हम अपने जीवन को ज्ञान से प्रकाशित करें: आचार्या डा. सूर्याकुमारी चतुर्वेदा’

ओ३म्
-द्रोणस्थली आर्ष कन्या गुरुकुल महाविद्यालय, देहरादून का रजत जयन्ती समारोह-

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देहरादून में द्रोणस्थली आर्ष कन्या गुरुकुल महाविद्यालय, देहरादून के नाम से एक कन्या गुरुकुल संचालित होता है जिसकी स्थापना 25 वर्ष पूर्व श्री वेद प्रकाश गुप्ता जी ने स्वनिर्मित भूमि एवं भवनों में की थी। दिनांक 6, 7 तथा 8 जून, 2022 को इस गुरुकुल का वार्षिकोत्सव एवं रजत जयन्ती समारोह आयोजित किया गया है। आज उत्सव का प्रथम दिवस था। हमें भी इस उत्सव में भाग लेने का अवसर मिला। प्रातः 7.00 से 9.00 बजे तक यज्ञ हुआ। यज्ञ में आर्यजगत की विदुषी आचार्या डा. सुर्याकुमारी चतुर्वेदा एवं गुरुकुल की आचार्या डा. अन्नपूर्णा जी उपस्थित थी। यज्ञ में बड़ी संख्या में स्त्री-पुरुष, कन्या गुरुकुल की छात्रायें एवं हरयाणा के एक गुरुकुल के ब्रह्मचारी सम्मिलित हुए। यज्ञ की समाप्ति पर डा. अन्नपूर्णा जी ने यज्ञशाला में उपस्थित सभी यज्ञ प्रेमियों पर चल के छींटे देकर आशीर्वाद दिया। डा. अन्नपूर्णा जी ने आयोजन में उपस्थित सभी प्रमुख लोगों का नाम लेकर अन्य बन्धुओं को उनका परिचय दिया। इसके बाद प्रसिद्ध भजनोपदेशक श्री दिनेश पथिक जी का एक भजन हुआ जिसके बोल थे ‘कौन कहे तेरी महिमा कौन कहे तेरी माया, किसी ने हे परमेश्वर तेरा अन्त कभी न पाया।’ इस भजन को सभी यज्ञप्रेमी बन्धुओं ने पसन्द किया। भजन के बाद आचार्या डा. सूर्याकुमारी चतुर्वेदा जी का व्याख्यान हुआ। उन्होंने कहा कि हमें व्रत धारण करना है। हम आदित्य के गुणों को जानें। आदित्य का पहला गुण प्रकाश प्रदान करना है। सूर्य समता से प्रकाश को देता है। सूर्य स्वयं अपने प्रकाश से प्रकाशित होता है। सूर्य बुराईयों को दूर हटाता है। हमें प्रेरणा मिलती है कि हम अपने जीवन को ज्ञान से प्रकाशित करें। ज्ञान हमारे अन्दर समाहित होना चाहिये। हम अपने अन्दर अज्ञान आदि दुर्गुणों को न आने दें। जो इस सत्संग में आये हैं उनका बहुत भारी सौभाग्य है। आप हमेशा प्रभु के भक्त बने रहें। ईश्वर आप सबका कल्याण करें। आचार्या जी ने सबको बहुत बहुत आशीर्वाद दिया।

डा. आचार्या सूर्याकुमारी चतुर्वेदा जी के विचारों की प्रशंसा करते हुए आचार्या डा. अन्नपूर्णा जी ने कहा ज्ञान सबसे बड़ा धन है। ज्ञानी का धन सत्य का धन होता है। यश क्षत्रियों का धन है। राष्ट्र रक्षा की शक्ति क्षत्रियों में होती है। यह क्षत्रियों का धन होता है। राजा न्याय करता है। परम पिता परमेश्वर ब्रह्माण्ड का राजा है। सौभाग्य वैश्य को प्राप्त होता है। धर्म से धन की कमाई और धर्म से ही सुख की प्राप्ति होती है। कार्यक्रम में स्वामी विशुद्धानन्द जी भी पधारे थे। यह वह व्यक्ति हैं जो गुरुकुल की 25 वर्ष पूर्व भी 7 बच्चों को लेकर गुरुकुल की स्थापना के आयोजन में सम्मिलित हुए थे। डा. अन्नपूर्णा जी ने यज्ञ के सभी यजमानों को आशीर्वाद दिया। डा. अन्नपूर्णा जी ने संस्कृत और हिन्दी में आशीर्वचनों को बोला।

यज्ञ की समाप्ति के बाद आश्रम के मैदान में ध्वजारोहण का कार्य सम्पन्न किया गया। ध्वजारोहण आचार्या डा. सूर्याकुमारी चतुर्वेदा जी, आचार्या डा. अन्नपूर्णा जी सहित श्री प्रेम प्रकाश शर्मा, मंत्री वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून, श्री नरेन्द्र साहनी जी, आर्यसमाज मसूरी तथा स्वामी विशुद्धानन्द जी ने मिल कर किया। ध्वजारोहण कर राष्ट्रीय प्रार्थना एवं ध्वज गीत को मिलकर गाया गया। इसके बाद गुरुकुल के सभागार में वेदसम्मेलन का आयोजन किया जहां स्वामी प्रणवानन्द सरस्वती, डा. रघुवीर वेदालंकार, डा. सूर्याकुमारी चतुर्वेदा, डा. अन्नपूर्णा जी, श्री कपिल शास्त्री तथा श्री इन्द्रजित् देव, यमुनानगर के व्याख्यान हुए। इस अवसर पर श्री रूवेल सिंह आर्य, श्री काशीराम, मध्यप्रदेश, श्री विनोद जी तथा श्री दिनेश पथिक जी के भजन हुए। वेद सम्मेलन में विद्वानों के सम्बोधनों को हम एक पृथक लेख के द्वारा प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम आगामी 8 जून तक चलेगा। ओ३म् शम्।

-मनमोहन कुमार आर्य

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