ज्योतिष वेद का नेत्र है : आचार्य दार्शनेय लोकेश


ग्रेनो ( विशेष संवाददाता ) 21 दिवसीय चतुर्वेद पारायण महायज्ञ अनुष्ठान के 18 वें दिवस के 35 वें सत्र के अवसर पर वैदिक ज्योतिष के विद्वान आचार्य दार्शनेय लोकेश जी ने वैदिक ज्योतिष की विशेषताओं पर अपना बहुत ही विद्वत्ता पूर्ण और आंखें खोलने वाला उद्बोधन दिया। वर्तमान में प्रचलित अधिकांश पंचांग की त्रुटि पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वर्तमान में जितने भी पंचांग चल रहे हैं वे सब के सब अधूरे अवैज्ञानिक और वेद विरुद्ध ज्ञान पर आधारित हैं। जिन की विश्वसनीयता पूर्णतया संदिग्ध है।
आचार्य लोकेश जी ने कहा कि ज्योतिष के नाम पर लोग पाखंड का शिकार हो रहे हैं। ज्योतिष की रचना ऋषियों ने सृष्टि के इतिहास को समझने और कालगणना को सुरक्षित करने के लिए की थी। ज्योतिष वेदों का अंग है।


पश्चात में कन्या गुरुकुल मुंडा खेड़ी लक्सर जिला हरिद्वार की संचालिका आचार्या डॉक्टर सविता आर्या जी निधि अपना वक्तव्य रखा। उन्होंने कहा कि आर्य समाज ने महर्षि दयानंद से प्रेरणा पाकर देश की आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर योगदान दिया था। डॉक्टर सविता आर्या गांव मुंडा खेड़ी जनपद हरिद्वार में बेटियों के लिए नि:शुल्क गुरुकुल का संचालन कर रही हैं, 50 से अधिक बेटियां उस आवासीय गुरूकुल में शिक्षा अर्जित कर रही हैं। अधिकांश बेटियां निर्धन अभावग्रस्त परिवारों से हैं।
उन्होंने आर्य समाज के स्वाधीनता संग्राम में योगदान विषय पर बड़ा ही प्रेरक ओजस्वी संबोधन दिया। अंतिम आमंत्रित वक्ता के तौर पर भारतीय इतिहास वैदिक शिष्टाचार विषय पर डॉ राकेश कुमार आर्य जी का ओजस्वी संबोधन उपस्थित सैकड़ों आर्य महानुभावों को सुनने को मिला।

जिन्होंने इतिहास के रोमांचकारी विषय को प्रस्तुत कर लोगों को भारतीय इतिहास के गौरवपूर्ण पक्ष से अवगत कराया। डॉक्टर आर्य ने श्री रामचंद्र जी के चरित्र पर भी प्रकाश डाला और जो लोग राम के चित्र की पूजा करते हैं उन्हें उनके चरित्र की पूजा करने के लिए भी प्रेरित किया।
आज के सत्र के समान संजीव भाटी पाली सरजीत नागर जी डेरिन गुजरान रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन जिला सभा के कोषाध्यक्ष आर्य सागर खारी ने किया। कार्यक्रम में शामिल दर्जनों अतिथियों के परिवारों को प्रतीक चिन्ह और आर्य साहित्य देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर यज्ञ के ब्रह्म आचार्य विद्यादेव, आचार्य दुष्यंत, मांगेराम आर्य, महावीर आर्य ,रणवीर आर्य, दिवाकर आर्य, वीरेंद्र आर्य ,चरण सिंह आर्य, प्रेमचंद आर्य आदि सज्जन महानुभाव उपस्थित रहे।

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