Categories
राजनीति

भारत के राजनीतिक दलों की भाई भतीजावाद और परिवारवाद की राजनीति से जनता हो चुकी है परेशान

अजय कुमार 

शिवसेना हिन्दूवादी पार्टी कहलाती है लेकिन इसके नेता उद्धव ठाकरे ने विधानसभा चुनाव से पहले ही पुत्र आदित्य ठाकरे को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने की योजना बनाई थी। अपनी योजना के लिए उद्धव ठाकरे ने दूसरी हिन्दुत्त्ववादी पार्टी भाजपा से 30 साल पुराने संबंध तोड़ लिये।

भारतीय जनता पार्टी के तमाम नेता और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं उनके मंत्रिमण्डल के सहयोगी आजकल परिवारवाद की सियासत को लेकर काफी गंभीर नजर आ रहे हैं। जब भी मोदी या बीजेपी नेता जनता के बीच जाते हैं या फिर मीडिया से मुखातिब होते हैं तो परिवारवाद से देश को होने वाले नुकसान की चर्चा करना नहीं भूलते हैं। जिस राज्य में वह जाते हैं उस राज्य में फैले परिवारवाद की राजनीति को निशाना बनाते हैं। बीजेपी नेता विपक्षी दलों के परिवारवाद पर तो हमला करते ही हैं, यह भी बताते हैं कि राजनीति में पुत्र मोह की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इससे फायदा कम, नुकसान ज्यादा होता है। इसके कई उदाहरण देश में मौजूद हैं। पुत्र मोह के चलते हिन्दू हृदय सम्राट बाला साहब ठाकरे ने अपने भतीजे और उनके (बाला साहब) सियासी उत्तराधिकारी समझे जाने वाले राज ठाकरे की जगह अपने बेटे उद्धव ठाकरे को शिवसेना की कमान सौंप दी थी, जबकि उद्धव की राजनीति में कोई रूचि नहीं थी। वह वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर थे और उसी में खुश नजर आते थे जबकि बाला साहब के भतीजे राज ठाकरे सियासत में रूचि रखते थे। इस बात का आभास बाला साहब को था भी, लेकिन चाचा बाला साहब के पुत्र मोह में भतीजे राज ठाकरे सियासी ठगी का शिकार हो गए। पुत्र मोह के चलते ही एक बार फिर से शिवसेना का अस्तित्व संकट में आ गया है। अबकी से शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के पुत्र मोह ने सेना को ‘चौराहे’ पर खड़ा कर दिया है। उद्धव को अपना सियासी अस्तित्व बचाना मुश्किल हो गया है। उद्धव के पुत्र मोह के चलते उनके सबसे वफादार नेता एकनाथ शिंदे और करीब 38 अन्य विधायकों ने पार्टी से नाता तोड़कर न केवल अपना अलग गुट बना लिया, बल्कि उद्धव ठाकरे से सत्ता छीन कर एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री भी बन गए हैं।

बहरहाल, भारतीय राजनीति में पुत्र मोह के चलते पार्टी के पतन का यह कोई पहला मामला नहीं है। शिवसेना इसका सबसे ताजा उदाहरण जरूर है। इससे पहले उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने अपने पुत्र अखिलेश यादव को सियासत में आगे बढ़ाने के लिए अपने ही दो भाइयों को आमने-सामने खड़ा कर दिया था। एक और शिवपाल सिंह यादव ने अखिलेश यादव के खिलाफ ताल ठोंकी तो दूसरी ओर प्रोफेसर राम गोपाल यादव ने अखिलेश यादव को हर तरह से सहारा देकर पार्टी का राष्ट्रीय अध्याय बनाने में पूरी तरह से मदद की। इसका असर यह हुआ कि पार्टी इस महाभारत का शिकार हो गई और जनता के बीच जो साख बन रही थी वह खत्म हो गई। समाजवादी पार्टी की दुर्गति लोकसभा व विधानसभा चुनाव में लोग देख ही चुके हैं। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के कुनबे में सत्ता का संघर्ष इसी तरह हुआ और लालू प्रसाद यादव अपने पुत्रों के बीच कोई ठोस फैसला नहीं कर सके। जब उनके पुत्र बालिग नहीं हुए थे तब जेल जाने से पूर्व अपनी कुर्सी पत्नी राबड़ी देवी को सौंप दी थी।

कांग्रेस का नाम लिए बिना पुत्र मोह की सियासत पर चर्चा पूरी नहीं हो सकती है। कांग्रेस तो नेहरू-इंदिरा परिवार की विरासत ही समझी जाती है। कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर ज्यादातर समय नेहरू-गांधी परिवार का कब्जा रहा। सोनिया गांधी के पुत्र मोह ने कांग्रेस को अर्श से फर्श पर पहुंचा दिया है। उत्तर प्रदेश जहां से कांग्रेस ने दिल्ली की राजनीति में जड़े जमायी थीं, वह यूपी आज कांग्रेस विहीन हो गया है। यूपी में कांग्रेस को कोई पूछने वाला नहीं है। यूपी कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के पूर्व चेयरमैन और पूर्व एमएलसी सिराज मेहंदी से एक बार जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पुत्र मोह में फंसी हैं, जिसके कारण राहुल और प्रियंका कांग्रेस को बर्बाद करने में लगे हैं। सिराज मेहंदी ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा यूपी में लल्लू को कांग्रेस अध्यक्ष बना दिया गया, जिनकी अपनी ही छवि नहीं सही थी, वह कांग्रेस को कैसे उभार सकते हैं।
     
बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती जो सियासी परिवारवाद के सख्त खिलाफ थीं, उनको जब पार्टी संभालने के लिए किसी विश्वासपात्र जरूरत पड़ी तो उन्हें भतीजे का नाम सबसे अधिक समझ में आया। 2019 में बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं भतीजे आकाश को नेशनल कार्डिनेटर बनाकर कटोरी का घी थाली में गिराने का काम कर लिया। बीएसपी संगठन में बदलाव से ज्यादा चर्चा मायावती के भतीजे आकाश को लेकर हुई। युवा आकाश को मायावती का उत्तराधिकारी माना जा रहा है। आकाश के सक्रिय राजनीति में उतरने से यूपी की राजनीति में एक और युवा चेहरे की आधिकारिक एंट्री हो गई। आकाश मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के पुत्र हैं।
शिवसेना की बात की जाए तो 15 साल तक राज करने वाली सेना की आज हालत दयनीय बनी हुई है। महाराष्ट्र में शिवसेना प्रमुख हिन्दूवादी पार्टी कहलाती है लेकिन इसके नेता उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले ही अपने पुत्र आदित्य ठाकरे को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने की योजना बनाई थी। अपनी योजना के लिए उद्धव ठाकरे ने दूसरी हिन्दुत्त्ववादी पार्टी भाजपा से 30 साल पुराने संबंध तोड़ लिये। हालांकि संबंध तोड़ने के बाद कांग्रेस और एनसीपी ने आदित्य ठाकरे पर भरोसा नहीं किया और उद्धव ठाकरे को ही मुख्यमंत्री बनने के लिए विवश कर दिया। अब उनकी पार्टी की साख को बट्टा लग गया है। इस साख को बचाने के लिए ही बार-बार वह स्वयं को हिन्दुत्ववादी पार्टी कह रहे हैं। साथ ही अयोध्या का दौरा करके राम मंदिर निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये देने का ऐलान भी किया है।
पुत्र मोह का एक और बड़ा उदाहरण पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मिलता है। वो है राष्ट्रीय लोकदल के सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह का। चौधरी अजित सिंह, उन चौधरी चरण सिंह की इकलौती संतान थे, जिन्होंने अजित सिंह की जगह हेमवती नंदन बहुगुणा और मुलायम सिंह यादव को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी कहा था। चौधरी चरण सिंह ने सियासत के लिए वंश नहीं बल्कि योग्यता को तरजीह दी थी। लेकिन अजित सिंह ने अपने पिता चौधरी चरण सिंह की इस सीख से मुंह मोड़कर अपने पुत्र जयंत चौधरी के अलावा किसी अन्य नेता को आगे बढ़ने का मौका नहीं दिया। इसके चलते राष्ट्रीय लोकदल इन्हीं दोनों पिता-पुत्र के बीच सिमटकर रह गया।

हरियाणा में चौधरी देवी लाल का भारतीय राजनीति में अच्छा खासा दबदबा था। उनके बेटे ओम प्रकाश चौटाला ने भी अपने पुत्र मोह में अपने ही दल का बंटाधार कर लिया। किसान राजनीति के सिरमौर माने जाने वाले देवीलाल के रुतबे की बदौलत ओम प्रकाश चौटाला ने हरियाणा में राज किया लेकिन वह बेटों को लेकर राजनीति के जिस झंझावात में फंसे, उससे उनके दल की दशा दलदल-सी हो गई। पंजाब में सबसे युवा और सबसे बुजुर्ग मुख्यमंत्री का तमगा हासिल करने वाले अकाली दल के अध्यक्ष प्रकाश सिंह बादल की राजनीति भी पुत्रमोह का शिकार हो गई और उनका दल पंजाब की सत्ता में पुनः आने के लिए संघर्ष कर रहा है लेकिन बादल के पुराने वोटर अब उनके दल पर पहले जैसा विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। इन प्रमुख राजनीतिक दलों के अलावा केन्द्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने भी अपने बेटे चिराग पासवान को आगे बढ़ाया और उनके दल की सियासत का हाल आज सबके सामने है। इसी तरह से झारखंड में चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनने वाले हेमंत सोरेन को राजनीति अपने पिता शिबू सोरेन से विरासत में मिली है। कांग्रेस के धाकड़ नेता रहे अजीत जोगी ने छत्तीसगढ़ में अपने बेटे अमित जोगी को आगे बढ़ाने की कोशिश की। हालांकि उनके बेटे ने विधानसभा के सदस्य तक का सफर तो आसानी से तय कर लिया लेकिन इसके आगे की कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं कर सके हैं।
       
पिछले दिनों महाराष्ट्र की सियासत में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिले। सत्ता के खेल में बगावत-वफादारी, शर्म-बेशर्मी, गाली-गलौच, छल-प्रपंच, धमक-धमकी सब कुछ सरेआम सड़क पर ‘नंगा नाच’ कर रही थी। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री की कुर्सी की चाहत और पुत्र आदित्य ठाकरे के मोह में फंसकर अपना मान-सम्मान सब कुछ खत्म कर लिया। आदित्य ठाकरे जो उद्धव सरकार में कैबिनेट मंत्री थे पूरे ढाई वर्ष तक विवादों में घिरे रहे। जहां तक महाराष्ट्र की सियासत का सवाल है तो पिछले विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन को सत्ता और कांग्रेस एवं शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस दोनों को ही विपक्ष में बैठने का जनादेश दिया था, लेकिन हुआ उलटा। शिवसेना ने मुख्यमंत्री की कुर्सी के लालच में उन दलों से हाथ मिला लिया जिनको उसने चुनावी मैदान में पटखनी दी थी और उस भाजपा को ठेंगा दिखा दिया जिसके नेता और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चुनावी जंग में फोटो लगाकर शिवसेना ने अच्छी खासी सीटें हासिल की थीं।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betlike giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betlike giriş
betparibu giriş
betebet giriş
norabahis giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betnano giriş
parmabet giriş
piabellacasino giriş
betovis giriş
casinomilyon giriş
casinomilyon giriş
casinomilyon giriş
milanobet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
betgaranti mobil giriş
parmabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
savoybetting giriş
parmabet giriş
betlike giriş
betcup giriş
hitbet giriş
norabahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betcup giriş
betebet giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
nesinecasino giriş
pumabet giriş
pumabet giriş
nesinecasino giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betnano giriş
betticket giriş
betticket giriş
restbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
romabet giriş
romabet giriş
betnano giriş
betpipo giriş
betpipo giriş
nesinecasino giriş
nesinecasino giriş
bahislion giriş
istanbulbahis giriş
istanbulbahis giriş
bahislion giriş
bahislion giriş
betebet giriş
betebet giriş
betebet giriş
betplay giriş
betebet giriş
rekorbet giriş
betnano giriş
romabet giriş
betpas giriş
betnano giriş
betebet giriş
betpas giriş
savoybetting giriş