“रस्क खाता है भारत ,मधुमेंह पालता है भारत”


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भारत में 10 करोड लोग टाइप टू डायबिटीज से पीड़ित है। लगभग 40 करोड़ की आबादी को डायबिटीज होने की प्रबल संभावना है अर्थात प्रीडायबिटीज फेस में है……। डायबिटीज अर्थात मधुमेह के रोगियों के मामले में भारत दुनिया की राजधानी बन गया है। वह भारत जहां ढूंढने से भी शुगर /डायबिटीज का रोगी दिखाई नहीं देता था…। शहर तो छोड़िए आज प्रत्येक गांव मे सैकड़ों परिवार में औसत एक मधुमेह का रोगी मिल जायेंगा ।
मधुमेह की गणना गैर संचारी रोग में की गई है यह एक डिसऑर्डर है।जो बहुत से रोगो उपद्रव का समूह है। आज भारत में करोड़ों व्यक्ति मधुमेह से ग्रस्त हैं तो इसमें सबसे बड़ा योगदान रस्क का है…. यदि आप नाश्ते में केवल 3 रस्क खाते हैं तो आप 12 ग्राम शुगर 4 ग्राम वसा अपने शरीर में ले लेते हैं । रस्क एक मृत भोजन है, 100 ग्राम में 70 ग्राम मैदा होती है कोई भी रस्क मैदा से रहित नहीं होता… रस्क निर्माता विदेशी, स्वदेशी कंपनियों का सबसे बड़ा छलावा तो यही है सूजी आटा फाइबर रस्क बताकर रस्क को बेचा जाता है लेकिन 70 फ़ीसदी मैदा ही रस्क में होती है। मैदा हमारी आतो की क्रिया प्रणाली को बाधित करता है नतीजा हमारा मेटाबॉलिज्म बिगड़ जाता है रक्त में शुगर का स्तर तेजी से बढता है…. हमारा अग्नाशय ना चाहते हुए भी अपार मात्रा में इंसुलिन बनाता है… 1 दिन इंसुलिन बनाते बनाते थक जाता है…. और हम बन जाते हैं मधुमेह के रोगी… भगवान ने हमारे शरीर की व्यवस्था ऐसी बनाई है हमारे लगभग 6 लीटर रक्त में हमेशा 6 ग्राम शुगर उपस्थित रहती है शरीर अपनी उर्जा के लिए इसका इस्तेमाल करता रहता है तथा इस मात्रा को रक्त में बरकरार बनाए रखता है अतिरिक्त शुगर हमारे लीवर उतक में संचित रहती हैं…. बहुत सटीक बेजोड़ व्यवस्था है लेकिन रस्क जैसा मृत आहार इसी व्यवस्था में सेंधमारी करता है…. रस्क के स्थान पर ढेरों हेल्दी ब्रेकफास्ट के विकल्प मौजूद है दलिया पोहा बेसन या मूंग का चीला , रोस्टेड चना, उबला चना रोस्टेड, मखाना ऐसे असंख्य विकल्प है…. जो रक्त में तेजी से गुलकोज के स्तर को नहीं बनाते पाचन की प्रक्रिया को स्वस्थ रखते हैं…. मधुमेह खराब पाचन की बीमारी है लेकिन भारत में लोग भूख से नहीं गलत खा कर मर रहे हैं।हैरत तो तब होती है जब मधुमेह के रोगी जो मधुमेह का दंश झेल रहे हैं शुगर की गोली (मैटफोरमिन )खाकर या इंसुलिन इंजेक्ट कर नाश्ते में रस्क बड़े चाव से खाते हैं अपने शरीर पर दोहरा अत्याचार ऐसे लोग अपनी नादानी से करते हैं उन्हें देखकर अन्य भी मधुमेह के रोगी बनने की राह पर निकल पड़ते है 20 वर्ष के युवक टाइप टू डायबिटीज का शिकार हो रहे है इसके कारण। मधुमेह के दानव से भी बचना है तो रस्क ब्रेड केक बिस्किट जैसे मृत आहार को अपनी रसोई रेफ्रिजरेटर से बाहर निकालना पड़ेगा… रस्क आदि मे ना विटामिन है ना फाइबर न खनिज है और ना ही अच्छी प्रोटीन है यह किसी भी दृष्टि से आहार नहीं है…. सेहत को हाँ रस्क को ना।

आर्य सागर खारी ✍✍✍

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