Categories
उगता भारत न्यूज़

उपेंद्र प्रसाद की अंत्येष्टि में कोई पत्रकार शामिल नहीं हुआ* *ऐसे पत्रकार और संगठनों से जनता घृणा करे और उन पर* *सरकार/ पुलिस की मार पड़नी चाहिए*

*आचार्य श्री विष्णुगुप्त*
===============================

पत्रकारों का रंग बदलू, अनैतिक, मतलबी ,स्वार्थी और परउपदेश का चेहरा उपेंद्र प्रसाद की अंत्येष्टि में देखने को मिला। उनकी अत्यष्ठि में एक भी पत्रकार शामिल नहीं हुआ। सिर्फ वरिष्ठ और प्रसिद्ध समाजवादी नेता क्रांति प्रकाश और उत्तराखंड आंदोलन के नेता राजेंद्र रतूड़ी तथा उपेंद्र प्रसाद के रिश्तेदार ब उनके मुहल्ले के चंद लोग ही शामिल थे।
जबकि उपेंद्र प्रसाद के सैकड़ों पत्रकार मित्र थे। उन्होंने दर्जनों पत्रकारों की नौकरियां दी थी और दिलवाई थी। वे नवभारत टाइम्स नई दिल्ली के संपादकीय पेज के इंचार्ज थे, उस दौरान उपेंद्र प्रसाद जी सैकड़ों लोगों को संपादकीय पेज पर लेख प्रकाशित कर एक पत्रकार के तौर पर स्थापित होने का अवसर दिया था और संघर्ष शील लोगो को आर्थिक तौर पर मदद की थी। । उनके द्वारा मदद से कई पत्रकार आज मीडिया में अच्छे अच्छे पदों पर आसीन हैं। एक पत्रकार को अपनी मृत्यु से एक सप्ताह पूर्व ही उन्होंने एक संस्थान से पचास हजार का लेखन कार्य दिलवाया था, वह पत्रकार भी उपेंद्र प्रसाद की मृत्यु पर शोक तक नहीं जताया।सिर्फ पत्रकारों को ही स्थापित नहीं किया था बल्कि राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में लोगों को भी वैचारिक खुराक देकर स्थापित करने का काम किया था।।
उपेंद्र प्रसाद जी पिछले एक दशक से बेरोजगार थे। उनकी आय लगभग अपर्याप्त थी। उनकी पत्नी बीमार ग्रस्त थी। उन्होंने संघर्ष किया । वैचारिक प्रतिबद्धता बनाए रखी, अपने विचार नहीं बदले। पत्नी के बीमार होने के कारण और एकमात्र संतान पुत्री अवयस्क होने के कारण मदद की जरूरत थी। अंतिम क्रिया के लिए सहायता की भी जरूरत थी लेकिन कहीं से सहायता नहीं मिली।अगर बिहार से उनके रिश्तेदार नहीं आते तो फिर अंतिम क्रिया भी शायद विधि विधान के अनुसार नहीं हो पाती।
पत्रकार राजनीतिज्ञों को और समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को उपदेश देता है और उसे नैतिक होने तथा माननीय होने का ज्ञान देता है। लेकिन आज का पत्रकार कितना,अमानवीय है , कितना रंग बदलू है ,कितना पर उपदेशक है, इसका उदाहरण उपेंद्र प्रसाद की अंत्येष्टि में किसी पत्रकार का शामिल नहीं होना है। दिल्ली में अनेक पत्रकार संगठन है जो पत्रकारों के कल्याण की बात करते हैं और पत्रकारों की यूनियन चलाने की बात करते हैं। सभी पत्रकार संगठन न केवल पैसे वसूलने , अपनी जेब भरने और राजनीतिक मकसद साधने हथकंडे है । किसी पत्रकार यूनियन और पत्रकारों के कल्याण के नाम पर खड़े पत्रकार संगठनों ने उपेंद्र प्रसाद की अंत्येष्टि में कोई मदद करना या फिर शामिल होने की जरूरत नहीं समझा। देश की राजधानी दिल्ली में हर साल दर्जनों पत्रकारों की स्वाभाविक और अस्वाभिक मृत्यु होती है पर कोई पत्रकार कल्याण संगठन मदद के लिए आगे नहीं आता। ऐसे हाथी के दांत के तौर पर खड़े पत्रकार कल्याण संगठनों पर सरकार और पुलिस की मार पडनी चाहिए ।
आम जनता पत्रकारों के इस घिनौने चेहरे को जाने और ऐसे पत्रकारों से घृणा करे।

============={====={===============
*आचार्य श्री विष्णुगुप्त*
*New Delhi*
*Date 25 sep 2022*
Mobile..9315206123
==================================

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betsat giriş
betpark giriş
betpark giriş
cratosroyalbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betsat giriş
betsat giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
betsat giriş
betsat giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
jojobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş