Categories
आर्थिकी/व्यापार

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और देश की महिलाएं

 डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना केवल और केवल महिलाओं के लिए ही नहीं थी अपितु युवाओं और हुनरमंद या फिर स्वरोजगार को बढ़ावा देने की योजना रही है। महिला सशक्तिकरण का माध्यम तो इसलिए सिद्ध हो रही है क्योंकि इस योजना का महिलाओं ने अधिक लाभ उठाया है।

कहने को भले ही कुछ भी कहा जाए पर बदलाव की बयार तो अब साफ दिखाई देने लगी है। महिलाएं अब घर की चार दीवारी से बाहर आई हैं और हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने में सफल रही हैं। कल तक यह माना जाता था कि राजनीति में आरक्षण के कारण महिलाएं आगे तो आई हैं पर सरपंच और प्रधान के दायरे से बाहर नहीं निकल पाई हैं पर अब यह सब गुजरे जमाने की बात हो गई है। अब महिलाएं जितनी सक्रियता से राजनीति में पैठ बनाने में सफल रही हैं उतनी ही सक्रियता से उद्यमी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के ताजातरीन आंकड़े इसके गवाह हैं। दरअसल सात साल पहले देश में जब प्रधानमंत्री मुद्रा योजना अस्तित्व में आई थी तब यह नहीं सोचा गया होगा कि यह योजना महिला सशक्तिकरण का भी प्रमुख माध्यम बन जाएगी। हालांकि यह योजना केवल और केवल महिलाओं के लिए ही नहीं थी अपितु युवाओं और हुनरमंद या फिर स्वरोजगार को बढ़ावा देने की योजना रही है। महिला सशक्तिकरण का माध्यम तो इसलिए सिद्ध हो रही है क्योंकि इस योजना का महिलाओं ने अधिक लाभ उठाया है।

दरअसल अप्रैल, 2015 में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना शुरु की गई थी। योजना का प्रमुख उद्देश्य युवाओं या हुनरमंद लोगों को अपना काम धंधा शुरू करने के लिए आसानी से बैंकों से ऋण उपलब्ध कराना रहा है। इस योजना को शिशु, किशोर और तरुण तीन वर्गों में विभाजित किया गया और यह विभाजन भी ऋण राशि के अनुसार किया गया। 50 हजार रु. तक के ऋण को शिशु श्रेणी में, 5 लाख तक के ऋण को किशोर श्रेणी में और 10 लाख रु. तक के ऋण को तरुण श्रेणी में रखा गया है। हालांकि पिछले सात सालों में शिशु श्रेणी यानी की 50 हजार तक के ऋण अधिक वितरित हुए हैं। पिछले सात सालों में 34 करोड़ 42 लाख ऋण खातों में 18.60 लाख करोड़ रुपए के ऋण उपलब्ध कराए गए हैं। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार इनमें से 68 फीसदी लोन खातें महिलाओं के हैं। यानी प्रधानमंत्री मुद्रा योजना को महिला उद्यमियों ने हाथोंहाथ लिया है। इससे दो बातें साफ हो जाती हैं कि महिलाओं में कुछ करने का जज्बा बढ़ा है। वह आर्थिक गतिविधियों में पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर आगे आ रही हैं। विकास की मुख्य धारा से जुड़ना शुभ संकेत माना जाना चाहिए। दरअसल महिलाओं ने एमएसएमई उद्यमों में भी रुचि दिखाई है। इसको इसी से समझा जा सकता है कि देश में 2021-22 में 8 लाख 59 हजार से अधिक एमएसएमई उद्यमों का संचालन महिलाओं द्वारा किया जाने लगा है। यह अपने आप में बड़ी संख्या होने के साथ ही आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की बढ़ती ताकत का जीता जागता उदाहरण है।
वैसे तो महिला सशक्तिकरण की देश में कई योजनाएं चलती रही हैं पर मुद्रा योजना इस मायने में महत्वपूर्ण हो जाती है कि इस योजना में आसानी से ऋण सुविधा उपलब्ध हो जाता है। ऋण आवेदन के खासतौर से शिशु श्रेणी में तो सात से दस दिन में जहां ऋण उपलब्ध हो जाता है वहीं ऋण के लिए किसी तरह की सिक्योरिटी की भी आवश्यकता नहीं होती। यही कारण है कि यह योजना नए-पुराने सभी उद्यमियों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है। सेवा क्षेत्र से लेकर उत्पादन क्षेत्र तक सभी को इसमें शामिल किया गया है। खासतौर से इस योजना का ध्येय युवाओं व हुनरमंद चाहे पुरुष हो या महिलाएं, रोजगार या पैसे की तलाश में इधर उधर घूमने के स्थान पर बैंकों से आसानी से ऋण उपलब्ध कराना है ताकि देश में स्वरोजगार के अवसर विकसित हों और आज की पीढ़ी में उद्यमी बनने की ललक पैदा की जा सके। युवा रोजगार की तलाश में घूमने के स्थान पर मुद्रा योजना के सहयोग से स्वयं उद्यमी बन सकेगा और रोजगार के लिए हाथ फैलाने के स्थान पर रोजगार दाता बनेगा। यही कारण है कि यह योजना युवाओं व महिलाओं की छोटा-मोटा काम शुरू करने के लिए आने वाली रुपए-पैसे की दिक्कत को दूर करने में सहायक है।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के प्रति महिलाओं की बढ़ती रुचि और लाभदायकता के निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। कोरोना जैसी महामारी के चलते जिस तरह से आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं और जिस तरह से रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं उसमें अब पोस्ट कोविड हालातों में यह योजना और अधिक कारगर सिद्ध हो सकेगी। योजना के सात साल पूरे होने पर जो लाभान्वितों के आंकड़े जारी किए गए हैं वह कोविड जैसी परिस्थितियों के बावजूद उत्साहवर्द्धक है। ऐसे में इस योजना के और अधिक खासतौर से गांव-ढाणी तक प्रचार प्रसार की आवश्यकता हो जाती है। क्योंकि ग्रामीण उद्योगों को भी इस योजना के माध्यम से आसानी से बढ़ावा दिया जा सकता है और ग्राम स्तर पर ही रोजगार के अवसर विकसित होने से शहरों की और पलायन भी रोका जा सकता है। कोविड की यादें बार-बार यही कहती हैं कि रोजगार स्थानीय स्तर पर ही विकसित हो तो वह अधिक लाभदायी होगा क्योंकि कोविड के लॉकडाउन का दंश सारी दुनिया भुगत चुकी है और इसके साइड इफेक्ट आज भी सामने हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से महिलाओं का जुड़ाव दो संदेश साफ दे रहा है कि महिलाएं अब उद्यमी बनने या यों कहें कि स्वयं के रोजगार के प्रति संवेदनशील हुई हैं और दूसरा यह कि मुद्रा योजना ने महिला सशक्तिकरण में सकारात्मक भूमिका तय की है।

साभार प्रस्तुति

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betbox giriş
betbox giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
sekabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
romabet giriş
romabet giriş
İmajbet güncel
Safirbet resmi adres
Safirbet giriş
betnano giriş
sekabet giriş
sekabet giriş
nitrobahis giriş
nitrobahis giriş
winxbet giriş
yakabet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
batumslot giriş
batumslot
batumslot giriş