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राज्यपाल कुरैशी गलत नहीं

उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी का मामला आजकल सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन है। केन्द्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी ने अदालत के सामने जो तर्क पेश किए हैं वे मुझे खोखले मालूम पड़ते हैं। यह तो उनकी ईमानदारी का सबूत है कि उन्होंने यह मान लिया है कि उन्होंने राज्यपाल कुरैशी को इस्तीफा देने के लिए कहा था। वे चाहते तो इस तथ्य का छुपा सकते थे। लेकिन इसे छुपाना आजकल के जमाने में जरा कठिन था क्योंकि टेलीफोन करने और उस पर होने वाली बातचीत के भी प्रमाण जुटाए जा सकते हैं। इसीलिए अच्छा हुआ कि गोस्वामी ने काफी कुछ सच बोल दिया।

गोस्वामी ने यह भी कहा है कि उन्होंने राज्यपाल को धमकी नहीं दी थी। याने उनको यह नहीं कहा था कि अगर आप खुद इस्तीफा नहीं देंगे तो आपको बर्खास्त कर दिया जाएगा। मान ले कि यह सच है, तो भी मेरा प्रश्न यह है कि हमारी संवैधानिक व्यवस्था में भारत का गृह सचिव बड़ा है या किसी राज्य का राज्यपाल? जिसे हम किसी राज्य का प्रमुख मानते हैं, क्या ऐसे व्यक्ति को एक नौकरशाह इस तरह का निर्देश दे सकता है या क्या उसे ऐसा निर्देश देना चाहिए? क्या यह संवैधानिक मर्यादा का उल्लघंन नहीं है?

राज्यपाल की नियुक्ति कम से कम पांच साल के लिए होती है। उसके पहले उससे इस्तीफा मांगने का नैतिक अधिकार किसी को भी नहीं है। राष्ट्रपति को भी नहीं है, प्रधानमंत्री को भी नहीं है और गृह मंत्री को भी नहीं है। ऐसा फैसला हमारा सर्वोच्च न्यायालय पहले ही दो-टूक शब्दों में कर चुका है। तो फिर गृहसचिव गोस्वामी ने ऐसा दुस्साहस कैसे किया?

यदि संबंधित राज्यपाल ने कोई गैरकानूनी काम किया हो, कोई अनैतिक काम किया हो, कोई घोर आपत्तिजनक बात कही हो, तो उनसे इस्तीफा मांगने की बात को जायज ठहराया जा सकता है। लेकिन गोस्वामी ने जो बहाना बनाया है, वह बिल्कुल लचर है। गोस्वामी ने अदालत से कहा है कि राज्यपाल कुरैशी ने बलात्कार के बारे में जो बात कही है वह घोर आपत्तिजनक है। हम गोस्वामी से पूछें कि वह यह बताएं कि कुरैशी के कथन में आपत्तिजनक क्या है? कुरैशी ने यही कहा है न कि ‘बलात्कार को कोई भी फौज या पुलिस पूरी तरह से रोक नहीं सकती। ऐसे भयंकर अपराधों को ईश्वरीय हस्तक्षेप ही रोक सकता है’। मैं पूछता हूं कि इसमें कुरैशी ने गलत क्या कहा है? यदि कुरैशी गलत हों तो गृहसचिव और रक्षा सचिव के पास 30-40 लाख जवान, फौज और पुलिस में हैं फिर भी देश में रोज ही सैकड़ों बलात्कार की घटनाएं क्यों होती है? अगर होती हैं तो कुरैशी सही हैं।

ईश्वरीय हस्तक्षेप का अर्थ क्या है? यही है कि लोगों का नैतिक आचरण सुधरना चाहिए। ईश्वर में विश्वास बढ़ना चाहिए और सबको ईश्वर से डरना चाहिए। ऐसा कहकर क्या अजीज कुरैशी ने राज्यपाल पद की गरिमा घटाई है। बिल्कुल नहीं।

अजीज कुरैशी असाधारण राज्यपाल हैं। उनके जैसे सदाचारी और उत्तम विवेक के नेता इस देश में कम है। जिस तरह से उन्होंने गौ-वध का विरोध किया और गौ-वध करने वालों को अभारतीय कहा, क्या आज तक कभी किसी मुस्लिम नेता ने ऐसा कहा? क्या गोस्वामी भूल गए कि यह अजीज कुरैशी वही है जिन्होंने सारे भारत के कुरैशियों को इकट्ठा करके उनसे संकल्प करवाया कि हम गौ-वध नहीं करेंगे। क्या उन्हें पता नहीं है कि उत्तराखंड में पहली बार इसी राज्यपाल ने संस्कृत का महासम्मेलन करवाया और राज्यपाल की शपथ लेने के बाद कुरैशी सबसे पहले बद्रीनाथ की तीर्थ यात्रा करने गए थे। ऐसे राज्यपाल को धमकी देना संविधान का अपमान तो है ही हमारे लोकतंत्र को भी कुंठित करना है। मुझे विश्वास है कि मोदी सरकार उत्तराखंड के इस राज्यपाल के साथ सद्व्यवहार करके अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाएगी।

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