मोदी फोबिया में फंसे कांग्रेसी नेता

सुरेश हिन्दुस्थानी

वर्तमान में जहां पूरे देश में मोदी के नाम का ज्वार सा दिखाई देता है, वहीं भारत के राजनीतिक दल भी इससे अछूते नहीं दिखते। गैर भाजपा दलों के कार्यक्रमों जब तक मोदी का नाम नहीं आता तब तक एक अधूरापन सा दिखाई देता है। कहीं तारीफ के लिए तो कहीं विरोध के लिए मोदी प्रासंगिक बन गए हैं। अभी हाल ही में जिस प्रकार से कांग्रेस की दिग्गज नेता कृष्णा तीरथ भाजपा में शामिल हुईं तो इसे मोदी का राजनीतिक प्रभाव ही माना जाएगा। वे मोदी के राजनीतिक कार्य कुशलता की तारीफ तो कर ही रहीं हैं, साथ ही कांग्रेस पर भी कई प्रकार के सवाल उठा रहीं हैं। कृष्णा ने कहा था कि कांगे्रस में अनुशासन नाम की चीज नहीं है, इतना ही नहीं उन्होंने तो यह भी कहा है कि अब वे मोदी के कांग्रेस मुक्त भारत बनाने में पूरा योगदान देंगी। इस प्रकार की राजनीतिक परिस्थिति में अगर कोई कांग्रेसी नेता मोदी की तारीफ कर दे तो कांग्रेस के अन्य नेताओं के कान खड़े हो जाना स्वाभाविक है। अभी हाल ही में कांग्रेस के संवेदनशील नेता जनार्दन द्विवेदी द्वारा मोदी की तारीफ करने के बाद अचानक यह सवाल जन्मित होने लगा कि कहीं ये भी तो भाजपा में नहीं जा रहे। हालांकि बाद में जैसा राजनीति में होता आया है वैसा ही बयान द्विवेदी ने दिया कि मैंने ऐसा नहीं बोला, लेकिन यह सत्य है कि जो भी बोला वह मोदी की तारीफ को ही प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा था कि 2014 का चुनाव निर्णायक रहा, इस जीत को नरेन्द्र मोदी की जीत नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे।

जनार्दन द्विवेदी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी के वरिष्ठतम महासचिव भी हैं। जनार्दन द्विवेदी के एक बयान ने पूरी कांग्रेस में भूचाल ला दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जीत को भारतीयता की जीत बताने वाले द्विवेदी के बयान के बाद कांग्रेस को अब भारतीयता की परिभाषा गढऩी पड़ रही है। नौबत यहां तक आ गई कि जनार्दन द्विवेदी को कांग्रेस की अनुशासन समिति के प्रमुख एके एंटनी के सामने पेश होना पड़ा। पिछले दो दिनों से कांग्रेस महासचिव के बयान को लेकर कांग्रेस में मचे घमासान के बाद खबर है कि 69 वर्षीय कांग्रेस नेता के खिलाफ पार्टी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने नहीं जा रही है। राजनेताओं के विवादित बयानों के मामले में अक्सर यही होता है, जैसा कि जनार्दन द्विवेदी के मामले में हुआ। बयान आने के बाद राजनेताओं द्वारा यही सफाई दी जाती है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। नरेन्द्र मोदी की तारीफ कर मुश्किल में जनार्दन द्विवेदी को कांग्रेस आलाकमान ने राहत दे दी, लेकिन दो दिनों की इस बयानी जंग ने कांग्रेस के चरित्र को सामने ला दिया। बयान को लेकर जो हो-हल्ला कांग्रेस के गलियारों में मचा उससे यह तो स्पष्ट हो गया कि पार्टी किस कदर मोदी फोबिया से ग्रसित है। और उसके पास न कहने के लिए कुछ है और न करने के लिए कुछ बचा है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में शर्मनाक पराजय के बाद मानसिक अवसाद की स्थिति में आई कांग्रेस किस दिशा में है, इसे लेकर पार्टी नेतृत्व ही भ्रमित है।

जनार्दन द्विवेदी ने नरेन्द्र मोदी की तारीफ क्या कर दी। पूरी पार्टी में खलबली मच गई। जनार्दन द्विवेदी तो सफाई दे ही रहे थे कांग्रेस महासचिव अजय माकन को प्रेस वार्ता बुलानी पड़ी। जनार्दन द्विवेदी और कांग्रेस भले ही इस मामले में सफाई देकर अपनी खीज मिटा रहे रहे हों लेकिन सच वही है जो जनार्दन द्विवेदी ने न्यूज पोर्टल के पत्रकार से बातचीत में कहा था कि 2014 के चुनाव परिणाम वास्तव में भारतीय राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ था, जिसने भारतीय राजनीति की दिशा और दशा को बदल दिया। अगर इस जीत को भाजपा या नरेन्द्र मोदी या भारतीयों की जीत न कहा जाए तो क्या कहा जाए? जनार्दन द्विवेदी का यह बयान कांग्रेस नेतृत्व को इतना नागवार गुजरा कि जर्नादन द्विवेदी नेता न होकर मुद्दा बना दिए गए। कांग्रेस की भारतीयता की परिभाषा में सीमाओं की मर्यादा है, कांग्रेसी नेता हमेशा ही अपने वंशानुगत राजनीति के क्रम के समर्थन में ही बयान देकर अपना कर्तव्य समझते हैं। अब सवाल उठता है कि भारतीयता की परिभाषा क्या जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी से शुरू होकर इन पर ही खत्म होती है। कांग्रेस को अपनी आंखों पर पड़ी पट्टी उतार कर इस सच को स्वीकार करना होगा कि सवा सौ करोड़ भारतीयों ने भाजपा में विश्वास जता कर नरेन्द्र मोदी को देश का नेतृत्व सौंपा है। जनार्दन द्विवेदी के बयान की बात करें तो यह भी सच है कि केन्द्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सत्तासीन होने के बाद देश ने करवट ली और यह दौर नए युग की शुरुआत है। पूरी तरह से जनाधार खो चुकी कांग्रेस को तो अब भारतीयता पर टीका-टिप्पणी करने का भी अधिकार नहीं है। सच पूछा जाए तो कांग्रेसी हमेशा ही भारतीयता से दूर ही रहे हैं, उन्हें तो आजकल कुछ ज्यादा ही इंडिया से मोह हो गया है। यह शायद मैडम सोनिया को खुश करने की कवायद मानी जा सकती है। अगर कांग्रेस के नेता वास्तव में अपने भारत प्रेम को दर्शाना चाहते हैं तो उन्हें निसंकोच भाव से इस प्रेम को प्रदर्शित करना चाहिए।

नरेन्द्र मोदी के भारतीयता के प्रतीक होने पर देश को कांग्रेस के प्रमाण की भी जरूरत नहीं है। सच तो यह है कांग्रेस ने कभी देश को पहचानने की कोशिश ही नहीं की। भारतीय जीवन मूल्य और संस्कृति को समझने पर ही देश की समस्याओं को दूर किया जा सकता है। मोदी सरकार इन भारतीय मूल्यों को लेकर ही आगे बढ़ रही है। जन अपेक्षाओं पर खरा उतरना सत्ता का धर्म और कर्तव्य है। यही मोदी सरकार कर रही है। कांग्रेस की खीज यही है कि नरेन्द्र मोदी क्यों जनता के बीच लोकप्रिय हैं।

Comment:

mariobet giriş
mariobet giriş
betpark giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
hilarionbet giriş
hilarionbet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
hilarionbet giriş
hazbet giriş
hazbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
maxwin giriş
maxwin giriş
norabahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
celtabet giriş
celtabet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş