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कहानी

बुढिय़ा तथा रसीले आमों का पेड़

किसी गांव में गरीब बुढिय़ा रहती थी। सारे गांव में वह अम्मा के नाम से मशहूर थी। अम्मा विष्णु की भक्त थी। गरन्ीब होने परभी वह दयालु थी। सारा गांव उसकी इज्जत करता था। एक दिन अम्मा को सपने में भगवान विष्णु के दर्शन हुए। उन्होंने प्रसन्न होकरन् अम्मा से कहा-मैं तुम्हारी भक्ति से बहुत प्रसन्न हूं। जो वर चाहो, मांग लो।

‘‘भगवान आप मुझे यह वर दें कि मैं इस गांव की सारी जिंदगी सेवा कर सकूं। अम्मा ने कहा

तथास्तु कहकर विष्णु भगवान अंर्तध्यान हो गये। सुबह अम्मा की आंख खुली तो उसने देखा कि सिरहाने पका हुआ एक आम रखा है। उसने विष्णु को मन ही मन प्रणाम किया तथा आम को काटा। एक हिस्से से भगवान को भोग लगाया बाकी आम उसने स्वयं खा लिया और आम की गुठली को आंगन में बो दिया। अम्मा के आंगन में आम का एक विशाल पेड़ उग गया। आम का मौसम आते ही उसपेड़ पर पहले बौर, फिर आम लगने शुरू हो गये। आम भी लगे तो ऐसे कि जिसने भी उसे खाया, वह उसके स्वाद को भूल न पाया।

अम्मा के घर के बाहर आम लेने के लिए गांव वाले जमा होने लगे। वह लोगों में बांटकर प्रसन्नता अनुभव करती थी। एक दिन अम्मा के आमों की चर्चा राजा तक पहुंची। राजा ईष्र्यालु स्वभाव का था। मीठे आमों की चर्चा उसके दिल में खटकने लगी। उसने सेनाति को आम का पेड़ काटने का आदेश दे दिया। सेनापति ने दो सैनिकों को पेड़ काटने के लिए भेजा। पेड़ पर लगे रसीले और पके आमों को देखकर सैनिकों के मुंह में पानी आ गया। उन्होंने अम्मा से पूछकर दो आम तोडक़र खाये। आम खाकर वे बहुत खुश हुए तथा वहीं बैठ गये।

उधर सेनापति ने उन्हें आते न देखा, तो वह स्वयं वहां पहुंच गया। दोनों सैनिकों को आराम से वहां बैठा देख, उसे उन पर बहुत गुस्सा आया। सैनिकों ने सेनापति को आमों के बारे में बताया। कहा सेनापति जी आम के पेड़ को काटना अन्याय है। आगे आप जैसा उचित समझें।

सेनापति चक्कर में पड़ गया। एक तरफ राजा की आज्ञा थी, दूसरी तरफ था आम का पेड़, जिससे अम्मा गांव वालों की सेवा कर रही थी। सोच विचार कर अंत में सेनापति ने उस पेड़ को न काटने का फैसला कर लिया। वह महल में पहुंचा। आमों के बारे में राजा को बताया।

राजा ने सेनापति से उस आम के पेड़ की तारीफ सुनी तो उसने वहां खुद जाने का फेेसला कर लिया। वह अपने अंगरक्षकों के साथ अम्मा के घर पहुंचा।

कैसे आना हुआ बेटा? अम्मा ने राजा से पूछा।

मैंने सुना है कि इस पेड़ पर जादू वाले आम लगे हैं, जिन्हें खाकर व्यक्ति पागलों जैसी हरकतें करने लगता है। राजा ने कहा

जादू तो इनमें है ही बेटा। पर इन्हें खाकर व्यक्ति पागलों जैसी हरकतें नही करता। आम खाते ही आदमी में एक प्रकार की ताकत आ जाती है। यही इन आमों का जादू है।

राजा शांत खड़ा था। फिर कुछ देर रूककर अम्मा ने कहा-मुझे नही मालुम कि तुम इस पेड़ को क्यों काटना चाहते हो? जरा सोचो इस पेड़ को काटने से तुम्हें क्या मिलेगा?

यह सुनते ही राजा को अपनी गलती समझ आ गयी। उसने कहा अम्मा मैंने इन आमों की चर्चा तो बहुत सुनी है। क्या मैं भी इन्हें चख सकता हूं?

अवश्य चखो बेटा। कहकर अम्मा एक तश्तरी में कुछ आम काटकर ले आयी। राजा ने उन्हें खाया। सैनिकों ने भी आम खाये।

आम खाने के बाद राजा बोला-अम्मा इतने रसीले आम मैंने जीवन में पहली बार खाए हैं। इन आमों को सब लोग खा सकें, इसलिए मैं इनकी गुठलियां सडक़ों के किनारों व बगीचों में लगवाऊंगा।

राजा के लिए अम्मा ने कुछ आम बांध दिये। बोली-बेटा महल में ये आम बांट देना। गुठलियां बाग में बो देना। राजा महल की ओर चल पड़ा। अम्मा और गांव वाले राजा के बदले हुए व्यवहार से खुश थे।

-संदीप कपूर

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