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क्या यही इस्लाम है ?

हम पेशावर या अन्य कही पर हुए आतंकवादी आक्रमणों को कब तक आपके समाचार पत्रो  में छपे लेखो “दहला देने वाला हमला” , “पागलपन की पराकाष्ठा”, “आतंक का कहर” ,”मानवता के हत्यारे ” “इंसानियत के दुश्मन”आदि आदि को पढ़ कर इसके  वीभत्स चेहरे को कोसते रहेंगे ?  इसकी जड़ो मे जाकर इसको समझ कर समाज के सामने खुलकर कोई यह क्यों नहीं कहता क़ि यह मज़हबी  आतंकवाद ही (धर्मयुद्ध ) जिहाद है ? इसके पीछे इस्लामिक शिक्षायें व उनके धर्म ग्रन्थो द्वारा दी जाने वाली  जिहाद की प्रेरणा से कब तक मुँह मोड़ते रहोगे?

कुछ वर्षो पूर्व संयुक्त राष्ट्र ( 4.11.2008 ) की रिपोर्ट के आधार पर आये समाचारो से ज्ञात होता है क़ि 10 से 13 वर्ष के बच्चों को प्रशिक्षण देकर अलकायदा व तालिबान जैसे खूंखार जिहादी संगठन आत्मधाती दस्ते तैयार करते है और उनके माँ बापो को हज़ारो डॉलर देकर व जन्नत का वास्ता देकर खुश रखते है। पाकिस्तान के बाजौर एवं मोहम्मद तथा अफगानिस्तान के कुनार एवं नुरिस्तान आदि क्षेत्रो मे तो ऐसे बच्चों को (जो जिहाद के लिए तैयार हो जाते है)  दूल्हे की तरह सजा कर घोडे पर बैठा कर पूरे गाँव में घुमाया जाता है और गाँव के लोग उनके माँ बाप को मुबारकबाद देते है।तालिबान ने ‘फियादीन-ए-इस्लाम’ नाम से पाकिस्तान व अफगानिस्तान की सीमा पर वजीरिस्तान मे ऐसे कुछ प्रशिक्षण शिविर चला रखे है जहां हज़ारो कम उम्र के बच्चे आत्मघाती बनाये जा रहे है । इसीप्रकार एक ओर तो महिलाओ को नारकीय जीवन जीने के लिए मज़बूर करते है वही दूसरी ओर उन्ही महिलाओ को भी आत्मघाती  बनाने के लिए प्रशिक्षण शिविर चलाते है ।

क्या यही इस्लाम है ? क्यों नहीं मुस्लिम धर्मगुरु व मुस्लिम समाज इनके विरुद्ध आवाज उठाता ?  क्या जिहाद के लिए सभी की मौन सहमति तो नहीं ?  गरीब का पेट भरना व अनपढ़ को शिक्षित करना  इस्लाम क्यों नहीं सिखाता ? महिलाओ को जिन्दा लाश समझना क्या  इस्लाम मे स्वीकार है ? इन सबको अल्लाह का वास्ता देकर  इस्लाम के लिए जिहाद करो और उसी के लिए जीयो व मरो  का पाठ पढा कर मासूम इंसानो के कत्लेआम के लिए क्यों तैयार किया जाता है ?

आतंकवाद के नाम पर दहशत  पैदा की जा सकती है या की जाती है परंतु “जिहाद’ के लिए  तो नित्य नए तरीको से मौत का नगा नाच ही किया जा रहा  है। अतःआतंकवाद को स्पष्ट रूप से मज़हबी आतंकवाद कहना और  जिहाद की संज्ञा देना अनुचित न होगा ।

विनोद कुमार सर्वोदय
गाज़ियाबाद

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