संसार में सभ्यता और आनंद के साथ रहना चाहिए : स्वामी विवेकानंद परिव्राजक

.
“थोड़े दिन का जीवन है, कोई हजारों साल यहां नहीं रहेगा। इसलिए सभ्यता से रहना चाहिए, और आनंद से जीवन जीना चाहिए।”
आजकल लोगों में सहनशक्ति बहुत घटती जा रही है। छोटी-छोटी बातों पर गर्मा-गर्मी हो जाती है। “लोग गुस्सा कर लेते हैं। लड़ाई झगड़ा कर लेते हैं। गाली गलौच करते हैं। मारपीट करते हैं। यह कम से कम मनुष्यों की सभ्यता तो नहीं है।”
पशु पक्षी बेचारे कम बुद्धि वाले हैं। उनके कोई स्कूल नहीं, कोई अध्यापक नहीं, कोई पुस्तक नहीं, कोई सिलेबस नहीं है। इन सब साधनों के अभाव में वे यदि दूसरे प्राणियों पर आक्रमण करें, तो बात कुछ समझ में आती है। परंतु मनुष्य के पास तो बहुत सी सुविधाएं और साधन हैं। अच्छे-अच्छे माता-पिता हैं, जो बच्चों को अच्छी बातें सिखाते हैं, बुराइयों से बचाते हैं। अच्छे अच्छे विद्वान गुरुजन हैं, जो अनेक प्रकार की विद्याएं पढ़ाते हैं, बुद्धि का विकास करते हैं, और कुछ सभ्यता भी सिखाते हैं। पुस्तकों से बहुत कुछ जानने सीखने को मिलता है। वर्तमान में देश में अनेक विद्वान बुद्धिमान धार्मिक सज्जन पुरुष हैं, जिनके जीवन आचरण से बहुत अच्छी प्रेरणा मिलती है। शुभ कर्म करने में रुचि उत्पन्न होती है। और इतिहास के महापुरुषों के जीवन से भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है, कि हमें दूसरों का दुख दूर करना चाहिए, देश धर्म की सेवा रक्षा करनी चाहिए, सत्य का पालन करना चाहिए। ईमानदारी से सच्चाई से परोपकार से युक्त होकर जीवन को जीना चाहिए। “महर्षि दयानंद सरस्वती जी आदि महापुरुषों के जीवन का इतिहास पढ़ें। महाराणा प्रताप वीर शिवाजी महारानी लक्ष्मी बाई नेताजी सुभाष चंद्र बोस चंद्रशेखर आज़ाद इत्यादि महापुरुषों के जीवन से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। इतना सब होने पर भी लोग छोटी छोटी बात में गाली गलौच करते हैं, झगड़े करते हैं, मारपीट करते हैं, यह कोई अच्छी बात नहीं है, यह कोई मानवीय सभ्यता नहीं है।”
“इसी प्रकार से सड़क पर चलते हुए लोग ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते। पीछे से एंबुलेंस आती हो, तो उसे पहले रास्ता नहीं देते। बिजली पानी बेतहाशा और व्यर्थ खर्च करते हैं। प्रदूषण बहुत अधिक फैलाते हैं। व्यर्थ में पेट्रोल डीजल जलाते हैं। बिना काम के मोटर गाड़ी घुमाते रहते हैं। इससे अनेक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। ये सब कार्य, सभ्यता के विरुद्ध हैं।” कृपया सभ्यता के नियमों को समझें। उनका पालन करें। बुद्धिमान बनें। देश की समस्याओं को सुलझाने में सहयोग देवें, न कि समस्याएं बढ़ावें।
“अपने व्यवहार में सुधार करें। ट्रैफिक नियमों का पालन करें। सड़क पर अपनी लेन में चलें। एंबुलेंस को पहले रास्ता देवें। फालतू मोटर गाड़ी घुमा कर धन संपत्ति का नाश न करें, और व्यर्थ प्रदूषण न बढ़ावें। प्रदूषण के निवारण के लिए अपने घर में प्रतिदिन हवन यज्ञ करें। वृक्षारोपण करें। वृक्षों का विकास और उनकी रक्षा करें, जिससे मानव जीवन तथा सब प्राणियों की सुरक्षा हो सके। ऐसा करने से आप सभ्य व्यक्ति कहलाएंगे, और आपका जीवन सफल एवं आनंदित बनेगा।”
—- स्वामी विवेकानंद परिव्राजक, रोजड़, गुजरात।

प्रस्तुति : आर्य सागर खारी

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *