राजेश पायलट डिग्री कॉलेज सकलपुरा में पूरी भव्यता से आयोजित होगा चतुर्वेद पारायण यज्ञ

गाजियाबाद। यहां स्थित राजेश पायलट डिग्री कॉलेज सकलपुरा जनपद गाजियाबाद में आगामी 6 नवंबर से 13 नवंबर 2022 तक चतुर्वेद पारायण यज्ञ का आयोजन पूरी भव्यता से आयोजित किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम की जानकारी देते हुए उक्त संस्था के प्रबंधक श्री विजय पाल सिंह कसाना ने बताया कि इस संबंध में आगामी 10 जुलाई को राजेश पायलट डिग्री कॉलेज के प्रांगण में आयोजक कमेटी की एक विशेष बैठक आहूत की गई है। इस बैठक में चतुर्वेद पारायण यज्ञ को भव्यता और दिव्यता प्रदान करने की विषद योजना पर विचार किया जाएगा।
श्री कसाणा ने एक विशेष बातचीत में कहा कि इस समय भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को प्रस्तुत कर उसके अनुसार नई पीढ़ी को तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को वेदों की शैली में प्रस्तुत करने के लिए महर्षि दयानंद का हमें ऋणी होना चाहिए। उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश में राजधर्म संबंधी विषय को उठाकर यह स्पष्ट किया कि भारत की राजनीति राष्ट्र नीति के रूप में परिवर्तित होकर किस प्रकार अपना राजधर्म निर्वाह कर सकती है? यदि इस प्रकार की योजना पर काम किया जाए तो निश्चित रूप से भारत की राजनीति का हिंदूकरण करने और हिंदुओं का सैनिकीकरण करने की सावरकर की योजना को भी साकार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस समय भारत के विद्यालयों में पाठ्यक्रम का निर्धारण भी वैदिक सिद्धांतों के अनुरूप किया जाना समय की आवश्यकता है। कोई भी देश तभी मजबूती के साथ खड़ा हो सकता है जब वह अपने पूर्वजों की संस्कृति को बचाने के लिए कृत संकल्प हो। भारत ऋषि और कृषि का देश है । इसलिए भारत को ऋषि और कृषि कि इसी परंपरा को आगे बढ़ाना होगा। ऋषि का अर्थ अध्यात्म बल से है अर्थात ब्रह्म बल से है।
जबकि कृषि का अर्थ देश की आर्थिक और सैनिक समृद्धि से है। इस प्रकार क्षत्रबल और ब्रह्म बल के संयुक्त प्रयास से ही देश महान बन सकता है। इसलिए जब यज्ञ किए जाते हैं तो उस पर राष्ट्र चिंतन, धर्म चिंतन और ईश चिंतन प्रकट किया जाता है। जिससे कि उपस्थित जनसमुदाय ब्रह्म बल और क्षत्रबल के प्रति समर्पित होने का संकल्प ले सके।


कार्यक्रम की आयोजक समिति के वरिष्ठ नेता और समाजसेवी श्री तेजपाल सिंह आर्य ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि उनके क्षेत्र के 24 गांव स्वामी दयानंद जी महाराज के समय से ही यज्ञ के प्रति समर्पित रहे हैं। पूर्व की पीढ़ी ने अनेक यज्ञ आयोजित करा कर स्वामी जी महाराज की वेद पताका को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। क्षेत्र के लोगों ने इसी संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए चतुर्वेद पारायण यज्ञ का निर्णय लिया है तो उन्हें पूर्ण विश्वास है कि यह कार्यक्रम भी अपनी पूरी दिव्यता और भव्यता के साथ संपन्न होगा।
श्री आर्य ने बताया कि प्रोफेसर महावीर अग्रवाल जो कि गुरुकुल कांगड़ी के पूर्व कुलपति रहे हैं, इस चतुर्वेद पारायण यज्ञ के ब्रह्मा होंगे। उनका ब्रह्मा के दायित्व को संभालना हम सबके लिए गौरव की बात है।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र की यज्ञ समिति के लोग सभी लोगों को साथ लेकर राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक उत्थान के लिए कार्य करने के लिए कृत संकल्प हैं। संस्कृतिक उत्थान तभी संभव है जब लोग वेद की शैली में एक जैसा सोचे ,एक जैसा बोलें और एक जैसा कार्य करने के लिए एक दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लें। इस कार्य को यज्ञ के माध्यम से ही संपन्न किया जा सकता है। इस संबंध में और अधिक विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि यज्ञ के उपरांत संगतिकरण की जिस प्रक्रिया को अपनाया जाता है उस के माध्यम से संगठनीकरण किया जाता है अर्थात सब लोगों को परिवार से लेकर राष्ट्र तक एकता के सूत्र में बांधकर एक दिशा में जोर लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसलिए आज हमें जाति, वर्ग, संप्रदाय, क्षेत्र या भाषा आदि के लफड़े और पचड़े से बचकर केवल और केवल राष्ट्रवाद के लिए समर्पित होकर कार्य करना है। यह कार्य तभी संभव है जब हम वेद की संस्कृति को अपनाकर सनातन के प्रति समर्पित होकर सनातन को वैश्विक धर्म बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास करेंगे।
श्री आर्य ने कहा कि यज्ञ के माध्यम से सरकार और संयुक्त राष्ट्र संघ से यह मांग की जाएगी कि वेद के कृण्वंतो विश्वमार्यम् और वसुधैव कुटुंबकम के आदर्श को संयुक्त राष्ट्र संघ अपना आदर्श सूत्र वाक्य घोषित करे। क्योंकि यूएन का उद्देश्य भी वसुधैव कुटुंबकम और कृण्वंतो विश्वमार्यम् की परंपरा को आगे बढ़ाना ही है। यदि ऐसा किया जाएगा तो निश्चित रूप से भारत के वेदों की मौलिक चिंतनधारा को विश्व की स्वीकृति दिलाने में हम सफल होंगे। इसी प्रकार यदि आज हम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाते हैं तो इसी प्रकार महर्षि दयानंद जी के जन्मदिवस को राष्ट्रीय यज्ञ दिवस के रूप में मनाने की परंपरा भी सरकार को आरंभ करनी चाहिए। योग और यज्ञ भारत की संस्कृति के प्राण आधार हैं। इसलिए हमारा मानना है कि इन दोनों के प्रति समर्पित होना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है।

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