निष्काम कर्म से ही मोक्ष प्राप्ति संभव ::: — आचार्य योगेश वैदिक, दर्शनाचार्य, दर्शन योगधाम, गुजरात

महरौनी (ललितपुर)। महर्षि दयानन्द सरस्वती योग संस्थान आर्य समाज महरौनी के तत्वावधान में विगत 2 वर्षों से वैदिक धर्म के मर्म को युवा पीढ़ी से परिचित कराने के उद्देश्य से प्रतिदिन मंत्री आर्यरत्न शिक्षक लखनलाल आर्य द्वारा आयोजित आर्यों का महाकुंभ कार्यक्रम में दिनांक 20 अक्टूबर 2022 दिन गुरुवार को “सकामता से निष्कामता की ओर” “विषय पर मुख्य वक्ता आचार्य योगेश वैदिक दर्शनाचार्य दर्शन योगधाम , गांधीनगर, गुजरात ने कहा कि यजुर्वेद के अन्तिम 40 वें अध्याय ,जिससे ईशोपनिषद् कहते हैं ,उसके दूसरे मंत्र में 100 वर्षों तक कर्म करते हुए जीने की इच्छा की गई है — कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेत् शतं समा:। निश्चयेन जीव कर्म किए बिना क्षण भर भी नहीं रहता । जब कामना से युक्त होकर कर्म किया जाता है तो वह सकाम कर्म कहलाता है और कामना से रहित कर्म निष्काम कर्म कहाता है। अब हम विचार कररें कि हम क्या चाहते हैं। सकाम कर्म हमें बार-बार मनुष्य जन्म देने वाला है और निष्काम कर्म हमें जीवन मुक्ति की ओर ले जाने वाला है ।जब तक हम वित्तैषणा, पुत्रैषणा और लोकैषणा से फंसे रहेंगे तब तक हम आवागमन के चक्र से नहीं छूट पाएंगे। ईश्वर ने यह संसार भोग और अपवर्ग के लिए बनाया है तो हमें इस पर गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिए।हम हजारों – लाखों वर्षों तक जन्म – मरण के बंधन से बंधे रहे ,अब हमें विश्राम करना चाहिए।तब हम सकाम कर्मचारी से निष्काम कर्म की ओर बढ़ पाएंगे। हमें ऐसे कर्म करने हैं जिससे हम कर्म के बंधन में न बंधे। हमें कामना रहित होकर पुण्य कर्म करते हुए परोपकार करना चाहिए । फल की आकांक्षा से रहित कर्म करने की जरूरत है,ऐसे कर्म हमें मुक्ति की ओर ले जाएंगे ।यदि हम मोक्ष पाना चाहते हैं तो हमें सकामता से निष्कामता की ओर जाना ही होगा ।निष्काम कर्म ही हमें मोक्ष प्राप्ति करा सकता है।
अन्य वक्ताओं में प्रो.डॉ व्यास नन्दन शास्त्री वैदिक ने कहा कि परमात्मा ने हमें मनुष्य चोला अनेक शुभ कर्मों के पश्चात् दिया है तो हमें मोक्ष – प्राप्ति का उपाय भी सोचना चाहिए ,पर इसके लिए हमें ऐषणाओं से मुक्त होकर निष्काम कर्म की ओर ही जाना पड़ेगा ,बिना निष्काम कर्म से हमें मुक्ति मिलना संभव नहीं है। इसी क्रम में प्रो . निष्ठा विद्यालंकार लखनऊ ,प्रो.डॉ वेद प्रकाश शर्मा बरेली, अनिल कुमार नरूला दिल्ली, प्रधान सिंह सचदेवा दिल्ली, देवी सिंह आर्य दुबई, भोगी प्रसाद म्यांमार, चंद्रशेखर शर्मा जयपुर, सुरेश कुमार गर्ग गाजियाबाद, परमानंद सोनी भोपाल, आर्य चंद्रकांता “क्रांति”हरियाणा वीर सिंह हरियाणा, भंवर सिंह आर्य दुबई, शिक्षिका आराधना सिंह, सुमनलता सिंह आर्य शिक्षिका, अवधेश प्रताप सिंह बैंस आदि सैकड़ों लोग विश्व भर से आर्यों का महाकुंभ से जुड़कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
कार्यक्रम में कमला हंस, दया आर्या् हरियाणा, ईश्वर देवी, संतोष सचान, अदिति आर्या के सुमधुर भजनों की प्रस्तुति से श्रोता गन झूम उठे। कार्यक्रम का प्रारंभ बालक वेदयश के मंत्र पाठ और बालक रेयांश शर्मा के शांति पाठ एवं वैदिक उद्घोष से समापन हुआ करताहै।
कार्यक्रम का संचालन मंत्री आर्यरत्ना शिक्षक लखन लाल आर्य तथा प्रधान मुनि पुरुषोत्तम वानप्रस्थ ने सब के प्रति आभार जताया।

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