हम सब कमा रहे हैं दूसरों के लिए

वो जमाना चला गया जब आदमी अपने और अपने कुटुम्ब के लिए कमाता था और संतोषी जीवन व्यतीत करते हुए जिन्दगी के सारे आनंद प्राप्त करता था, समुदाय को भी आनंदित करता था, सामाजिक सरोकारों और क्षेत्रीय हलचलों में पूरी और पक्की भागीदारी निभाता हुआ अपने जीवन को धन्य करता था।

आज पहले के मुकाबले कमाई कई गुना बढ़ गई है। कमायी के अवसर भी बढ़े हैं और स्रोत भी। कमाई के स्वरूप भी बदले हैं और जायज-नाजायज रास्ते भी। अब हर तरफ मानवीयता और इंसानी संवेदनशीलता की बजाय कमाई और अंधाधुंध  कमाई का भूत चढ़ा हुआ है।

काली कमाई की कुरूप भूतनियां आदमी को इतना घेरे हुए हैं कि आदमी को खुद को हर बार लगता है कि जैसे वह पैसे कमाने वाला भूत है या पैसों के पीछे भागने वाली भूतनियों में से एक। इंसान की अब दो श्रेणियां हमारे सामने हैं।  एक संतोषी और पुरुषार्थी हैं जो सात्विक कमाई पर ही आजीविका का निर्वाह करते हुए मस्त रहते हैं। दूसरी प्रकार के लोगों की संख्या कुछ ज्यादा है। ऎसे लोगों को पुरुषार्थ और सात्ति्वकता से कोई मतलब नहीं है, इन लोगों की भूख बहुत बड़ी है जो सुरसा के मुँह की तरह निरन्तर बढ़ती ही जाती है, कभी थमने का नाम भी नहीं लेती।

ये लोग कमाई के पीछे दीवाने हैं और इस कमाई के फेर में अपने दूसरे सारे दायित्वों को सायास भुला देते हैं। मानवीय मूल्यों और आदर्शों, सामाजिक कर्तव्यों और संवेदनाओं तक को भुला कर जीवन भर के लिए इनका एकमेव एजेण्डा यही होता है कि कमाई ही कमाई करते रहें, अपने घर भरते रहें, बैंक बेलेंस भरते रहें और जहाँ मौका मिले, वहाँ तेजी से लपक कर सामथ्र्य से भी अधिक लूट लें।

हममें से अधिकांश लोग इसी मनोवृत्ति के होते जा रहे हैं। चारों तरफ हमारे जैसे लोगों का बोलबाला है। हर कोई मौका बनाता है, तलाशता है, अवसर मिलने पर जंगली कुत्तों और गिद्धों की तरह लपक पड़ता है और साम, दाम, दण्ड, भेद से लेकर तमाम प्रकार के जबरिया प्रयासों को भी अपना कर छीन लेता है।

इसमें न कोई लाज-शरम बची है, न और कुछ। रुपए-पैसों के लिए हम कुछ भी कर सकते हैं, लक्ष्मी पाने के लिए सब कुछ जायज हो चला है यहाँ। इस मामले में न वंशानुगत संस्कार आड़े आते हैं, न धार्मिक और सामाजिक मर्यादाएँ।

संसार भर में जहां जो कुछ है, वह अपना ही है और इसे पाने के लिए कुछ भी करना हम नाजायज नहीं मानते। तमाम प्रकार के पाक-नापाक हथकण्डों, षड़यंत्रों, पदों और कदों के दुरुपयोग, शोषण, प्रताड़ना और आडम्बरी प्रेम जताकर भी हम अपने आपको धनी और श्रेष्ठ मनवाने के फेर में भिड़े हुए हैं।

हम लोग पैसे बनाने और कमाने से लेकर असीमित भण्डारण तक में लगे हुए हैं और हमारी दिन-रात की सोच का विषय यही होकर रह गया है। फिर झूठन चाटने और मुफतिया चाशनी चाटकर अपनी जीभ को आनंद देने वाले ऎसे-ऎसे पुरुषार्थहीन तथा हराम की कमाई पर जीने वाले लोग भी हमारे आस-पास मण्डली बनाकर जम ही जाते हैं जिन्हें हमारे साथ रहकर जात-जात की झूठन का स्वाद सहजता से मिलता रहता है।

धन संग्रह की इस सारी आपाधापी के बीच सबसे बड़ा और गंभीरतम प्रश्न यह है कि जितना कुछ हम जमा करते जाते हैं उसमें से कितना हम अपने और अपने वर्तमान पर खर्च कर पाते हैं। इस धन से हम कितना संतोष और आनंद प्राप्त कर पाते हैं, और हमारे पूरे जीवन में इस धन का कितना उपयोग होता है।

यह प्रश्न हम समझ लें तो हमारी जिंदगी के कई यक्ष प्रश्नों और जिज्ञासाओं का अपने आप समाधान हो जाए। पर ऎसा करना आसान काम नहीं है। जबकि हकीकत यह है कि हममें से निन्यानवे फीसदी लोग जिस कमाई के लिए लोगों की बददुआएं लेते हैं, हराम की कमाई करते हैं, भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का सहारा लेते हैं, कमीशन पाते हैं, षड़यंत्रों, मानसिक और शारीरिक िंहंसा और घृणित कामों का पाप अपने सर पर लेते हैं, वह अपने किसी काम का नहीं होता।

इस अनाप-शनाप धन को संग्रहित कर सिर्फ हम अपने आपको धनाढ्य तथा दूसरों से श्रेष्ठ मानने का अहंकार जरूर पाल सकते हैं और यही अहंकार है जो जमाने भर में हमेंं यशस्वी और लोकप्रिय होने का भरम हमारी मौत तक बनाए रखता है जबकि इसका सत्य से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं होता।

हम जो कुछ कमाते हैं उसका दस फीसदी भी अपने जीवन में खर्च नहीं कर पाते हैं, भिखारियों की तरह रहते हुए हम जमा ही जमा करते रहते हैं जैसे कि हीरों की खदान का कोई कुशल श्रमिक हीरे जमा करता रहता है।

हमारी नब्बे फीसदी कमाई को वे लोग उड़ा जाते हैं जिनके भाग्य में बैठे-बैठे खाना लिखा होता है। इसके साथ ही इस काली कमाई का काफी कुछ हिस्सा या तो अपनी बीमारी में खर्च हो जाता है अथवा अपनी नालायक संतति परंपरा के रईसजादे व्यसनों और भोग-विलास में उड़ा देते हैं।

यह भी नहीं हो पाए तो चोर-डकैत और विश्वासघाती लोगों के कब्जे में चला जाता है अथवा राजसात हो जाता है। हम पूरी जिन्दगी मजूरों की तरह धन जमा करने में लगे रहते हैं और इससे जुड़े पापकर्मों की गठरी का आकार और वजन बढ़ाते रहते हैं। जबकि यह धन हमारे किसी काम नहीं आता। ऊपर से दुर्भाग्य यह है कि हमें अपने धन में से धेला तक भी अच्छे कामों, दान या जरूरतमन्दों की सेवा में देने में मौत आती है। इस धन का हमारे हाथों न उपयोग हो सकता है, न कोई दान-धरम।

हमारी पूरी जिन्दगी में धन की आवक का ही मार्ग होता है, धन जाने के सारे रास्तों पर हम पहरे बिठा दिया करते हैं। खूब सारे लोग रोज जा रहे हैं, हमें भी जाना ही है, पर यह सोचें कि जो लोग जिन्दगी भर जमा ही जमा करते गए, वे अपने ही धन का कितना कुछ उपयोग कर पाए? इस धन से उन्हें कितना आनंद और संतोष प्राप्त हुआ?

हमारी भी यही दशा होने वाली है, श्रमिकों की तरह दिन-रात लगे रहो, वे लोग पैदा हो चुके हैं या होने वाले हैं, जो हमारी कमाई पर डाका डालने वाले हैं। हमसे तो उन लोगों का भाग्य कितना प्रबल है जिन्हें कुछ नहीं करना है, हमारे माल पर गुलछर्रे ही उड़ाने हैं। खूब सारे रईसजादे यही तो कर रहे हैं। बाप-दादा सश्रम कारावास भुगतने वाले कैदियों की तरह पिसते हुए कमा कर चले गए, और ये लोग माल उड़ा रहे हैं। हराम का खाने-पीने और जमा करने वालों की औलादों को देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि हम पूरी जिंदगी किन लोगों के लिए कमाते हैं।

थोड़ी फुरसत पाकर सोचें और समझने की कोशिश करें कि हम धन-सम्पदा से आनंद और संतोष पाने के लिए करम कर रहे हैं अथवा दूसरों के लिए मजूर बने हुए कोल्हू के बैल। मजूर न रहें, शहंशाह बनें। धन का अपने लिए, समाज, क्षेत्र और देश के लिए उपयोग करें, वरना सब कुछ यहीं रह जाएगा, साथ कुछ भी जाने वाला नहीं।  फिर ये कमीशनखोरी, ब्लेकमेलिंग, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और काली कमाई का पागलपन क्यों और किसके लिए?

Comment:

norabahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
maxwin giriş
maxwin giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpas giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betplay giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
mariobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
mariobet giriş
betvole giriş
mariobet giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
mariobet giriş
betpas giriş
hititbet giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
dedebet
betkanyon
radissonbet
casinofast
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
norabahis giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
norabahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
betwild giriş
redwin giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betpark giriş
vegabet giriş
vegabet giriş
redwin giriş
vaycasino giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
realbahis giriş
realbahis giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
timebet giriş
timebet giriş
betpark giriş
hilarionbet giriş
hilarionbet giriş
parmabet giriş
parmabet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
hilarionbet giriş
parmabet giriş
parmabet giriş
hazbet giriş
hazbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
maxwin giriş
maxwin giriş
norabahis giriş
ikimisli giriş