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क्या वे सचमुच आतंकवादी थे?

पोरबंदर से 365 कि.मी. दूर अरब सागर में एक पाकिस्तानी नौका को खत्म करने का दावा किया गया है। हमारे रक्षा मंत्रालय ने संदेह व्यक्त किया है कि इस नौका में सवार चार लोग आतंकवादी थे और वे 26/11 की तरह नए साल की शुरुआत पर कोई बड़ा हमला करने की फिराक में थे। इस नौका का हमारे तटरक्षक जवानों ने पीछा किया और जब वह घिरने लगी तो उसके चारों सवारों ने नौका को आग लगा दी। आग लगाने के पहले वे नौका के निचले भाग में छिप गए थे। हमारे रक्षा मंत्रालय ने अपने जवानों को उनके साहस के लिए बधाई दी है।

यदि हमारे जवानों ने मध्य−रात्रि में समुद्र में जाकर आतंकवादियों को खत्म किया है तो वे सचमुच बधाई के पात्र हैं। उन्हें पुरस्कृत किया जाना चाहिए लेकिन कुछ अंग्रेजी अखबारों के रक्षा−विशेषज्ञों ने अपने विश्लेषण में कई सवाल खड़े कर दिए है। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि 25 फुट की नौका के नीचे छिपने की बात क्या अजीब−सी नहीं है? वे पूछ रहे हैं कि यह कैसे हुआ कि उन्होंने अपने बोट में खुद आग लगा ली और वे जिंदा जल मरे? यदि उन्होंने ऐसा किया तो हमारे जवानों ने बहादुरी कैसे दिखाई? और फिर यह तो सबको पता ही है कि वे ‘आतंकवादी’ मुसलमान रहे होंगे। मुसलमान मरने पर दफन होना पसंद करते हैं, जलना नहीं। वे समुद्र में कूदकर अपनी जान बचा सकते थे। इन तर्कों के आधार पर विशेषज्ञ नौका में आग लगने की कहानी की मनगढ़ंत मान रहे हैं।

उनका कहना है कि वह पाकिस्तानी बोट या तो मछुआरों का होगा या फिर तस्करों का! उनके टेलिफोनों की टेप की गई बातचीत में पैसों के लेन−देन और माल पहुंचाने के कई संदर्भ आए हैं। हमारे तटरक्षकों ने उसे आतंकवादियों की नौका समझकर डुबो दिया होगा। तटरक्षकों को यदि उस नौका में आतंकवादियों के होने का संदेह था तो उन्हें भारत सरकार की अन्य गुप्तचर एजेंसियों को तुरंत सूचित करना चाहिए था। उन्होंने वह भी नहीं किया। इसके अलावा यह भी ठीक से पता नहीं कि वह नौका ‘खुले समुद्र’ में थी या भारत की सामुद्रिक सीमा में? यदि वह हमारी सामुद्रिक सीमा में नहीं थी तो हमारे तटरक्षकों ने कहीं अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन तो नहीं कर दिया है?

ये गंभीर प्रश्न हैं। इनके ठोस जवाब यदि भारत सरकार नहीं दे पाई तो उसका काफी मजाक बनेगा, पाकिस्तान में तो इसकी तीव्र प्रतिकि्रया होगी ही। हमारी नौसेना यदि डूबी हुई नौका और मृतकों को खोज निकाले तो उसके आधार पर कोई सुनिश्चित राय बनाई जा सकती है। भारत सरकार में इतना दम है कि यदि उसकी तटरक्षकों से यह गल्ती हो गई है तो वह माफी मांगेगी, जैसे कि कश्मीर के कुछ निर्दोष नौजवानों की हत्या पर उसने खेद व्यक्त किया था और अपने ही फौजियों के खिलाफ कार्रवाई कर दी थी।

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