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नया करने की सोच बदलेगी जिंदगी

27jued-8रेनू सैनी

कुछ नया करके चीजों को बेहतर बनाने की प्रक्रिया नवाचार है। आज की युवा पीढ़ी न सिर्फ नवाचार में विश्वास रखती है, अपितु इसी तरीके से काम भी करती है और सफल भी होती है। नवाचार लीक की सोच से हटकर होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि, ‘मनुष्य द्वारा अपने मस्तिष्क का केवल दस प्रतिशत अंश ही प्रयोग किया जाता है। मन के इस विशाल भंडार गृह का यदि समुचित व नए तरीके से सदुपयोग किया जाए तो नए-नए समाधान हाथों-हाथ प्रस्तुत हो जाते हैं।’ नवाचार की भावना प्रत्येक व्यक्ति में रहती है, यदि उसे उभारकर सक्रिय बना दिया जाए तो जिंदगी में न सिर्फ प्रसन्नता एवं कामयाबी की प्रतिशतता बढ़ सकती है, बल्कि व्यक्ति की जिंदगी भी सफल हो जाती है।

अब्राहम लिंकन बचपन में बहुत निर्धन थे। उनके घर में दो वक्त का खाना भी मुश्किल से बन पाता था। लेकिन विपरीत परिस्थितियों से हार मान हिम्मत खोने वालों में वह नहीं थे। वह कुछ न कुछ नवीन करते रहते थे। उन्हें विश्वास था कि वह अपने संकल्प, बुद्धि, आत्मबल और कुछ न कुछ नया करते रहने के कारण सब कुछ पा सकते हैं। उन्हें पढऩे का शौक था पर वह पुस्तकें खरीदने में असमर्थ थे। किंतु उन्हें जब भी यह पता चलता कि किसी व्यक्ति के पास पुस्तक है तो वह तुरंत उसके पास पहुंच जाते थे और उसका काम करने के बदले पुस्तक पढऩे का अधिकार प्राप्त कर लेते थे। पुस्तकों से नई बातें व नए विचार पढक़र उनमें जोश और आत्मविश्वास का संचार हो जाता था। एक बार उन्हें पता चला कि नदी के दूसरी ओर ओगमोन नामक गांव में एक अवकाशप्राप्त न्यायाधीश रहते हैं, जिनके पास कानून की पुस्तकों का अच्छा संग्रह है। इसलिए लिंकन कड़ाके की सर्दी के दिनों में उस बर्फीली नदी में नाव में बैठ गए। नाव वह स्वयं चला रहे थे। उन्होंने आधी नदी तो किसी तरह पार कर ली किंतु बर्फ का ढेर इतना अधिक था कि नाव एक बर्फ के ढेर से टकराकर चकनाचूर हो गई। विकट घड़ी में लिंकन ने स्वयं से कहा, ‘यह कठिन अनुभव मुझे जीवन में ऐसी नई बातें व ज्ञान प्रदान करेगा जो मेरे जीवन को बदल देगा।’ उन्होंने किसी तरह खुद को संभाला और अनेक मुश्किलों का सामना करते हुए नदी पार कर ली। वह ढूंढ़ते-ढंूढ़ते रिटायर्ड जज के घर जा पहुंचे। जज उन्हें घर में मिल गए। िलंकन ने उनसे अपनी पुस्तकें पढऩे के लिए दिखाने को कहा। उन दिनों जज का नौकर छुट्टी पर गया हुआ था, इसलिए उन्हें अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने लिंकन को पुस्तकें इस शर्त पर दिखाना मंजूर कर लिया कि वह उनके नौकर के आने तक घर का काम संभालेगा। लिंकन ने जज की यह बात स्वीकार कर ली। उन्होंने सोचा कि जज के घर में रहकर कुछ न कुछ नया सीखने को मिलेगा। इसके बाद वह दिनभर जज का काम करते। जंगल से लकडिय़ां काट कर लाते और सारा काम करते। रात को थक-हार कर वह आराम करने के बजाय पुस्तकें लेकर बैठ जाते। जज बालक की मेहनत, लगन व दृढ़ संकल्प से बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने लिंकन को काफी सारी पुस्तकें उपहार में दे दीं। इस प्रकार लिंकन अपनी इसी मेहनत, संकल्प, लगन और हर परिस्थिति में कुछ नया सीखने की चाहत के बल पर एक दिन अमेरिका के राष्ट्रपति पद पर विराजमान हुए।

प्रसिद्ध वैज्ञानिक माइकल फैराडे तो कहते थे कि, ‘उद्यमियों की सफलता के लिए पांच अनिवार्य गुण हैं—एकाग्रता, संगठन, विवेकशीलता, नवाचार और संवाद।’ नवाचार के कारण ही थॉमस अल्वा एडीसन, वॉल्ट डिजनी, चार्ली चैपलिन, रे क्रॅाक आदि ने ऐसी सफलता अपने जीवन में प्राप्त की जिसने उन्हें दुनिया के सामने अमर कर दिया। थॉमस अल्वा एडीसन ने बिजली के आविष्कार के लिए लगभग सात सौ नए-नए तरीके ढूंढ़े। वॉल्ट डिजनी ने जगह-जगह ठोकरें खाकर भी नवाचार की प्रक्रिया को जीवित रखा और चूहे के माध्यम से कार्टून जगत में हलचल मचा दी। चार्ली चैपलिन में जीवन के अंत तक नई चीजें सीखने की उमंग थी। वे कहते थे, ‘मैं स्वयं दर्शकों के बीच बैठकर देखता हूं कि उन्हें कहां मेरी गलती लगी? मैं लगातार और हर बार कुछ नया सीखता हूं।’ उनकी नवाचार की आदत ने उन्हें आज तक लोगों के बीच जीवित रखा हुआ है। जॉन सी मैक्सवेल ने अपनी अत्यंत प्रसिद्ध पुस्तक ‘द 21 इनडिस्पेंसबल क्वालिटीज़ ऑफ ए लीडर’ में लिखा है कि ‘यदि आप अपने जीवन में उस जगह पर नहीं हैं, जहां आप इस समय तक पहुंचना चाहते थे, तो शायद आप में नई बातें सीखने की योग्यता नहीं है।’ रे क्राक हर बार कुछ नया सीखते रहे।

उन्हें असफलता मिलती रही पर उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार जिंदगी के अनुभवों व नए कार्यों से सीखते हुए 53 वर्ष की उम्र में मैकडोनल्ड्स फ्रैंचाइजी की स्थापना की। आज पूरे विश्व में मैकडोनल्ड्स फ्रैंचाइजी अत्यंत प्रसिद्ध है। अहंकार व्यक्ति को गिराता है, सीखने की इच्छा व्यक्ति को कामयाबी की सीिढय़ों पर चढ़ाती है। लगातार सीखने से व्यक्ति चुनौतियों का दृढ़ता से मुकाबला करता है। प्रतिभा, धन और अन्य विशेषताएं सभी को समान रूप से नहीं मिलतीं, लेकिन लगातार सीखने की लगन हर व्यक्ति को सफल, प्रेरक और कामयाब बना सकती है।

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