महर्षि दयानंद और स्वामी श्रद्धानंद के बिना आजादी का आंदोलन अधूरा है : आलोक कुमार (अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष विहिप )

‘उगता भारत’ के चेयरमैन श्री देवेंद्र सिंह आर्य विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री आलोक कुमार के साथ बातचीत करते हुए। (फोटो : अजय आर्य)

विश्व हिंदू परिषद देश में हिंदू जागरण और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने वाले एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में अपना स्थान रखती है। इस संगठन के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री आलोक कुमार अपने विनम्र और सौम्य स्वभाव के लिए जाने जाते हैं । ‘उगता भारत’ समाचार पत्र के चेयरमैन और मुख्य संपादक डॉ राकेश कुमार आर्य की उनसे कल दिनांक 1 सितंबर को उनके ग्रेटर कैलाश w -99 नई दिल्ली स्थित कार्यालय में मुलाकात हुई।
‘उगता भारत’ के साथ अपनी बातचीत में विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने बड़ी बेबाक टिप्पणी करते हुए कहा कि स्वामी दयानंद जी और स्वामी श्रद्धानंद जी को यदि भारत के स्वाधीनता आंदोलन में से निकाल दिया जाए तो आंदोलन का इतिहास अधूरा रह जाएगा। उन्होंने कहा कि मैं स्वयं आर्य समाजी परिवेश और परिवार से आया हूं। इसलिए इन दोनों महापुरुषों के प्रति मेरे हृदय में विशेष सम्मान है। इनके राष्ट्रवादी आंदोलन और वैज्ञानिक आधार पर वैदिक दृष्टिकोण के प्रचार प्रसार का वह हृदय से सम्मान करते हैं।
उन्होंने कहा कि भाई परमानंद पंडित राम प्रसाद बिस्मिल जैसे अनेकों क्रांतिकारी लोग थे जो महर्षि दयानंद के स्वराज्यवादी और राष्ट्रवादी विचारों के दीवाने थे । स्वामी श्रद्धानंद जैसे क्रांतिकारी बलिदानियों के बलिदानों से प्रेरित होकर अनेकों गुरुकुलीय ब्रह्मचारी स्वाधीनता आंदोलन में कूद पड़े थे।
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान दिवस को उनका संगठन प्रत्येक वर्ष बड़े सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाता है ।क्योंकि उनकी सोच पूर्णतया हिंदू निष्ठ सोच थी। उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘हिंदू संगठन’ इसका प्रमाण है । इसके अतिरिक्त उनके द्वारा चलाया गया ‘शुद्धि आंदोलन’ आज भी हिंदूवादी संगठनों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मलकाने राजपूतों की लाखों की संख्या में ‘घर वापसी’ का उनका ऐतिहासिक कार्य हम सबके लिए वंदनीय और नमनीय है। हमारा मानना है कि ‘महान भारत’ और ‘विश्व गुरु भारत’ के निर्माण के लिए महर्षि दयानंद और स्वामी श्रद्धानंद के विचारों को अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत में स्वसंस्कृति, स्वधर्म, स्वभाषा, स्वदेश, स्वराष्ट्र और स्वराज्य के मंत्रदाता महर्षि दयानंद ही थे, अन्य कोई नहीं।
श्री कुमार ने डॉ राकेश कुमार आर्य द्वारा राजा दाहिर सेन पर लिखी गई पुस्तक का विमोचन भी किया और कहा कि राजा दाहिर सेन जैसे अनेकों क्रांतिकारी बलिदानियों को खोज कर निकालना और उन्हें इतिहास की पाठ्य पुस्तक में सम्मिलित करवाना इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जिससे हमारे वीर योद्धाओं के त्याग और बलिदान का सच सामने आ सके। उन्होंने कहा कि डॉ आर्य का चिंतन पूर्णतया राष्ट्रवादी है। उन्होंने ‘उगता भारत’ के चेयरमैन श्री देवेंद्र सिंह आर्य को इस बात के लिए धन्यवाद भी दिया कि उनका समाचार पत्र राष्ट्रवादी वैचारिक क्रांति में अपना भरपूर योगदान दे रहा है।

इस अवसर पर श्री कुमार को डॉक्टर आर्य ने ‘भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास’ – नामक अपनी पुस्तक के 6 खंड भी भेंट किए। जिन्हें भारत सरकार द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।
इस पुस्तक के 6 खंड प्राप्त करने पर विहिप अध्यक्ष ने कहा कि भारत के बारे में सच यह है कि यहां पर लोगों ने अपनी आजादी के लिए निरंतर संघर्ष किया। जिससे कोई भी विदेशी सत्ता यहां पर स्थाई रूप से अपना शासन स्थापित नहीं कर पाई। सभी विदेशी सत्ताओं को हमारे वीर पूर्वजों ने समय आने पर उखाड़ फेंकने में सफलता प्राप्त की ।।उनका यह पराक्रम और वीरता पूर्ण चरित्र हमारे लिए वंदनीय होना चाहिए । जिस पर डॉक्टर आर्य का यह शोध निश्चय ही आज की युवा पीढ़ी को सम्मान से जीने और अपने पूर्वजों की परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देगा।
श्री कुमार ने कहा कि भारत महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी , वीर हकीकत राय और उन जैसे अनेकों क्रांतिकारी बलिदानी तपस्वियों का देश है ।जिनके इतिहास और ऐतिहासिक कार्यों को हमें भूलना नहीं चाहिए । क्योंकि उनके महान कार्य हमें निरंतर सम्मान से जीने और भारत के प्रति समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा युग युगों तक देते रहेंगे।

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