Categories
महत्वपूर्ण लेख

भारत में कुपोषण के शिकार बच्चों की ओर कब देखेगी व्यवस्था

मलाविका धार

भुखमरी और कुपोषण एक ऐसी समस्या है जो सुनने में भले आम लगे, लेकिन इसका प्रभाव सिर्फ खराब स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता। कुपोषण से लंबे समय तक लड़ते हुए यह व्यक्ति के शैक्षिक, आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्थिति को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। आम तौर पर गरीब परिवारों की कुपोषित महिलाएं कुपोषित बच्चे को जन्म देती हैं। इन घरों में आर्थिक तंगी में जीवन काटना एक स्थायी जीवनशैली बन जाती है। ऐसे में बच्चों की शिक्षा में कमी तो होती ही है, साथ ही ये पीढ़ी दर पीढ़ी कुपोषण से लड़ने को मजबूर हो जाते हैं। यह ध्यान देने वाली बात है कि भूख से लड़ते परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से कमज़ोर होते हैं और संसाधनों की पहुंच से दूर।
चूंकि कुपोषण और भुखमरी की समस्या समाज के सबसे कमज़ोर वर्ग तक ही सीमित है, इसलिए यह घरेलू गैस या तेल के बढ़ते दाम की तरह आम जनता, मीडिया और राजनीतिक पार्टियों के लिए चर्चा का हिस्सा नहीं बन पाते। भारत में भूखमरी, कुपोषण, बच्चों में स्टंटिंग या अवरुद्ध विकास, वेस्टिंग या लंबाई के अनुसार कम वजन जैसी समस्याएं कोई नहीं बात नहीं होती। लेकिन कोरोना महामारी ने बाद यह समस्या और भी भयानक रूप ले चुकी है। हाल ही में प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा दायर एक आरटीआई के जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सूचना मुताबिक भारत में 33 लाख से अधिक बच्चे कुपोषित हैं और उनमें से आधे से अधिक गंभीर रूप से कुपोषित (एसएएम) के श्रेणी में आते हैं।  

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा दायर एक आरटीआई के जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सूचना मुताबिक भारत में 33 लाख से अधिक बच्चे कुपोषित हैं और उनमें से आधे से अधिक गंभीर रूप से कुपोषित (एसएएम) के श्रेणी में आते हैं।  

क्या है सिवियर अक्युट मैलन्यूट्रीशन (एसएएम) ?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) गंभीर तीव्र कुपोषण यानि एसएएम को बहुत कम वजन या ऊंचाई या ऊपरी बांह की परिधि (रेडियस) 115 मिलीमीटर से कम या न्यूट्रीशनल एडिमा होने से परिभाषित करता है। एसएएम से पीड़ित बच्चों का वजन उनकी लंबाई की तुलना में बहुत कम होता है। ऐसे बच्चे कमजोर रोग प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यूनिटी) के कारण बीमारियों से ज्यादा ग्रस्त होते हैं या उनके ज्यादा बीमार होने की आशंका रहती है। वैश्विक स्तर पर साल 2020 में 5 साल से कम उम्र के 149 मिलियन बच्चे स्टंटेड, 45 मिलियन वेसटेड और 38.9 मिलियन मोटापे से ग्रस्त थे। डबल्यूएचओ के अनुसार पांच साल से कम उम्र के बच्चों में होने वाली लगभग 45 प्रतिशत मौत कुपोषण से संबंधित होते हैं। आंकड़ों के मुताबिक यह ज़्यादातर भारत जैसे निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होते हैं।

भारत में कुपोषण की स्थिति

पीटीआई द्वारा दायर आरटीआई के जवाब में महिला और बाल विकास मंत्रालय के अनुसार अक्टूबर 2021 तक 17.76 लाख बच्चे एसएएम से पीड़ित थे यानि गंभीर रूप से कुपोषित थे और 15 लाख से ज्यादा मध्यम रूप से कुपोषित (एमएएम) थे। कुल 33.23 लाख का यह आंकड़ा 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के आंकड़ों का संकलन है। नवंबर 2020 और अक्टूबर 2021 के बीच एसएएम बच्चों की संख्या में 91 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। इससे पहले राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 4 और हालिया एनएफएचएस-5 के नतीजे पर गौर करें, तो देश में कुपोषण एक स्थायी समस्या के रूप में पाई जा सकती है। एनएफ़एचएस-4 के अनुसार 5 वर्ष से कम आयु के लगभग 36 फीसद बच्चे कम वजन, 38 फीसद स्टंटेड और 21 वेस्टेड थे। वहीं, साल 2019-20 के एनएफएचएस-5 के जिन राज्यों के लिए डेटा जारी किए गए, उनमें से अधिकांश में एनएफ़एचएस-4 की तुलना में बच्चों में स्टंटिंग और वेस्टिंग में वृद्धि दर्ज हुई। इसके अलावा, भारत में महिलाओं में अनेमिया का प्रचलन भी आम है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 116 देशों में 101वें स्थान पर है। भारत उन 31 देशों में से एक था जहां भूखमरी को ‘गंभीर’ के श्रेणी में बताया गया।

पोषण में असमानता और संसाधनों तक सीमित पहुँच

भारत में अर्थ और संसाधनों की पहुंच तक अलग-अलग समुदाय और तबकों में बहुत ज्यादा  फर्क है। इसलिए यह अंतर कुपोषण के अलग-अलग रूप में भी नज़र आता है। इंडियास्पेंड की एक रिपोर्ट के अनुसार अगर भारत की तुलना कोरोना महामारी की भयानक चपेट से गुजर चुके ब्राज़ील या अमेरिका जैसे देश से करें, तो उन देशों में सामाजिक रूप से कमजोर तबकों का स्वास्थ्य सेवाओं तक कोरोना के दौरान पहुंच को पूरी तरह डॉक्यूमेंट किया गया था। वहीं, हमारे देश में कोरोना महामारी के पहली या दूसरी लहर के दौरान राज्य या केंद्र सरकार के पास प्रवासी मजदूरों की वास्तविक संख्या तक मौजूद नहीं थी। भारत में किसी व्यक्ति के जाति का सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और नीतियों, न्यायिक और  शैक्षिक व्यवस्था को प्रभावित करता है। समाज में जाति अमूमन व्यक्ति के कमाई और शिक्षा को प्रभावित करती है। स्वास्थ्य और पोषण के मामले में आर्थिक और शैक्षिक स्थिति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए आर्थिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े समूह का स्वास्थ्य और पोषण सेवाएं और संसाधनों तक पहुंच हो पाना मुश्किल होता है। ऐसे में, स्वास्थ्य, शिक्षा या रोगजर से जुड़ी समस्याएँ आम हो जाते हैं।

चूंकि कुपोषण और भुखमरी की समस्या समाज के सबसे कमज़ोर वर्ग तक ही सीमित है, इसलिए यह घरेलू गैस या तेल के बढ़ते दाम की तरह आम जनता, मीडिया और राजनीतिक पार्टियों के लिए चर्चा का हिस्सा नहीं बन पाते।

एनएफएचएस-4 के अनुसार अनुसूचित जाति के 50 फीसद परिवार और अनुसूचित जनजाति के 71 फीसद परिवार देश में आर्थिक संपन्नता के मामले में सबसे नीचे हैं। बात किशोरियों की गर्भवती होने की करें, तो दूसरे जाति की तुलना में अनुसूचित जनजाति की 15 से 19 वर्ष की महिलाओं में यह अनुपात सबसे ज्यादा है। एनएफएचएस -4 के अनुसार, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बच्चों में स्टंटिंग का स्तर 42.8 और 43.8 प्रतिशत है जो दूसरे समुदायों के 38.4 प्रतिशत से ज्यादा है। इसी तरह, अनुसूचित जाति के 39.1 और अनुसूचित जनजाति के 45.3 प्रतिशत बच्चों का वजन कम है। यह अनुपात बाकी समुदायों में 35.8 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति के 21 फीसद बच्चे और अनुसूचित जनजाति के 27.4 बच्चे वेसटेड हैं जो बाकी समुदायों से ज्यादा है।
और पढ़ें : सरकार से मिले कुपोषण के खिलाफ़ महिला कर्मचारियों की लड़ाई

सार्वजनिक वितरण प्रणाली की स्थिति

बात सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की करें, तो यह आज भी सेंसस साल 2011 के डेटा पर आधारित है जिससे संभव है कि कई परिवारों को ये सुविधाएं न मिल रही हो। इसके अलावा, कोरोना महामारी में आर्थिक तंगी, कुपोषण और भुखमरी के मद्देनजर मुफ्त राशन की परियोजना को अब केंद्र सरकार ने बंद करने की घोषणा कर दी है। हालांकि देश में कोरोना महामारी की स्थिति पहली और दूसरी लहर से बेहतर है, लेकिन आज भी वंचित तबकों के लाखों-करोड़ों लोगों को रोजगार नहीं मिला है। सरकार से मिले मुफ्त राशन पर ही ऐसे परिवारों का घर चलता है। यह घरों में पेट भरने और पोषण का एकमात्र ज़रिया होता है। गौरतलब हो कि कोरोना महामारी में भुखमरी और कुपोषण को ध्यान रखते हुए ही राशन में मुफ्त दाल दिए जाने का प्रावधान भी किया गया था। मुफ्त राशन बंद होने से सामाजिक और वंचित परिवारों को कुपोषण से बचा पाना और भी मुश्किल और अनिश्चित होगा।   
बता दें कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स के अनुसार, साल 2012 की तुलना में साल 2021 में भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में वेस्टिंग के प्रचलन में वृद्धि हुई है। वहीं, पांच साल से कम उम्र के बच्चों में शिशु मृत्यु दर और पांच साल से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग की व्यापकता में साल 2000 के बाद से लगातार गिरावट हुई है। लेकिन ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत की स्थिति पिछले 10 सालों में लगातार खराब हुई है। मेडिकल पत्रिका द लैनसेट के अनुसार साल 2017 में कुल 1 मिलियन से भी अधिक पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के 68.2 फीसद मामलों में कुपोषण कारण रहा है। महिलाओं और बच्चों के लिए बनाए गए कई पोषण कार्यक्रमों और योजनाओं के बावजूद, पोषण के सूचक आज भी चिंताजनक हैं। सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं को बनाने की ज़रूरत है। हमारे देश में मौजूद सामाजिक असमानता और भेदभाव नज़रअंदाज़ कर कोई महत्वाकांक्षी योजना नहीं बनाई जा सकती। योजनाओं के समावेशी होने से ही सबका विकास संभव हो सकता है।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
runtobet giriş
runtobet giriş
runtobet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hiltonbet
vaycasino giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
milanobet giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
betpark giriş
betvole giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
norabahis giriş
romabet giriş
romabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
restbet giriş
restbet giriş
restbet giriş
vaycasino giriş
restbet giriş
Vaycasino Giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
milanobet giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betasus giriş
betasus giriş
casinoroyal giriş
casinoroyal giriş
betbigo giriş
betbigo giriş
betbigo giriş
betbigo giriş
casinoroyal giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
bahiscasino giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betasus giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betcio giriş
betcio giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
bets10 giriş
bets10 giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
casinomaxi giriş
casinomaxi giriş
ilbet giriş
betcio giriş
betvole giriş
betcio giriş
betcio giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
norabahis giriş
betcio giriş
nakitbahis giriş
nakitbahis giriş
celtabet giriş