भारतीय सनातन संस्कृति की अप्रतिम धारा

images (30)

अशोक प्रवृद्ध

यह एक आश्चर्यजनक तथ्य है कि पश्चिम में जिस अरण्य अर्थात जंगल को असभ्यता की निशानी माना जाता है और जिस जंगल के कानून को बर्बरता का पर्यायवाची माना जाता है, वही जंगल हमारे देश भारतवर्ष में संस्कृति के अद्भुत केंद्र रहे हैं और जंगलों में बनाए गये कानूनों अर्थात स्मृति ग्रन्थों से भारतीय समाज आज भी प्रेरणा व मूल्य बोध प्राप्त करता रहा है। पुरातन भारतीय ग्रन्थों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि जंगलों को जीवन के मंगल से भर देने के उद्देश्य से देश के ज्ञान-विज्ञान, अध्यात्म-संस्कृति की प्रवाहिका नाड़ियों को अनवरत स्पन्दित रखने हेतु साधनापूर्ण जीवन जीते हुए समाज के सर्वांगीण विकास की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये पुरातन गौरवमयी भारतवर्ष में जंगलों में भी संस्कृति और सभ्यता का प्रसार कर लिया गया था और प्राचीन काल में हमारे देश भारतवर्ष में अत्यन्त विकसित अरण्य अर्थात वन संस्कृति स्थापित थी।
महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण में उल्लेखित दण्डकारण्य नामक अरण्य अर्थात वन , कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास कृत महाभारत में उल्लेखित खाण्डववन , जहाँ पर बाद में इन्द्रप्रस्थ की स्थापना हुई, विभिन्न पुरातन ग्रन्थों में उल्लेखित दण्डकारण्य , नैमिषारण्य आदि वन्यखण्डों से पुरातन भारतवर्ष में अरण्य अर्थात वनों की महता का पता चलता है। महाभारत की कथा के अनुसार आज जहाँ दिल्ली का पुराना किला है, अर्थात जो इन्द्रप्रस्थ है, वहाँ कभी खाण्डववन हुआ करता था, जिसे श्रीकृष्ण की मदद से जलाकर पाण्डवों ने इन्द्रप्रस्थ नाम से एक नया नगर ही बसा दिया था और इसी नगर में वह महल था जहां राजसूर्य यज्ञ देखने के लिए आए दुर्योधन का पाँव फिसला था, जिसे गिरते देख द्रौपदी हंस पड़ी थी। वनों की इसी श्रृंखला में नैमिषारण्य का भी नाम आता है जहां सूतजी के नेतृत्व में शौनक आदि सहस्त्रों ऋषि-मुनियों ने एक लम्बा ऐतिहासिक संवाद किया था। यह ऐतिहासिक सत्य है कि पुरातन भारतवर्ष में तपोवनों का जाल बिछा हुआ था और ये तपोवन तपस्या करने के स्थान वनों में हुआ करते थे। प्राचीन काल में तपोवन ऋषि – मुनियों का वन में निवास करने और तपस्या करने का स्थान अर्थात आश्रम हुआ करता था ।
आश्रम और तपोवन को कुछ उदाहरणों से आसानी से समझा जा सकता है । वाल्मीकि रामायण के अनुसार श्रीराम ने अपनी भार्या सीता को उसकी गर्भिणी अवस्था में ही राजमहल से निकाल दिया था तो सीता को वाल्मीकि मुनि के आश्रम यानी तपोवन में ही सहारा मिला था जहां उसे लव-कुश नामक दो पुत्र हुए और उन्हें अस्त्र-शस्त्र की उस काल की अत्याधुनिक शिक्षा भी वहीं तपोवन में मिली। जिन याज्ञवल्क्य को राजा जनक की ब्रह्मसभा में सोना मढ़ी सींगों वाली हजार गायें प्राप्त हुई थीं, वे महान याज्ञवल्क्य भी अपनी दो पत्नियों कात्यायनी और मैत्रेयी सहित आश्रम में ही रहा करते थे और उनकी गायें भी वहीं पर थीं। श्रीराम वन गमन प्रकरण में श्रीराम को वनवास के समय अत्रि मुनि के तपोवन में जाने का अवसर प्राप्त हुआ था, वे अत्रि मुनि दण्डकारण्य के एक आश्रम में ही निवास किया करते थे जहां उनकी पत्नी अनसूया ने सीता को सोने के गहनों से लाद दिया था। महाभारत के कथा के अनुसार हस्तिनापुर तत्कालीन प्रतिष्ठान के एक पुरुवंशी सम्राट दुष्यन्त का विश्वामित्र व मेनका की सन्तान शकुन्तला नामक ऋषिकन्या से पहले प्रेम हुआ था और फिर विवाह भी हो गया था, वह विश्वामित्र व मेनका की सन्तान शकुन्तला, कण्व ऋषि के आश्रम में ही निवास करती थी । श्रीकृष्ण और बलराम ने जिन सांदीपनि मुनि से शिक्षा ग्रहण की थी वे सांदीपनि मुनि अपने तपोवन में ही रहा करते थे। विद्यालयीन जीवन में पढ़ी एक उपनिषदीय कथा के अनुसार प्राचीन काल में धौम्य ऋषि के आश्रम में आरुणि पढ़ा करते थे। आरुणि ने एक रात मूसलाधार बारिश के पानी को आश्रम में प्रवेश करने से रोकने के लिए खुद को रात भर मेढ़ पर लिटाए रखा और आरुणि के इस कठिन कर्म से प्रभावित होकर आचार्य धौम्य ने उनका नाम रख दिया था, उद्दालक आरुणि यानी उद्धारक आरुणि।
पुरातन ग्रन्थों के इन उदाहरणों से यह स्पष्ट हो जाता है कि तपोवन अर्थात आश्रम का अर्थ सिर्फ वन के किसी हिस्से में ऋषि-मुनियों के बैठकर तपस्या करने,समाधि में बैठने का जगह नहीं वरन इसका अर्थ अपने विशेष परिधि और विस्तार में और भी विषद हो जाता है क्यूंकि इन तपोवनों में प्रेममय पारिवारिक जीवन भी सुखद रूप में फल-फूल रहा था। महान याज्ञवल्क्य के अपनी दो पत्नियों के साथ निवास करने , याज्ञवल्क्य के अपनी सैकड़ों गउओं के साथ आश्रम अर्थात तपोवन में रहने, कण्व के तपोवन में जाकर महाराज दुष्यन्त ऋषि कन्या शकुन्तला से प्रेम और फिर गन्धर्व विवाह करने, महर्षि अत्रि-पत्नी अनसूया के सीता को सोने के गहनों का अद्भुत उपहार देने आदि की कथाओं से इस तथ्य की पुष्टि ही होती है । पुरातन ग्रन्थों के अध्यन से इस सत्य की पुष्टि होती है कि पुरातन भारतवर्ष के प्रायः सभी वनों में तपोवन हुआ करते थे और तपोवनों में विद्याकुल । ऋषि-मुनि गहन वनों में कुटी छवाकर अर्थात बनाकर रहते थे। जहाँ वे ध्यान और तपस्या के साथ ही गृहस्थ और प्राचार्य के रूप में जीवन व्यतीत करते थे।इन्हें ही आश्रम अर्थात तपोवन कहा जाता था ।उस जगह पर समाज के लोग अपने बालकों को वेदाध्यन के अतिरिक्त अन्य विद्याएँ सीखने के लिए भेजते थे। इन विद्याकुलों में बालक-बालिकायें अर्थात छात्र- छात्राएं सामाजिक और आर्थिक भेद-भाव को भूलकर समन्वित रूप से एक साथ ज्ञान और विज्ञान की विभिन्न शाखाओं का अध्ययन किया करते थे । इन तपोवनों में विद्यार्थियों को विविध ज्ञान की शिक्षा प्रदान किये जाने के कारण यहीं पर तर्क-वितर्क और दर्शन की अनेकों धारणाएँ विकसित हुई।
सत्य की खोज, राज्य के सामयिक मामले व मुद्दे और अन्य समस्याओं के समाधान का यह प्रमुख केंद्र बन गया। कुछ लोग यहाँ सांसारिक झंझटों से बचकर शांतिपूर्वक रहकर गुरु की वाणी सुनते थे। इसे ही ब्रह्मचर्य और संन्यास आश्रम कहा जाने लगा। इन तपोवनों में विपुल संस्कृत साहित्य की रचना हुई । आरण्यक नाम से संस्कृत साहित्य की एक श्रृंखला ही है । वेद और उपनिषदें भी इस बात का प्रमाण प्रस्तुत करती हैं। प्राचीन काल में देश में अरण्य जीवन समाज की महत्वपूर्ण धारा थी, इसका प्रमाण वे चारों वेद हैं और वह उपनिषद साहित्य है जो तपोवनों में ही मुख्य रूप से लिखा गया है। पुरातन ग्रन्थों के अनुसार प्राचीन काल में नगरीय जीवन के साथ ही वनीय जीवन अर्थात आश्रमों में भी मानवों का सामान्य निवास हुआ करता था । नगरीय जीवन में जहाँ शोर, व्यस्तता और उससे पैदा होने वाले तनाव और विलासितापूर्ण जीवन था, वहीँ आश्रमों अर्थात तपोवनों में वातावरण शान्त, सक्रिय मगर आपाधापी, मारामारी नहीं और सादगीपूर्ण जीवन हुआ करता था। शहरों की भान्ति ही तपोवन में सम्पूर्ण पारिवारिक जीवन था परन्तु शहर के विपरीत शान्त वातावरण था, अतिरिक्त ताम-झाम नहीं था, व्यर्थ की गहमागहमी नहीं थी अन्यथा वहाँ सम्पूर्ण सामाजिक जीवन था, एक अलग तरह का सामाजिक जीवन, जहाँ लोग सपरिवार रहते थे, परिवारों की संततियाँ बढती रहती थीं, और तपोवन पूर्णतः आत्मनिर्भर थे। तपोवनों में मानव समाज की तमाम शारीरिक व मानसिक समस्याएं थीं, तपोवन वासी जिनके समाधान अपनी जीवन शैली के अनुसार तलाशते रहा करते थे।वस्तुतः उस समय जीवन का तीन रूप था – शहरी , ग्रामीण और तपोवन ।
वन्य-प्रक्षेत्रों अर्थात जंगलों में जाकर तपोवन में पूर्ण सुसंसकृत और विकसित समाज का निर्माण कर प्रकृति और पर्यावरण के साथ अनुराग व स्वाभाविक स्नेह तथा हिंसक जंगली जानवरों के प्रति भी आत्मीयता मन से भरे निवास करने वाले अर्थात जंगलों में जीवन का मंगल पैदा करने वाले ऋषि-मुनियों के महान उद्देश्य तथा उच्चतम लक्ष्य ने ही भारतवर्ष में अरण्य संस्कृति को आश्रम जीवन की उतुंग ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया था , परन्तु धीरे-धीरे यह आश्रम संन्यासियों, त्यागियों, विरक्तों धार्मिक यात्रियों और अन्य लोगों के लिए शरण स्थली बनता गया। और फिर जंगलों में हिंसक पशुओं और पर्यावरण के बीच ज्ञान-विज्ञान, अध्यात्म-संस्कृति का अद्भुत प्रसार करने की प्रवृत्ति लोगों में क्षीण होने लगी और गौरवमयी भारतवर्ष की अरण्य-संस्कृति का प्राचीन वैभव समाप्त होने लगा। इस गौरवमयी पुरातन वैभव की परम्परा निरन्तर कायम रहे इसीलिए आगे चलकर यह नियम बना दिया गया कि हर मनुष्य को ब्रह्मचर्य और गृहस्थ जीवन बिताने के बाद वानप्रस्थी हो जाना चाहिए अर्थात वन में प्रस्थान कर जाना चाहिए। ईसा से दो सौ वर्ष पूर्व केरल में पैदा हुए संस्कृत के महान नाटककार भास ने अपने कुछ नाटकों में तपोवनों का वर्णन किया है ,परन्तु भास की वर्णन शैली से मालूम होता है कि तब तक तपोवनों का प्राचीन वैभव क्षीण हो चली थी और तपोवनों की सिर्फ याद ही शेष बची थी। भास से कुछ सदी बाद उज्जयिनी में हुए कालिदास ने भी अपने विश्वप्रसिद्ध नाटक अभिज्ञान शाकुन्तलम् में भी कुछ ऐसा ही अर्थात तपोवन परंपरा के क्षीण हो चलने का वर्णन किया है । वस्तुतः पुरातन काल में भारतवर्ष में वन जीवन का अपना अलग ही विशिष्ट स्थान समाज में था, परन्तु जैसे-जैसे कृषि भूमि का फैलाव होने से जंगल कम होते गए वैसे-वैसे अरण्य जीवन का ह्रास स्वाभाविक रूप से होता चला गया और जिन जंगलों में हमने कभी अद्भूत सांस्कृतिक जीवन का विकास किया था, और शिक्षा, ज्ञान और विकास का केन्द्र कभी बनाया था, उन्हीं जंगलों को बचाने के लिए आज कानून बनाने पड़ रहे हैं क्योंकि कुछ दशकों के अन्तराल पर जंगल ढूंढे से भी नहीं नहीं मिलने के लक्षण दिखाई अर्थात आसार उत्पन्न होने लगे हैं ।

Comment:

betbox giriş
betnano giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
sekabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
romabet giriş
romabet giriş
betnano giriş
sekabet giriş
sekabet giriş
nitrobahis giriş
nitrobahis giriş
winxbet giriş
yakabet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
batumslot giriş
batumslot
batumslot giriş
galabet giriş
galabet giriş
betplay giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
galabet giriş
galabet giriş
galabet giriş
betamiral giriş
betamiral giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
galabet giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betnano giriş
galabet giriş
betnano giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betnano giriş
betasus giriş
norabahis giriş
nitrobahis giriş
betvole giriş
betvole giriş
betkolik güncel giriş
betkolik güncel
betkolik giriş
yakabet giriş
betasus giriş
betnano giriş
romabet giriş
yakabet giriş
queenbet giriş
queenbet giriş
betnano giriş
winxbet giriş
betamiral giriş
livebahis giriş
grandpashabet giriş
wojobet giriş
wojobet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betbox giriş
betkare giriş
kareasbet giriş
noktabet giriş
extrabet giriş
extrabet giriş
nisanbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betsat giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betorder giriş
wojobet giriş
wojobet giriş
livebahis giriş
livebahis giriş
nisanbet giriş
nisanbet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betorder giriş
betsat giriş
betsat giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betyap giriş
betyap giriş
sekabet giriş
sekabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
galabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
galabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
maxwin giriş
maxwin giriş
betwoon giriş
betwoon giriş
yakabet giriş
yakabet giriş
betasus giriş
betplay giriş
betplay giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
nitrobahis giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
betasus giriş
nitrobahis giriş
winxbet giriş
winxbet giriş
maritbet giriş
maritbet giriş
betkare giriş
betkare giriş
noktabet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betbox giriş