एक्शन के मूड में दिख रही है अखिलेश सरकार

akhileshbअतुल मोहन सिंह

लखनऊ. सोशल साइट्स पर सरकार के खिलाफ मुहीम छेडऩे वाले आईएएस अधिकारियों पर अखिलेश सरकार की आंखें टेढ़ी हो गई है। इसके साथ ही बिना किसी अनुमति के केस की जांच के लिए निकलने वाले अधिकारियों पर भी सरकार एक्शन लेने के मूड में है। इसके लिए मुख्य सचिव बागी अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांग सकती है।

विशेष बातचीत में यूपी सरकार के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने कहा कि ऐसे अधिकारियों से जल्द ही स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। सरकार इसकी तैयारी कर रही है। मुख्य सचिव ने आईएएस सूर्य प्रताप सिंह (सार्वजनिक उद्यम विभाग में प्रमुख सचिव पद पर तैनात) और आईपीएस अमिताभ ठाकुर (नागरिक सुरक्षा विभाग में आईजी पद पर तैनात) का नाम लेकर कहा कि इनका व्यवहार कंडक्ट रूल के बाहर पाया गया है। ऐसे में सरकार इन पर कार्रवाई कर सकती है।

सरकार से नहीं ली है अनुमति : मुख्य सचिव आलोक रंजन ने कहा कि आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने सर्विस में रहते हुए अपनी सीमा लांघ दिए हैं। उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। आईएएस सूर्य प्रताप सिंह और आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने ऐसी कोई अनुमति सरकार से नहीं ली है, जिसके बाद वह किसी धरना प्रदर्शन में शामिल हो या फिर सरकार विरोधी कोई मुद्दा उठाएं।

ऑल इंडिया सर्विसेस कंडक्ट रूल: ऑल इंडिया सर्विसेस कंडक्ट रूल 1968 के अनुसार, कोई भी अधिकारी बिना सरकार की अनुमति के सोशल वर्क नहीं कर सकता है और न ही चैरिटी कर सकता है। इस रूल में अगस्त 2014 में अमेंडमेंट किया गया। रूल नंबर 10 में साफतौर पर लिखा है कि गवर्नमेंट सर्वेंट को कोई भी ऐसा काम करने से बचना चाहिए, जोकि नियमों के खिलाफ हो।

नहीं किया नियमों का उल्लंघन : आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने कहा, ‘मैंने ऐसा कोई काम नहीं किया है जोकि सेवा नियमावली का उल्लंघन करता हो। इसके साथ ही कोई ऐसा मुद्दा नहीं उठाया जोकि सरकार के खिलाफ हो। ऐसे में सेवा नियमावली का उल्लंघन नहीं हुआ है।’

कई मामलों की कर चुके हैं जांच: इसी तरह आईपीएस अमिताभ ठाकुर भी कई मामलों में अपनी जांच कर मीडिया के सामने रखते हैं। अभी हाल ही में गौरी मर्डर केस से अलग हुए अनुज गौतम के पक्ष में उसके घर जाकर जांच की थी। यही नहीं लामार्टिनियर स्कूल में हुए राहुल श्रीधर सुसाइड केस में भी राहुल के परिजनों के साथ थाने पहुंचे थे। इसके अलावा भी आईपीएस अमिताभ ठाकुर कई धरना प्रदर्शन में हिस्सा लेते रहे हैं।

परेशान करने का है उद्देश्य: आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने कहा, ‘सरकार यदि किसी एक्शन के मूड में है तो फिलहाल मुझे इसकी जानकारी नहीं है। बतौर अधिकारी मैंने सेवा नियमावली का उल्लंघन नहीं किया है। ऐसी बातें सिर्फ परेशान करने के उद्देश्य के लिए हैं।

सीएम के खिलाफ खोला मोर्चा: डॉ. सूर्य प्रताप सिंह जब माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव थे तब उन्होंने बोर्ड एग्जाम से पहले नकल माफियाओं के खिलाफ आवाज उठाई थी। यह उन्हें भारी पड़ी और सरकार ने उनका तबादला लघु सिंचाई विभाग में कर दिया था।

यहां भी चेकडैम घोटाले के चर्चा में आने के बाद सार्वजनिक उद्यम विभाग भेज दिया गया। इसके बाद से वह वास्ट नामक संस्था के जरिए लगातार आवाज उठा रहे हैं।

बोर्ड एग्जाम में नकल का मुद्दा उठाया था: सबसे पहले उन्होंने बोर्ड एग्जाम में नकल रोकने के लिए यूपी के संवेदनशील जिलों का दौरा किया, जिससे नकल माफियाओं में हडक़ंप मच गया। इसके बावजूद सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंगी। वहीं, उन्होंने किसानों के मुआवजे का मुद्दा भी उठाया और मूल्यांकन का बहिष्कार कर रहे अध्यापकों के साथ धरना भी दिया। साथ ही साथ पीसीएस प्री का परचा लीक होने का मुद्दा भी जोर से उठाया और इलाहाबाद में छात्रों के साथ कैंडल मार्च भी किया। किसानों के मुद्दे पर भी उन्होंने सीएम पर अपने फेसबुक पेज पर हमला बोल दिया और अभिनेत्री कैटरीना कैफ के साथ फोटो पोस्ट कर कमेंट किया था।

क्या कहते हैं जानकार: वरिष्ठ पत्रकार रतन मणि लाल ने कहा, ‘किसी भी सरकारी अफसर के लिए सेवा नियमावली बनी हुई है। यदि सरकार के किसी काम से किसी अफसर को दिक्कत है तो वह संबंधित विभाग के अधिकारी के सामने अपनी बात रख सकता है। जब अधिकारी अपनी ही सरकार के किसी अंग के खिलाफ खड़ा होता है तो यह सेवा नियमावली का उल्लंघन होता है। उन्होंने बताया कि ऐसे अधिकारियों को पहले स्पष्टीकरण भेजा जाता है। इसमें सरकार संतुष्ट नहीं हुई तो वह उनका सस्पेंशन भी कर सकता है। इसके बावजूद अधिकारी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलता है तो फिर राज्य सरकार केंद्र सरकार को कड़ी कार्रवाई के लिए चि_ी लिख सकती है।

क्या कहती है यूपी आईएएस एसोसिएशन: यूपी आईएएस एसोसिएशन का रुख इस मामले पर पूरी तरह साफ़ है। सचिव भुवनेश कुमार ने बताया कि हर अधिकारी के लिए सेवा नियमावली का पालन करना अनिवार्य है। रही बात फेसबुक पर सरकार विरोधी मुद्दों को उठाने की, तो वो सब इस सेवा नियमावली में कवर होता है। ऐसे में जो अधिकारी सेवा नियमावली का उल्लंघन करता है, उसके लिए वह खुद उत्तरदायी होगा।

 

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