Categories
राजनीति

आज अटलजी से बेहतर भारत रत्न कौन!

आज के दिन भारत रत्न के लिए श्री अटलबिहारी वाजपेयी से बेहतर उम्मीदवार कौन हो सकता था और उनको यह सम्मान कॉंग्रेस सरकार देती तो उससे बेहतर क्या होता? लेकिन यह श्रेय मोदी सरकार को ही मिलना था। अब तक कॉंग्रेसी अटल बिहारी वाजपेयी को ‘गलत पार्टी में सही आदमी’कहते रहे| उन्होंने वह मौका खो दिया, कि वे इस ‘सही आदमी’ के सिर पर ताज़ रख देते| अटलजी अभी भाजपा में हैं या नहीं, इसका कोई खास मतलब नहीं रह गया है और अब वे सक्रिय राजनीति करेंगे, इसकी भी कोई संभावना नहीं रह गई है| ऐसे में कॉंग्रेस अपने पुराने व्यंग्य को उलट सकती थी| वह कह सकती थी कि ‘सही आदमी सही जगह’ पर है याने अटलजी भारत-रत्न हैं|

वैसे भी आज देश में जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के कद का कोई नेता नहीं है| इन दोनों महान नेताओं का कोई सच्चा उत्तराधिकारी है तो वह अटलबिहारी वाजपेयी ही है| नेहरू की पहचान लोकतंत्र से और इंदिरा गॉंधी की पहचान शक्ति-पूजा से है| अटलजी नेहरू के गहरे प्रशंसक रहे और इंदिरा गॉंधी को बांग्लादेश के बाद उन्होंने दुर्गा कहा था| स्वयं नेहरू युवा अटल बिहारी को बहुत पसंद करते थे| अटलजी ने भारत में लोकतंत्र और शक्ति-संधान का अनुपम कार्य किया है|

 अटलबिहारी वाजपेयी स्वभाव से ही लोकतांत्रिक हैं| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छाया में काम करते रहकर अटलजी ने अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखा और उसे शीर्ष तक पहुॅंचा दिया, यह अपने आप में चमत्कार है|  ऐसा चमत्कार कर दिखाना नेहरू, इंदिरा या लोहिया के लिए असंभव था| जयप्रकाश तो यह बिल्कुल नहीं कर पाते| जिस अटलबिहारी का बचपन और युवावस्था आर्यसमाज और संघ में बीता, उसकी यह हिम्मत कि वह मुसलमानों को अपने खून का खून और अपने मांस का मांस कहे,क्या यह कोई छोटी-मोटी बात है? गुजरात में चल रहे नर-संहार के दौरान वहॉं जाना और शरणार्थियों के शिविर में बुजुर्ग प्रधानमंत्री  का रो पड़ना, अपने आप में असाधारण घटना है| यह वही स्वयंसेवक-प्रधानमंत्री था, जिसने बार-बार कहा था कि गुजरात में राजधर्म का पालन नहीं हो रहा है| समस्त नागरिकों के प्रति अभेद दृष्टि रखना ही सच्ची लोकतांत्रिकता है|

 यह लोकतांत्रिकता अनेक रूपों में प्रकट होती रही| अपने प्रधानमंत्रित्व काल में अटलजी ने विरोधी दलों या नेताओं के प्रति कभी किसी प्रकार का प्रतिशोधात्मक कदम नहीं उठाया| सत्ता ने उन्हें कभी मतांध नहीं किया|  लगभग 50 साल प्रतिपक्ष में रहने के बावजूद अटलजी के भाषणों या लेखों में कभी कटुता दिखाई नहीं पड़ी, हालॉंकि उन्होंने सरकारी नीतियों की आलोचना करने या मज़ाक उड़ाने में कभी कोताही नहीं की| किसी भी लोकतंत्र के लिए यह गर्व की बात हो सकती है कि कोई नेता60-70 साल राजनीति करे और उसके पूरे राजनीतिक जीवन में से ऐसा एक भी उदाहरण आप न बता सकें, जो कटुता या मर्यादाहीनता का पर्याय माना जा सके|  प्रतिपक्ष में रहते हुए सत्तापक्ष के उजले को उजला कहने की उदारता कितने नेताओं में होती है? यदि भारतीय संसद ने उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ सांसद’ की उपाधि दी है तो उस उपाधि का ही सम्मान बढ़ा है| प्रतिपक्ष के नेता की उनकी भूमिका,प्रधानमंत्री की भूमिका से काफी लंबी रही है और वह भारत ही नहीं, दुनिया के सभी लोकतांत्रिक देशों के नेताओं के लिए ‘मॉडल’ के तौर पर मानी जा सकती है| अटल बिहारी वाजपेयी ने करोड़ों भारतीयों को अपने रसीले भाषणों से जिस तरह मंत्र-मुग्ध किया है, क्या देश के किसी अन्य नेता ने किया है?एक भारत रत्न तो उनकी वाग्मिता के लिए ही उन्हें दिया जा सकता है|

 उनकी अपनी पार्टी में अटलजी लोकतांत्रिक प्रणाली को प्रोत्साहित करते रहे, वैचारिक और संगठनात्मक, दोनों स्तर पर| जब वे अध्यक्ष बने तो उन्होंने गॉंधीवादी समाजवाद का नारा दिया,अल्पसंख्यकों के लिए पार्टी के दरवाज़े खोले और अपने आलोचकों को भी उन्होंने पार्टी-पदों पर प्रतिष्ठित किया| पार्टी के आंतरिक विवादों में उन्होंने निर्णायक भूमिका निभाई लेकिन प्रो. बलराज मधोक और कल्याणसिंह जैसे नेताओं के तेजाबी हमलों का उन्होंने कभी भी कटुतापूर्ण उत्तर नहीं दिया| कल्याणसिंह को उन्होंने पार्टी में वापस भी ले लिया| सुब्रहमण्यम स्वामी और गोविंदाचार्य ने उनसे मुठभेड़ की और स्वयं ही पार्टी से बाहर हो गए लेकिन अटलजी ने अपने इन विरोधियों की कभी सार्वजनिक आलोचना तक नहीं की| पार्टी में गुटबाजी चलाना, किसी पार्टी-अध्यक्ष को नीचा दिखाना या कोई पद हथियाना जैसी हरकतें, जो आम नेता करते ही हैं, उनसे भी अटलजी ऊपर उठे रहे| अगर ऐसा नहीं होता तो लालकृष्ण आडवाणी अपनी लगी हुई थाली अटलजी के आगे क्यों सरकाते ! राजनीति में कमल की तरह रहना कोई सीखे तो अटलबिहारी वाजपेयी से सीखे|

 सबसे बड़ी बात तो यह कि अटलबिहारी वाजपेयी ऐसे पहले भारतीय प्रधानमंत्री रहे, जिन्होंने भारतीय लोकतंत्र को गठबंधन-धर्म सिखाया| पूरी अवधि से भी अधिक तक सरकार चलाना और दो दर्जन दलों को जोड़कर चलाना किसी जादूगरी से कम नहीं है| जिन खास मुद्दों पर जनसंघ और भाजपा लड़ती रहीं, उन्हें दरकिनार करने के लिए अपनी पार्टी को पटा लेना किसी मायावी नेता के ही बस की बात है| गठबंधन सरकार तो डॉ. मनमोहन सिंह के जमाने में भी चलती रही लेकिन कई बार उसकी सॉंस भरती-सी, रूकती-सी, अटकती-सी लगती रही। डॉं. मनमोहन सिंह जैसे सरल और बेदम व्यक्ति के प्रधानमंत्री रहते हुए भी गठबंधन में जो खरखराहट सुनाई पड़ती थी और खींचतान होती रहती थी, वह अटलजी के कार्यकाल में कभी सुनाई नहीं पड़ी| दूसरे शब्दों में अटलबिहारी का गठबंधन वैसा ही चला,जैसा जवाहरलाल का एक पार्टी-राज ! नेहरू की खूबियॉं, नेहरू से भी ज्यादा वाजपेयी में नहीं होतीं तो क्या वह गठबंधन चल पाता? यदि अटलजी के स्वभाव में लोकतांत्रिकता नहीं होती तो क्या फारूक अब्दुल्ला, चंद्रबाबू नायडू, ममता बेनर्जी और चौटाला जैसे स्वयंभू नेताओं को एक ही जाजम पर बिठाए रखा जा सकता था? यदि अटलबिहारी वाजपेयी जैसा व्यक्तिव देश को उस समय उपलब्ध नहीं होता तो क्या संघ के स्वयंसेवकों के साथ जॉर्ज फर्नाडीस और शरद यादव जैसे नेता कदम-ताल कर पाते?तरह-तरह के व्यक्तियों और विचारों के बीच जुगलबंदी चलाए रखने का ही दूसरा नाम लोकतंत्र है|अटलबिहारी वाजपेयी को भारत रत्न देकर मोदी सरकार लोकतंत्र के मूल सिद्घांतों को मजबूत करेगी|उन्होंने विदेशमंत्री के तौर पर विदेश नीति में सर्वसम्मति का नारा दिया| उन्होंने बड़े पड़ौसी चीन और छोटे पड़ौसी पाकिस्तान जैसे देशों के साथ सुलह का हाथ बढ़ाया| उन्हें पूरे दक्षिण एशिया के गठबंधन को मजबूत बनाने का रास्ता खोला| प्रधानमंत्री बनने पर वे अटल बिहारी वाजपेयी से भी आगे निकल गए। संघ और भाजपा के प्रिय तो रहे ही, पूरे देश के प्रेमभाजन बन गए। इसीलिए मैंने दो-ढाई साल पहले लिखा था कि नरेंद्र मोदी को यदि भारत का प्रधानमंत्री बनना है और बनकर सफल होना है तो मोदी के शरीर में अटलजी की आत्मा का प्रवेश जरुरी है। अटलजी के व्यक्तिव में भारत के सभी श्रेष्ठ प्रधानमंत्रियों का सुंदर समन्वय है।

 जहां तक इंदिरा गॉंधी का सवाल है, उनके सच्चे वारिस तो अटलबिहारी वाजपेयी ही हैं| अटलजी ने जब बम विस्फोट किया तो मेरे लेख का शीर्षक था – ‘इंदिरा का ताज अटल के माथे पर|’ अटलजी को यह शीर्षक पसंद नहीं आया लेकिन मेरा तर्क यह था कि जो काम राजीव गॉंधी और नरसिंहरावजी को करना था, वह वे नहीं कर सके| उसी काम को, इंदिरा गॉंधी के अधूरे काम को अंजाम दिया अटलजी ने | तो उन्हें उसी परंपरा का बेहतर संस्करण क्यों नहीं माना जाए? यदि पॉंच सौ साल बाद भी कोई भारत का इतिहास लिखेगा तो क्या वह यह नहीं लिखेगा कि वाजपेयी ने भारत को परमाणु महाशक्ति बनाया|  बांग्लादेश का निर्माण करके इंदिरा गॉंधी ने भारत को क्षेत्रीय महाशक्ति बनाया तो अटलजी ने बम-विस्फोट करके भारत को विश्व-शक्ति की दहलीज पर ला खड़ा किया| अटलजी का परमाणु विस्फोट भारत की संप्रभुता का शंखनाद था। प्रधानमंत्री के तौर पर अटलजी ने अनेक उल्लेखनीय और कुछ आलोच्य काम भी किए लेकिन एक राजनैतिक नेता के तौर पर उन्होंने भारतीय लोकतंत्र के चित्त में जैसे मधुर और मनभावन रंग भरे और भारत को जैसी शक्ति से ओत-प्रोत किया, अनेक भारत-रत्नों ने नहीं किया| अटलजी को भारत-रत्न देकर भारत ने खुद को और भारत-रत्न को सम्मानित किया है।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betsat giriş
betsat giriş
betgaranti giriş
betgaranti yeni giriş
betsat giriş
betsat giriş
superbetin giriş
betgaranti giriş
superbetin giriş
vdcasino giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
betsat giriş
betsat giriş
betpark giriş
betpark giriş
nesinecasino giriş
nesinecasino giriş
cratosroyalbet giriş
cratosroyalbet giriş
betgaranti giriş
jojobet giriş
betgaranti mobil giriş
klasbahis
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vdcasino giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betgaranti giriş
betpark giriş