Categories
देश विदेश

अब चीन ने किया म्यांमार के साथ मित्रता का ढोंग

हर्ष वी. पंत

म्यांमार में चीन इधर कई पुराने प्रॉजेक्ट्स को रिवाइव करने की कोशिश कर रहा है, जिसे वहां की लोकतांत्रिक सरकार ने पहले बंद कर दिया था। उन प्रॉजेक्ट्स से म्यांमार में पर्यावरण पर बुरा असर पड़ने का डर था। लेकिन सैन्य शासन की वजह से अब इन्हें फिर से शुरू करना आसान हो गया है। इनमें सालवीन नदी पर बनने वाला बांध, बासाइन डीप सी पोर्ट जैसे प्रॉजेक्ट्स शामिल हैं। इस पोर्ट प्रॉजेक्ट को रेल और रोड से भी जोड़ा जा रहा है। यह कनेक्टिविटी चीन के कुनमिंग तक होगी। दूसरी ओर, चीन को म्यांमार के कोकांग रीजन से जोड़ने के लिए क्रॉस बॉर्डर स्पेशल इकॉनमिक जोन बनाया जा रहा है।

क्या चाहता है चीन
इनमें से कुछ प्रॉजेक्ट्स ऐसे हैं, जिनसे चीन भारत को टारगेट कर रहा है। भारत की मुश्किलें बढ़ाने के लिए वह बांग्लादेश का भी इस्तेमाल करना चाहता है।

बांग्लादेश के लैंड बॉर्डर के जरिए चीन भारत के पूर्वी तटों के करीब पहुंचने की कोशिश कर रहा है।

म्यांमार में वह ग्रेटर मेकोंग रीजन पर दबदबा बनाना चाहता है, चाहे उसमें म्यांमार-कंबोडिया और थाईलैंड वाला ही इलाका क्यों न हो। इसके जरिये उसकी नजर हिंद महासागर क्षेत्र पर है।

भारत के खिलाफ म्यांमार का इस्तेमाल करने की योजना पर चीन लंबे समय से काम कर रहा है। वह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की पकड़ को कमजोर करना चाहता है। उसकी इस योजना में म्यांमार की सैन्य सरकार महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है।

हिंद महासागर पर चीन की नजर काफी समय से रही है। अगर चीन का हिंद महासागर में दखल बढ़ता है तो इससे उसे भारत को घेरने में मदद मिलेगी। इसके साथ भारत की जो पूरी हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर रणनीति है, जिसमें वह इस इलाके को एक मैरिटाइम यूनिट के तौर पर देखता है, चीन इसे भी चैलेंज कर पाएगा। लेकिन इधर उसकी इस रणनीति पर सवालिया निशान लग गया है।

चीन जिस तरह से एक समय श्रीलंका को हिंद महासागर में अपने पावर प्रॉजेक्शन हब के रूप में देख रहा था, उसे पड़ोसी देश में चल रहे हालिया संकट से बड़ा धक्का लगा है।

श्रीलंका क्राइसिस के कारण बांग्लादेश सहित दक्षिण एशिया के कई देश चीन की कर्ज डिप्लोमेसी से आशंकित हैं।

ऐसे में उसके लिए म्यांमार की अहमियत काफी बढ़ गई है। इसके साथ उसे आशंकित बांग्लादेश को लैंड कॉरिडोर के लिए भी राजी करना होगा।

म्यांमार को साधना चीन के लिए आसान है। वहां की सैन्य सरकार को अभी पैसों की जरूरत है, जिसे दुनिया ने लोकतांत्रिक सरकार का तख्तापलट करने के लिए अलग-थलग किया हुआ है। चीन इसी का फायदा उठाकर वहां अपनी पकड़ मजबूत बनाने में जुटा हुआ है। म्यांमार की मदद से चीन, भारत की अपने पूर्वी हिस्से की योजना को भी बाधित करना चाहता है। पिछले कुछ समय से भारत ने अपने पूर्वी हिस्से पर काफी ध्यान देना शुरू किया है। यहां उसने बिम्सटेक के जरिए उपस्थिति बनानी शुरू की है।
भारत की योजना
दक्षिण पूर्व एशिया के लिए भारत ने कहा है कि म्यांमार और थाईलैंड जैसे देशों से भारत का पारंपरिक रिश्ता रहा है, इसलिए इस क्षेत्र की खातिर भारत कोई बाहरी ताकत नहीं है। म्यांमार और थाईलैंड उसके लिए महत्वपूर्ण देश हैं। चीन, म्यांमार के जरिए भारत की इसी रणनीति को तोड़ने की कोशिश कर रहा है। भारत के लिए चुनौती काफी ज्यादा है क्योंकि वह भी म्यांमार की सैन्य सरकार के साथ अपने संबंध अच्छे रखना चाहता है। इसलिए लोकतांत्रिक सरकार हटाए जाने के बाद भारत ने वहां की सैन्य सरकार से संबंध नहीं तोड़े।

भारत के लिए भी म्यांमार की सेना का सपोर्ट बहुत जरूरी है क्योंकि नॉर्थ ईस्ट में कई सारे उग्रवादी समूह हैं, जिनके खिलाफ जब भारत कार्रवाई करता है तो उसे म्यांमार की मदद की जरूरत पड़ती है।

भारत और म्यांमार ने 2010 में एग्रीमेंट किया था कि दोनों देश की सेनाएं क्रॉस बॉर्डर जाकर उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती हैं। इसी के तहत म्यांमार की सीमा के अंदर चल रहे नगालैंड और मणिपुर के विद्रोही संगठनों को भारत ने टारगेट किया।

इसलिए भारत भी म्यांमार को आर्थिक और सैन्य मदद दे रहा है, ताकि पश्चिमी देशों के हटने से वहां जो खालीपन है, उसे अकेले चीन ना भर सके।

लेकिन यह बात सही है कि जिस तरह का निवेश चीन कर रहा है, जिस तरह के रिर्सोसेज दे रहा है, उससे चीन का दखल वहां काफी ज्यादा बढ़ा है। वह इस समय म्यांमार को धन के साथ हथियार भी दे रहा है। चीन, म्यांमार को दिखाना चाहता है कि भले दुनिया खिलाफ रहे, लेकिन वह उसके सैन्य शासन को मान्यता दे सकता है।

चीन की यह रणनीति भारत के लिए काफी दिक्कत पैदा करने वाली है। भारत को बैलेंस अप्रोच के साथ आगे बढ़ना पड़ेगा क्योंकि वहां की सैन्य सरकार के साथ उसके भी हित जुड़े हुए हैं।

म्यांमार में चीन की उपस्थिति देखते हुए भारत को आगे की रणनीति बनानी पड़ेगी। जिस तेजी से चीन वहां की इन्फ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी में आगे बढ़ रहा है, भारत को और भी सशक्त तरीके से आगे बढ़ना पड़ेगा। म्यांमार में भारत के काफी सारे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्टस सालों से चल रहे हैं, जो अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। वह उन्हें पूरा करके म्यांमार को एक ऑल्टरनेटिव दे सकता है। वह म्यांमार को श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे देशों का हाल दिखाकर चीन से आगाह कर सकता है। भारत के लिए ये सारे तथ्य अहम हैं। उसे इन सभी बातों का ध्यान रखकर अपनी म्यांमार नीति बनानी होगी। तभी वह हिंद महासागर को लेकर चीन की चाल को नाकाम कर पाएगा।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
kuponbet giriş
Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
grandpashabet giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betnano
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
wbahis giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino
vaycasino giriş
vaycasino
betpark giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
enbet giriş
grandpashabet giriş
wbahis giriş
grandpashabet giriş
wbahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
realbahis giriş
grandpashabet giriş
ikimisli giriş
grandpashabet giriş
palacebet giriş
grandpashabet giriş
kalebet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
winxbet giriş
betyap
hilbet giriş
hilbet giriş
betmarino giriş
betyap
betnano giriş
grandpashabet giriş
ikimisli giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
berlinbet giriş