राजेश पायलट डिग्री कॉलेज सकलपुरा में चतुर्वेद पारायण यज्ञ की तैयारियों पर बैठक हुई संपन्न

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गाजियाबाद । ( अजय कुमार आर्य) यहां स्थित राजेश पायलट डिग्री कॉलेज सकलपुरा में क्षेत्र के 24 गांवों के गणमान्य आर्य समाज से जुड़े लोगों की एक विशेष बैठक संपन्न हुई। जिसमें आगामी 6 नवंबर से 13 नवंबर तक आयोजित किए जाने वाले चतुर्वेद पारायण यज्ञ की तैयारियों पर विचार विमर्श किया गया। इस संबंध में जानकारी देते हुए राजेश पायलट डिग्री कॉलेज के प्रबंधक विजय पाल सिंह कसाना ने बताया कि सभी लोगों ने उपरोक्त यज्ञ को सफल बनाने के लिए अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत किए। सभी ने उपरोक्त कार्यक्रम को पूरी भव्यता से आयोजित करने पर बल दिया। वक्ताओं का मानना था कि पूर्ण वैदिक विधि विधान से यज्ञ संपन्न कराया जाए , जिससे अधिक से अधिक लोगों और प्राणियों को इस यज्ञ का लाभ प्राप्त हो सके।
श्री कसाना ने बताया कि बड़ी संख्या में उपस्थित हुए लोगों और उनकी पवित्र भावना को देखकर उन्हें पूर्ण विश्वास है कि आगामी कार्यक्रम बहुत ही भव्यता और दिव्यता के साथ संपन्न होगा। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में आर्य समाज के चिंतनशील लोग महर्षि दयानंद के समय से ही काम करते रहे हैं। परमपिता परमेश्वर की असीम अनुकंपा है कि वही परंपरा आज भी बनी हुई है।
कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए श्री तेजपाल सिंह आर्य ने उगता भारत को बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से आर्य समाज को मजबूत करने और इसकी विचारधारा को जन जन तक पहुंचाने के संबंध में भी लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए। लोगों का मानना रहा कि सभी आर्य जन महर्षि दयानंद के सिद्धांतों के साहित्य को जन जन तक पहुंचाने के लिए कार्य करेंगे। इसके अतिरिक्त छोटे-छोटे कार्यक्रम कर आर्य सिद्धांतों से लोगों को परिचित कराने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। श्री आर्य ने बताया कि आर्य समाज की ज्योति को प्रज्वलित किया रखने के लिए लोगों ने विशेष कोश बनाने और एक नया संगठन तैयार कर आर्य समाज के अतिरिक्त सभी हिंदूवादी संगठनों को भी साथ लेने की भावना पर बल दिया।
सभी लोगों ने देश की वर्तमान प्रस्तुतियों पर चिंतन करते हुए आर्य समाज की वर्तमान परिस्थितियों में विशेष भूमिका पर भी प्रकाश डाला। कई वक्ताओं ने इस बात को स्पष्ट किया कि जिस प्रकार महर्षि दयानंद जी महाराज ने सर्व समाज के लोगों के साथ मिलकर क्रांति की भूमिका तैयार की थी और स्वामी श्रद्धानंद जी ने हिंदू समाज के लिए घर वापसी के यज्ञ कराकर अनेक मुसलमानों को शुद्ध किया था, उसी प्रकार आर्य समाज को आज बदली हुई परिस्थितियों में सभी हिंदूवादी संगठनों के साथ मिलकर नई लड़ाई और नई क्रांति की भूमिका तैयार करनी है।
बबली कसाना ने कहा कि इस प्रकार के यज्ञ आर्य समाज की क्रांतिकारी विचारधारा को जन जन तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम हैं। इसलिए इस प्रकार के यज्ञ आयोजित करके आर्य समाज की ही नहीं बल्कि वैदिक संस्कृति की रक्षा करने की दिशा में हम महत्वपूर्ण कार्य कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने और वैदिक संस्कृति की रक्षा करने के लिए प्रत्येक आर्य जन को अर्थात हिंदू को अब घर से निकलकर क्षेत्र में उतरने की आवश्यकता है।

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