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वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा

अमर शहीद रामप्रसाद ‘बिस्मिल’

 

अरूजे कामयाबी पर कभी तो हिन्दुस्तां होगा ।

रिहा सैयाद के हाथों से अपना आशियां होगा ।।

 

चखायेगे मजा बरबादिये गुलशन का गुलची को ।

बहार आयेगी उस दिन जब कि अपना बागवां होगा ।।

 

वतन की आबरू का पास देखें कौन करता है ।

सुना है आज मकतल में हमारा इम्तहां होगा ।।

 

जुदा मत हो मेरे पहलू से ऐ दर्दें वतन हरगिज ।

न जाने बाद मुर्दन मैं कहां.. और तू कहां होगा ।।

 

यह आये दिन को छेड़ अच्छी नहीं ऐ खंजरे कातिल !

बता कब फैसला उनके हमारे दरमियां होगा ।।

 

शहीदों की चिताओं पर जुड़ेगें हर बरस मेले ।

वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा ।।

 

इलाही वह भी दिन होगा जब अपना राज्य देखेंगे ।

जब अपनी ही जमीं होगी और अपना आसमां होगा ।।

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