अंतहीन लालच के बीच त्याग की मिसाल

विश्वनाथ सचदेव

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के संपन्न लोगों से अपील की है कि वे गोबर या लकड़ी के धुएं में भोजन पकाने के लिए शापित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए सब्सिडी वाली गैस का त्याग करें। ऐसी ही एक अपील कुछ प्रबुद्ध नागिरकों ने अपने सांसदों-विधायकों से की है कि वे अपनी कैंटीनों की सब्सिडी का त्याग कर देश के सामने उदाहरण प्रस्तुत करें। सुना है, प्रधानमंत्री की अपील का कुछ तो असर हुआ है, पर हमारे निर्वाचित प्रतिनिधियों के कान पर अभी जूं नहीं रेंगी। उलटे वे इस आशय की दलीलें दे रहे हैं कि संसद अथवा विधानसभाओं की कैंटीनों से मिलने वाली सब्सिडी का लाभ सिर्फ वे ही नहीं उठाते, बाकी बहुत से लोग भी उठाते हैं। ये बाकी बहुत से लोग भी मुख्यत: समाज के उसी तबके के होते हैं, जिसे सुविधा-संपन्न वर्ग कहा जाता है। गरीबी की रेखा से नीचे का जीवन जीने वाला देश का आम नागरिक तो जन-प्रतिनिधियों की इन कैंटीनों में झांक तक नहीं सकता! बहरहाल, हमारे प्रतिनिधियों ने भले ही त्याग का वह जज़्बा न दिखाया हो, जिसकी उनसे उम्मीद की जाती है, पर मध्यप्रदेश के एक छोटे से गांव छंदेड़ा के एक युवक ने एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है जो हमारे जन-प्रतिनिधियों को शर्मसार कर सकता है।

छंदेड़ा गांव के इस 34 वर्षीय युवक गंगाराम ने जिला कलेक्टर को एक पत्र लिखकर यह आग्रह किया है कि उसका नाम गरीबी रेखा की सूची में से काट दिया जाये। वर्ष 2002 से गंगाराम का नाम बीपीएल की सूची में दर्ज है, पर अब वह इतना कमाने लगा है कि उसे लग रहा है उसे इस सूची में होने के लाभ किसी और ज़रूरतमंद के लिए छोड़ देने चाहिए। गंगाराम अब तरह-तरह के काम करके लगभग दस हज़ार रुपये महीना कमा रहा है और उसे लगता है ‘अब मैं अपने आप को गऱीब क्यों समझूं। अब मैं गरीब होने की कुण्ठा से मुक्त होना चाहता हूं।’ मां, पत्नी और दो बच्चों के परिवार को पालने वाले गंगाराम ने गांव में वह हर काम किया है, जिससे वह दो पैसे कमा सके। उसका कहना है-भला हो इंदिरा गांधी गरीबी उन्मूलन परियोजना का, अब वह दस हज़ार रुपये महीना कमा रहा है। पिता की अस्थाई आय के कारण गंगाराम के परिवार ने कभी अच्छे दिन नहीं देखे थे, पर अब गंगाराम अच्छे दिनों के सपने देख पा रहा है। अनुसूचित छात्रावास में रहकर उसने पढ़ाई की थी। हाल ही में उसने बीए की डिग्री प्राप्त की है। इसी बीच उसने चित्रकारी के अपने शौक को परवान चढ़ाया। डीपीआईपी परियोजना वालों ने गंगाराम की चित्रकारी देखी, उसकी योग्यता-लगन देखी और उसे अपने साथ जोड़ लिया। अब वह कहता है, ‘अब मैं गरीब नहीं रहा..’ और उसने आवेदन दिया है कि उसका नाम गरीबी की रेखा वाली सूची से हटा दिया जाये।

जब हर तरफ से सरकारी सहायता को हड़पने की खबरें आ रही हों; जाटों जैसा समुदाय ओबीसी में अपना नाम जुड़वाने के लिए आंदोलन कर रहा हो; सांसद डेढ़ रुपये की दाल और 29 रुपये की पूरी थाली मिलने को अपना अधिकार बता रहे हों, ऐसे में किसी गंगाराम को स्वयं को गरीब कहलवाना शर्म की बात लगे, इसे एक शुभ संकेत ही माना जाना चाहिए। यह सही है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता, पर ऐसी शुरुआत कोई अकेला ही करता है। एक अकेले के इस जज़्बे और जीवट का सम्मान होना चाहिए।

यह दुर्भाग्य ही है कि आज़ादी प्राप्त करने के लगभग सात दशक बीत जाने के बाद भी देश गऱीबी की लड़ाई लगातार हारता दिख रहा है। आंकड़ों में यदि कुछ सुधार दिख भी रहा है तो उसका परिणाम आम आदमी के जीवन में दिखाई नहीं देता। गांवों में किसानों की आत्महत्याएं और शहरों में फुटपाथों पर जीने के लिए शापित गरीबी हमारी योजनाओं और प्रयासों की असफलता ही उजागर कर रहे हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं, और सुधार के आसार दिख नहीं रहे, कि एक हताशा का माहौल बनता जा रहा है। आर्थिक विषमता की स्थिति यह है कि देश में अरबों रुपये कमाने वाले भी हैं और आधी से ज़्यादा आबादी गरीबी की कथित रेखा के नीचे का जीवन जी रही है। भ्रष्टाचार हर स्तर पर पनप रहा है और जीवन लगातार मुश्किल होता जा रहा है। इस सब के लिए व्यवस्था को दोषी ठहराना ग़लत नहीं है। जनता अच्छे दिन अनुभव कर सके, यह हर सरकार की बुनियादी ज़िम्मेदारी है। पर अच्छे दिन सिर्फ नारों से नहीं आते। इसके लिए हर स्तर पर ईमानदार कोशिश की आवश्यकता होती है, और हमारी ऐसी हर कोशिश अब तक बौनी ही सिद्ध हुई है। दोषी कोई भी हो, इसका परिणाम देश का आम नागरिक भुगत रहा है।

पर क्या इसके लिए व्यवस्था को दोष देने से ही बात बन जायेगी? व्यवस्था दोषी है, व्यवस्था की ज़िम्मेदारी निभाने वाले भी अपना काम ईमानदारी से नहीं कर रहे। जिस व्यवस्था में ‘व्यापम’ जैसे घोटाले हो सकते हों और जहां भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित हो जाने के बावजूद अपराधी की आंखों में शर्म न दिखाई दे, उस व्यवस्था से बहुत ज़्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती।

उम्मीद सिर्फ गंगाराम से की जा सकती है। किसी गंगाराम के एक गऱीब परिवार में जन्म लेने के बावजूद जिंदगी बेहतर बनाने के सपने देखना, उन सपनों को पूरा करने के लिए लगन और ईमानदारी से जुट जाना, पढऩा, अपने सामथ्र्य के अनुसार स्थिति बेहतर बनाने के लिए हर संभव कार्य करना, और उनमें सफल होना। यह सब बहुत महत्वपूर्ण है।

प्रेरणादायक भी। हर युवा के लिए प्रेरणा बनना चाहिए गंगाराम का यह उदाहरण। पर इस प्रेरणा से भी कहीं अधिक महत्वपूर्ण है किसी गंगाराम का गऱीब कहलाने में शर्म महसूस करना। उतना ही महत्वपूर्ण है गंगाराम की यह सोच कि आर्थिक स्थिति में सुधार के बाद अब उसे उन सुविधाओं का लाभ नहीं लेना चाहिए जो किसी और गऱीब के काम आ सकती हैं। सही है कि गऱीबों की सूची में से एक नाम कट जाने से क्रांति नहीं हो जायेगी, पर क्रांति की शुरुआत ऐसी ही चिंगारियों से होती है।

संभव है इस उदाहरण को देखकर समाज के उस वर्ग को थोड़ी-सी शर्म आये जो उन सुविधाओं पर कुण्डली मारे बैठा है, जिनसे सचमुच के ज़रूरतमंदों की ज़िंदगी में बदलाव आ सकता है। शायद किसी एक सांसद को गंगाराम का उदाहरण यह समझा सके कि संसद की कैंटीन में 29 रुपये में वह जो थाली खा रहा है, उस पर उसका हक कहीं ज़्यादा बनता है जो 29 रुपये रोज़ कमाकर परिवार का पेट पालने में लगा हुआ है।

शायद कोई एक सांसद खड़ा होकर कहे, अब मैं संसद की कैंटीन में सस्ती दर पर मिलने वाला खाना नहीं खाऊंगा। शायद उस एक सांसद को देखकर बाकियों को भी सोचने पर मजबूर होना पड़े। शायद वेतन और भत्तों के रूप में लाखों रुपये प्रतिमाह कमाने वाले सांसद इस एक सब्सिडी का त्याग करके गंगाराम के साथ खड़े होना चाहें, उसके समकक्ष बनना चाहें। नहीं, गंगाराम, आसान नहीं लगता इस ‘शायद’ का वास्तविकता बन पाना। फिर भी, उम्मीद तो कर ही सकते हैं हम।

Comment:

betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
kolaybet
betgaranti
betpark
kolaybet
betpark
betpark
casibom giriş
casibom giriş
casibom
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet giriş
betpark
betpark
betgaranti
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet
kolaybet
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet
bettilt giriş
bettilt giriş
harbiwin giriş
harbiwin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betbox giriş
betbox giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
Hitbet giriş
xbahis
xbahis
vaycasino
vaycasino
bettilt giriş
bettilt giriş