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कोविड-19 : अभी सतर्कता और सजगता बनाए रखनी होगी

जगत राम, राकेश कोछड़

गत 21 अक्तूबर के दिन भारत ने कोविड-19 के खिलाफ युद्ध में वैक्सीन का 100 करोड़वां टीका लगाकर मील का पत्थर प्राप्त कर लिया। यह असाधारण प्राप्ति है जिसे महज 9 महीनों में कर दिखाया है, वह भी भारत निर्मित वैक्सीन से। हमारी कम-से-कम 75 फीसदी बालिग आबादी को पहला टीका लग चुका है, वहीं दोनों खुराक पाने वालों की गिनती लगभग 31 प्रतिशत है। महत्वपूर्ण यह है कि अकेले सितम्बर माह में अभूतपूर्व 23.6 करोड़ टीके लगाए गए। इस तरह दोनों टीके लगों की संख्या अमेरिका की कुल जनसंख्या के करीब है। आशंकाओं के विपरीत कुल वैक्सीन का 65 फीसदी इस्तेमाल ग्रामीण भारत में हुआ है।

मील के इस पत्थर से आगे की राह क्या है? हमारी वयस्क आबादी को दोनों खुराकों से सुरक्षित करने के बाद अगली चिंता वायरस के नए रूपांतरों की आशंका के मद्देनजर बूस्टर शॉट लगाने के अलावा अवयस्क वर्ग को वैक्सीनयुक्त करना है। वैसे समूची आबादी को पूरी तरह वैक्सीन लगाने का काम मार्च, 2022 तक ही हो पाएगा।

वहीं दूसरी ओर जहां हिमाचल प्रदेश, गुजरात और केरल में, जहां कुल आबादी में लगभग आधी को दोनों टीके लगाने का काम पूरा हो चुका है, तो यूपी में यह शोचनीय आंकड़ा मात्र 19 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 32 फीसदी है। लगातार रोजाना घटते कोविड मामलों के मद्देनजर चिंताजनक यह है कि कहीं आने वाले महीनों में जोश में बहक कर इसकी अनिवार्यता और वैक्सीन लगवाने की ललक मद्धम न पड़े जाए। यही वह कारक हैं, जिसकी वजह से अमेरिका में पिछली लहर बनी थी, क्योंकि हजारों लोग दूसरा टीका लगवाने नहीं आए थे। भारत में 10 करोड़ नागरिकों को दूसरी खुराक नहीं लगी है। इसलिए जनसंख्या के बड़ा भाग पर संक्रमित होने और इसको अन्यों तक फैलाने का जोखिम मंडरा रहा है।

हालांकि, विश्व में टीकाकरण बढ़ने के बावजूद कोविड प्रतिरोधकता शक्ति की घटती क्षमता से चिंता भी बनी है। साइंसदानों को अब तक पूरी तरह पक्का नहीं है कि कोविड 19 के खिलाफ बनी प्रतिरोधक क्षमता का कितना स्तर में वास्तव में शरीर में बने रहना जरूरी है। कुछ कोविड वैक्सीनों में बूस्टर टीका लगवाने की जरूरत है। हालांकि हेपेटाइटिस-बी में भी 6 महीनों बाद बूस्टर डोज़ लगवाने की जरूरत होती है। इसी तरह टिटनेस टीका हर 10 साल बाद लगवाना होता है। हेपेटाइटिस-ए और टाइफाइड वैक्सीन को भी समय-समय पर पुनः लगाना जरूरी है और यही बात फ्लू के टीके पर लागू है।

इस्राइल में 60 साल से ऊपर लोगों में, जिनको दोनों डोज़ लगवाए 5 माह बीत चुके हैं, उनमें पाया गया है कि हाल में टीका लगवाने वालों की बनिस्बत कोविड से संक्रमित होने का खतरा तीन गुणा ज्यादा है। यूके के एक अध्ययन में सामने आया है कि कोविड के लिए एस्ट्रा-जेनेका वैक्सीन की दूसरी खुराक लेने के 20 हफ्तों बाद इसकी प्रभावशीलता 67 प्रतिशत से घटकर 47 फीसदी रह जाती है। एक अन्य अध्ययन बताता है कि फाइज़र-बायोटेक के बूस्टर टीके का प्रभाव लक्षणयुक्त कोविड संक्रमण मामलों में 95.6 पाई गई है। यह डाटा उस वक्त का है, जब डेल्टा वेरियंट ने कोहराम मचा रखा था।

अमेरिका की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने हाल ही में दो वैक्सीनों को बतौर बूस्टर शॉट इस्तेमाल करने की आपातकालीन मंजूरी दी है। मोडर्ना अथवा जॉनसन एंड जॉनसन का बूस्टर टीका उनके लिए है, जिन्हें कोविड वैक्सीन का पूरा कोर्स लिए कम-से-कम 6 महीने हो चुके हों, जो 18-64 आयु वर्ग वाले हैं क्योंकि तीव्र संक्रमण होने का खतरा सबसे ज्यादा इस वर्ग को है या उन्हें जो किसी अन्य बीमारी की वजह से बार-बार अस्पतालों में भरती हों या व्यवसाय संबंधित संक्रमण से पीड़ित होते रहते हैं। एफडीए ने मिक्स एंड मैच वैक्सीन लगाने को भी अनुमति दे दी है, क्योंकि देखने में आया है कि दो अलग किस्म की वैक्सीन लगवाने से शरीर की कोविड प्रतिरोधकता क्षमता बढ़ती है।

यूके के राष्ट्रीय स्वास्थ्य तंत्र ने भी 6 महीने पहले दूसरा टीका लगवा चुके चुनींदा लोगों को – जो 50 साल से ऊपर हैं या अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मी और कुछ अन्य वर्ग को बूस्टर वैक्सीन लगवाने का विकल्प दिया है। भारत को भी दोनों टीके लगवा चुके लोगों को बूस्टर शॉट लगाने की जरूरत पर विचार करना चाहिए। देश के विभिन्न हिस्सों से एकत्र किया गया डाटा बताता है कि दोनों खुराकें ले चुके लोगों में 8-10 प्रतिशत को फिर से संक्रमण हुआ है। राज्यों के पास 10 करोड़ टीकों की उपलब्धतता होने के मद्देनजर ज्यादा नाजुक वर्ग, जैसे बुजुर्ग और स्वास्थ्यकर्मियों को बूस्टर डोज़ लगाने पर विमर्श किया जाना चाहिए।

टीकाकरण का अगला प्राप्तकर्ता वर्ग 18 साल से कम अवयस्क हैं। सरकार ने पहले ही दो वैक्सीन – ज़ायडस कैडिला की ज़ाइकोव-डी और भारत बायोटैक की कोवैक्सीन को 2-17 आयु वर्ग के बच्चों को बतौर आपातकालीन इस्तेमाल की इज़ाजत दे रखी है। लेकिन डॉ. वीके पॉल जो कोविड टास्क फोर्स के मुखिया हैं, उन्होंने हाल ही में कहा है कि सरकार को बच्चों और शिशुओं को टीके लगाने की अंतिम मंजूरी पर जल्द फैसला लेना चाहिए। जैसा कि स्कूल-कॉलेज पुनः खुलने शुरू हो चुके हैं, ऐसे में बिना वैक्सीन वाले बच्चे खतरा बन सकते हैं, हालांकि उनमें अधिकांश में कोविड का असर कम रहता है।

चिंता की बात है कि जहां अमेरिका, चीन और यूरोप ने अपनी आबादी के लगभग आधे हिस्से को दोनों टीके लगा दिए हैं वहीं अफ्रीका में यह आंकड़ा फिलहाल शोचनीय है। विशेषज्ञ बार-बार चेता रहे हैं कि मुल्कों के बीच आवाजाही और व्यापार पुनः शुरू होने के बाद कोविड-19 से पूरी तरह मुक्ति तब तक संभव नहीं है जब तक कि विश्व के सभी भागों में काबू में नहीं आ जाता। हालांकि डब्ल्यूएचओ ने पिछले साल सबको समान रूप से वैक्सीन मुहैया करवाने हेतु – कोवैक्स – नामक समूह बनाया था, लेकिन समृद्ध राष्ट्रों ने अपनी आबादी की एवज में गरीब देशों के लिए पर्याप्त वैक्सीन नहीं छोड़ी। इससे एक तरह की जमाखोरी हुई, जिससे एक्सपायरी की अंतिम तारीख निकलने की वजह से वैक्सीन के करोड़ों टीके बर्बाद हो गए।

फिर लोगों में आक्रामता की हद तक वैक्सीन लगवाने वाली हिचकिचाहट भी कम टीकाकरण दर का कारण है, पूरबी यूरोप के लातविया, रोमानिया और बुलगारिया इसका उदाहरण है। यहां तक कि रूस में भी, स्वदेशी वैक्सीन के बावजूद, इसी तरह का संकट है, बल्कि तथ्य तो यह कि कोविड महामारी से सबसे ज्यादा मृत्यु दर वहीं है।

मौजूदा साल के शुरू में भारत में डेल्टा के अति-संक्रामक और मारक रूपांतर ने ही कोहराम मचाया था। विश्वभर में सबसे ज्यादा संक्रमण और मौतों के पीछे भी यही डेल्टा है। अब इसकी एक नई किस्म, एवाई.4.2 वेरियंट की शिनाख्त सितम्बर माह में इंग्लैंड में हुई है। यह रूपांतर सिलसिलेवाराना संक्रमण के कुल मामलों में 6 फीसदी के लिए उत्तरदायी है। चिंता है कि कुछ नये रूपांतर बहुत ज्यादा मारक हो सकते हैं।

हमें आने वाले महीनों में सावधान रहना होगा, पर्यटन और सामाजिक आयोजन शुरू होने के साथ, लोगों ने अपने सुरक्षा स्तर में कमी कर दी है, मास्क लगाना और शारीरिक दूरी कायम का ध्यान रखना छोड़ दिया है। त्योहारों का मौसम और चुनाव भी नए मामलों के जनक होते हैं, खासतौर पर ऐसे वक्त पर जब वैक्सीन से प्राप्त प्रतिरोधक क्षमता समय के साथ घटनी शुरू हो चुकी है। इंग्लैंड में रोजाना कोविड मामले फिर से उछाल लेकर 50000 तक पहुंच गए हैं – जो मध्य-जुलाई से बाद सबसे ज्यादा हैं – इसके पीछे प्रतिबंध उठाना और मास्क एवं शारीरिक दूरी का पालन न करना है। 100 करोड़ टीकाकरण के बनी प्राप्ति को सुदृढ़ रखने को हमें कोविड संबंधी संहिता का पालन, मास्क लगाकर रखना और भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूर रहने और गैर-जरूरी एकत्रता बनाने से गुरेज करना चाहिए।

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