौनी (ललितपुर) । महर्षि दयानंद सरस्वती योग संस्थान आर्यसमाज महरौनी के तत्वावधान में विगत २ वर्षों से वैदिक धर्म के मर्म से युवा पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से प्रतिदिन मंत्री आर्यरत्न शिक्षक लखन लाल आर्य द्वारा आयोजित “आर्यों का महाकुंभ “कार्यक्रम में दिनांक २३अक्टूबर, २०२२ रविवार को “महर्षि दयानंद और राजधर्म” विषय पर आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डॉ. आनन्द कुमार ,आईपीएस एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्र निर्माण पार्टी ने अपने ओजस्वी अध्यक्षीय अभिभाषण कहा कि महाभारत काल के पश्चात् हमारे देश की सभ्यता,संस्कृति, शिक्षा और वेदानुसार जीवन पद्धति सब कुछ की भारी क्षति हुई ।पाखण्डों
व रूढ़िवादिता तथा विदेशी आक्रांताओं व परतंत्रता ने देश व समाज को अत्यन्त नुकसान पहुंचाया। महर्षि दयानंद सरस्वती ने वेदों के आधार पर देश व समाज को पुन: गौरवशाली अतीत को प्राप्त करने हेतु वेदों की ओर लौटने का सन्देश दिया। उन्होंने “सत्यार्थ प्रकाश” के षष्ठ समुल्लास में राजधर्म विषय, “ऋग्वेदादिभाष्य भूमिका” में राजप्रजाधर्म -विषय, “आर्याभिविनय “में वेद मन्त्रों की व्याख्या में स्वदेश की प्रशंसा तथा “वेदभाष्य “में यत्र -तत्र राजधर्म की विस्तृत विवेचना की। स्वराज्य प्राप्ति के लिए स्वयं ऋषि ने सर्वस्व समर्पित किया ।उनकी प्रेरणा से हम क्रान्ति वीरों , आर्यसमाजियों ने स्वतंत्रता संग्राम में योगदान कर देश को स्वतंत्र किया । परन्तु आजादी के बाद हमने अपने को राजनीति से अलग रखकर यज्ञ-हवन -सत्संग तक सीमित कर लिया। महर्षि दयानंद ने अपने साहित्य में राजधर्म विषय लिखने में थोड़ी भी कंजूसी नहीं की । यदि हम महर्षि दयानंद व वैदिक सिद्धांतों के आधार पर तय प्रणाली को देश में लागू करना चाहते हैं तो राजसत्ता के विना संभव नहीं। राजसत्ता में आने से विधानसभा और लोकसभा में हम अपने वैदिक सिद्धांतों के अनूकूल विधि-व्यवस्था पारित कर कानून बनायेंगे और उसे समाज ,राज्य और देश में लागू कर पायेंगे। हमारा नशामुक्त भारत का स्वप्न भी साकार होगा। राजनीति में ही आकर हम चौबीसों घंटे समाज व देशहित के लिए काम करेंगे।अत: आवश्यकता है कि हम सब मतभेदों को भुलाकर एकजुट होकर धर्मानुसार राजनीति से जुड़कर राजसत्ता को हासिल करें। अन्त में सभी पूर्व वक्ताओं की प्रशंसा करते हुए सबको धन्यवाद दिया।
संगोष्ठी में डॉ. ज्ञानेन्द्र सिंह अवाना आईपीएस , वेदप्रकाश शर्मा आईपीएस अधिकारी रह चुके प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति व अपने प्रेरणादायक व्याख्यानों से सबको उपकृत किया। अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध कवि डॉ . सारस्वत मोहन मनीषी ने “शस्त्र शास्त्र संतुलन बनाओ सत्य गुलाम नही होगा” कविता सुनाकर सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अन्य वक्ताओं में वैदिक विद्वान् प्रो. डॉ. रामचन्द्र , कुरुक्षेत्र हरियाणा ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती वेदों, मनुस्मृति और महाभारत के आधार पर देश में तीन सभाओं –विद्यार्य,धर्मार्य और राजार्य की स्धापना चाहते थे जो आज भी ग्रहणीय है।
तत्पश्चात् वैदिक विद्वानों में डॉक्टर राकेश कुमार आर्य एड इतिहासकार,प्रो. डॉ. व्यास नन्दन शास्त्री वैदिक बिहार,प्रो. डॉ. अखिलेश शर्मा जलगांव महाराष्ट्र,प्रो. डॉ. निष्ठा विद्यालंकार लखनऊ ने भी अपने बहुमूल्य विचारों से सबको लाभान्वित किया। संगोष्ठी में डॉ.कपिलदेव शर्मा दिल्ली, प्रो. डॉ .वेदप्रकाश शर्मा बरेली, अनिल कुमार नरूला दिल्ली, आर्या चन्द्रकान्ता “क्रान्ति ” हरियाणा, युद्धवीर सिंह हरियाणा, प्रधान प्रेम सचदेवा दिल्ली ,भोगी प्रसाद म्यांमार, देवी कुमार सिंह दुबई, परमानंद सोनी भोपाल, चंद्रशेखर शर्मा जयपुर, सुरेश कुमार गर्ग गाजियाबाद, अनुपमा सिंह शिक्षिका, सुमनलता सेन आर्य शिक्षिका, अवधेश प्रताप सिंह बैंस, विमलेश कुमार सिंह आदि सैकड़ों आर्य जन विश्व भर से आर्यों का महाकुंभ से जुडकर लाभ उठा रहे हैं ।
कार्यक्रम का प्रारंभ बालक वेदयश के मंत्र पाठ तथा रेयांश शर्मा के शांति पाठ व वैदिक उद्घोष से समापन हुआ करता है।
कार्यक्रम में कमला हंस,दया आर्या हरियाणा,ईश्वर देवी ,संतोष सचान और अदिति आर्या के सुमधुर ईश -भजनों को सुनकर श्रोतागण झूम उठे।
कार्यक्रम का संचालन मंत्री आर्य रत्न शिक्षक लखनलाल आर्य तथा प्रधान मुनि पुरुषोत्तम वानप्रस्थ ने सबके प्रति आभार जताया।

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