Categories
महत्वपूर्ण लेख

इस प्रदूषण को रोकें वर्ना विश्‍व तबाह हो जायेगा

pollution

निर्मल रानी

पूरा विश्व इस समय संपूर्ण पृथ्वी के बढ़ते हुए तापमान अथवा ग्लोबल वार्मिंग के भयंकर खतरों से जूझ रहा है। इनके दुष्परिणाम भी अभी से सामने आने लगे हैं। कहीं ग्लेश्यिर पिघल रहे हैं तो कहीं समुद्र तल का स्तर बदल रहा है। पूरी दुनिया में बड़े पैमाने पर जलवायु परिवर्तन होते हुए भी देखा जा रहा है। विश्व पंचायत हालांकि इन समस्याओं से जूझने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रही है तथा उन उपायों को विभिन्न माध्यमों द्वारा जनता तक पहुंचाने की कोशिशें भी की जा रही हैं। लगभग पिछले एक दशक से पूरी दुनिया इस समस्या को लेकर काफी चिंतित है तथा ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए सक्रियता से तमाम कदम उठा रही है। इस प्रकार के तमाम उपायों के बावजूद धरती का तापमान निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर विश्वस्तरीय तमाम उपायों के बावजूद भी बढ़ता तापमान नियंत्रित क्यों नहीं हो पा रहा है। यदि हम इसकी पड़ताल करें हमें यह पता चलेगा कि भले ही सरकारों द्वारा इस संबंध में तरह-तरह के उपाय क्यों न किए जाते हों परंतु ज़मीनी स्तर पर इस विषय पर अभी भी आम लोगों का जागरूक न हो पाना इस समस्या का सबसे बड़ा कारण है।

पिछले दिनों गुग्गल द्वारा सेटेलाईट के माध्यम से पंजाब राज्य के ऊपरी क्षेत्र की फोटो ली गई। बताया गया कि इस फोटो में ऐसा दिखाई दे रहा था गोया पूरा का पूरा पंजाब राज्य धुंए से ढका हुआ है। पता चला कि फसल की कटाई के बाद आमतौर पर किसान अपने खेतों में फसल का बचा हुआ कचरा, घास-फूस तथा ठूंठ आदि खेतों में ही जला दिया करते हैं। हालांकि सरकार ने किसानों द्वारा ऐसा किए जाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। फिर भी अपनी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए न सिर्फ पंजाब बल्कि आमतौर पर लगभग पूरे भारत का किसान फसल की कटाई के बाद खेतों में बचे हुए कचरे, खर-पतवार तथा घास-फूस आदि अपने खेतों में ही जला डालता है। भारत कृषि प्रधान देश है तथा यहां आमतौर पर लोगों का व्यवसाय खेती ही है। इसलिए फ़सल की कटाई के बाद खेतों में आग लगाना तथा इसके परिणामस्वरूप आसमान पर धुंए के बादल दिखाई देना भी स्वाभाविक है। ज़ाहिर है तमाम कानूनों व प्रतिबंधों के बावजूद किसानों को इस प्रकार खेतों में आग लगाए जाने से रोका नहीं जा पा रहा है। और शायद ऐसा संभव भी नहीं है। फिर आखिर इस समस्या का हल है क्या? न कानून, न प्रतिबंध, न सख्ती, न ज़्यादती बल्कि केवल जागरूकता तथा धरती पर बढ़ते तापमान या ग्लोबल वार्मिंग से भविष्य में होने वाले खतरों तथा हमारी अगली नस्ल पर पडऩे वाले इसके दुष्परिणामों से देश के किसानों को ज़मीनी स्तर पर न केवल रेडिया या टीवी के माध्यम से अथवा पोस्टर या विज्ञापन के द्वारा बल्कि गांव-गांव, घर-घर, पंचायतों व चौपालों में जाकर अवगत कराना।

वैसे तो सरकारी स्तर पर पूरे देश में प्रदूषण नियंत्रित करने के तरह-तरह के उपाय किए जा रहे हैं। परंतु देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली में इस विषय पर कुछ ज़्यादा ही चिंता दिखाई दे रही है। ज़ाहिर है दुनिया के तमाम देशों के दूतावास होने के साथ देश की सरकार के जि़म्मेदार लोग, आला अधिकारी दिल्ली में ही बसते हैं। इसलिए भी प्रदूषण को लेकर दिल्ली में अतिरिक्त विशेष उपायों का किया जाना भी लाजि़मी है। उदाहरण के तौर पर दिल्ली में पंद्रह वर्ष पुराने वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा हुआ है। पूरी दिल्ली में फ्लाईओवर का जाल भी इसी मकसद से बिछाया गया है ताकि यातायात नियंत्रण के साथ-साथ प्रदूषण को भी नियंत्रित किया जा सके। दिल्ली में मैट्रो ट्रेन की व्यवस्था भी इसी पहलू के मद्देनज़र की गई है। राज्य में हरियाली को बढ़ाने के लिए भी तमाम उपाय किए जा रहे हैं। इनके परिणाम भी देखने को मिले हैं। दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में पहले से काफी कमी आई है। परंतु समय बीतने के साथ-साथ प्रदूषण का स्तर धीरे-धीरे पुन: बढऩे लगा है। कहा जा सकता है कि दिल्ली में जनसंख्या के बढ़ते दबाव के चलते ऐसा हो रहा हो। अब दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण करने हेतु एक नए व सख्त कदम की घोषणा की है जिसके अंतर्गत सडक़ों पर अथवा सार्वजनिक रूप से कूड़ा-करकट जलाए जाने पर कूड़ा जलाने वाले व्यक्ति को पांच वर्ष की कठोर सज़ा हो सकती है।
आखिर दिल्ली सरकार द्वारा इतने सख्त कानून की ज़रूरत क्यों महसूस की गई? निश्चित रूप से केवल इसलिए क्योंकि आम लोग विशेषकर गरीब, अनपढ़ अथवा मध्यवर्गीय लोग जिन्हें कि अपनी रोज़मर्रा कीज़िन्दगी से तथा अपनी ज़रूरतों को पूरा करने से फुर्सत ही नहीं वे भला प्रदूषण नियंत्रण अथवा ग्लोबल वार्मिंग के खतरों के बारे में क्या जानें और समझें। लिहाज़ा सरकार ने उनके मध्य जागरूकता अभियान चलाने के अतिरिक्त उनमें भय फैलाने की तरकीब सोची है। संभव है ऐसे कानूनों से भयवश जनता को कुछ हद तक सार्वजनिक रूप से कूड़ा-करकट जलाए जाने से रोका जा सके परंतु यहां भी जनजागरूकता ही एक ऐसा सफल माध्यम है जिसके ज़रिए ऐसा करने वाले आम लोगों को स्थायी रूप से रोका जा सकता है। पिछले दिनों दिल्ली से ही यह रिपोर्ट आई थी कि राज्य में रासायनिक धुंध लगभग पूरी दिल्ली में फैली हुई है। इससे आम लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था। पूरी दिल्ली ज़हरीले वातावरण की चपेट में थी। दिल्ली से प्राप्त होने वाली यह कोई पहली खबर नहीं थी। इसके पूर्व भी दिल्ली सहित कई महानगरों से ऐसे समाचार आते रहते हैं।

यदि आप प्रात:काल सैर के लिए निकलें तो लगभग पूरे देश में आमतौर पर यह नज़ारा देखने को मिलेगा कि गरीब, भिखारी, लावारिस व निठल्ले लोग स्वयं को सर्दी से बचाने के लिए सबसे आसान उपाय यही करते हैं कि वे अपने आसपास पड़े कबाड़ जिसमें कि कपड़े, पॉलिथिन,प्लास्टिक, चमड़ा,रबड़, टायर-टयूब, घास-फूस, नायलोन की रस्सियों जैसी चीज़ें जलाकर अपनी ठंड भगाने का प्रयास करते हैं। इससे भले ही उन लोगों को कुछ समय के लिए ठंड से राहत क्यों न मिलती हो परंतु निश्चित रूप से प्रात:काल सैर-सपाटा करने वालों के लिए ही नहीं बल्कि सुबह-सुबह अपने काम पर जाने वाले लोगों के लिए, स्कूल व कॉलेज जाने वाले बच्चों के लिए इस प्रकार से पैदा होने वाले भंयकर प्रदूषण का सामना करना अत्यंत कष्टदायक होता है। परंतु यदि आप इनसे टोकाटाकी करने की कोशिश करें या इन्हें ज़हरीला धुंआ फैलाने से रोकने का प्रयास करें तो यह लोग लडऩे को तैयार हो जाते हैं साथ-साथ गर्म कपड़े पहनने वाले साधन संपन्न लोगों को कोसने लगते हैं। वे अपनी गरीबी व लाचारी की दुहाई देने लगते हैं। ऐसे लोगों को कोई भी कानून कभी भी नियंत्रित नहीं कर सकता। यहां भी केवल ज़मीनी स्तर पर फैलाई जाने वाली जागरूकता तथा ऐसे तबके को सर्दी से बचाने का विकल्प मुहैया कराना ही इस प्रकार के ज़हरीले प्रदूषण को नियंत्रित रखने का उपाय है।
पूरे विश्व में एलपीजी गैस का उपयोग इसी उद्देश्य के साथ शुरु किया गया था ताकि घरेलू रसोई ईंधन के रूप में लकड़ी का प्रयोग बंद हो। जिससे हरे-भरे पेड़ों की कटाई रुक सके व लकड़ी जलने से उत्पन्न होने वाले विषैले धुंए को रोका जा सके। नि:संदेह एलपीजी के रूप में लकड़ी का विकल्प अत्यंत प्रभावी तथा कारगर है। परंतु वर्तमान समय में जिस प्रकार एलपीजी के दाम बेतहाशा बढ़ते जा रहे हैं, आम लोगों को उनकी ज़रूरत हेतु मिलने वाले गैस सिलेंडर में कटौती की जा रही है उसे देखकर ऐसा लगने लगा है कि कहीं एक बार फिर पहले ही की तरह सुबह-शाम दोनों समय अंगीठियां जलाए जाने या लकड़ी जलाए जाने का सिलसिला पुन: न शुरु हो जाए। गैस के विषय को लेकर भी खासतौर पर भारत सरकार बड़े पसोपेश में है। आर्थिक मोर्चे पर सरकार सिलेंडर पर सबसिडि देने में आनाकानी कर रही है तो दूसरी ओर प्रदूषण नियंत्रण के लिए तथा पर्यावरण की रक्षा के लिए लकड़ी अथवा धुंआ पैदा करने वाले दूसरे विकल्प प्रयोग में लाए जाने को भी उचित नहीं समझती। ऐसे में आम लोग भी संशय में हैं कि आखिर वे करें तो क्या करें। ईंधन के रूप में मंहगी गैस का प्रयोग करते हुए प्रदूषण नियंत्रा में अपना योगदान दें या फिर प्रदूषण नियंत्रण की परवाह किए बिना ईंधन के दूसरे विकल्पों पर ध्यान दें। यहां भी सरकार की बहुत अहम भूमिका की ज़रूरत है। कुल मिलाकर यदि हम देखेंगे तो देश के समृद्ध किसानों से लेकर गरीब ,भिखारी तक इस बात से पूरी तरह बेखबर हैं कि वे लोग धुंए के रूप में प्रदूषण फैलाकर न केवल अपना बल्कि अपनी आने वाली नस्लों का भी बहुत बड़ा नुकसान कर रहे हैं। और इन्हें किसी कानून, सख्ती या सज़ा के भय से नहीं बल्कि केवल उच्चस्तरीय जनजागरुकता अभियानों के माध्यम से ही रोका जा सकता है।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betnano
Hititbet Giriş
Hititbet App
hititbet giriş
hititbet
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betorder giriş
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
hititbet
hititbet
betgaranti giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
betgaranti giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
xslot giriş
xslot giriş
sahabet
sahabet
hititbet
meritbet
bets10
meritbet
bets10
betnano
bets10
bets10
betnano
betnano
atlasbet
atlasbet
betnano