गीता और उपनिषदों में मिश्रण

images (27)

गतांक से आगे…

मुण्डक उपनिषद् का तृतीय मुण्डक पूर्व वैदिक है। इसमें नवम खण्ड का एक श्लोक ऋचा के नाम से लिखा गया है।सभी जानते हैं कि वेद मंत्र ही ऋचा कहलाते हैं । पर जो इस श्लोक ऋचा के नाम से लिखा गया है,उसका चारों वेदों में कहीं पता नहीं है।इससे स्पष्ट ज्ञात होता है कि यह श्लोक कहीं बाहर से लाकर ऋचा के नाम से प्रेक्षेत किया गया है।प्रक्षेप करने वाले वैदिक न थे।यदि वैदिक होते तो प्रक्षेप में ऐसी गलतियां ना होती।उनके वैदिक ज्ञान की अनभिज्ञता का नमूना तैत्तिरीय उपनिषद् में भी है।मिश्रण करने वालों ने तैत्तिरीय उपनिषद् में वेदों से संबंध रखने वाली एक भूल की है।तैत्तिरीय उपनिषद् 1/52 में लिखा है कि – ‘भूरिति वा अग्नि: वायु:सुबरित्यादित्यः। भूरिति वा ऋचः भुव इति सामानि सुवरिति यजुऽषि’ अर्थात् भूःअग्नि है,भुवःवायु है और स्व:आदित्य है भूः ऋग्वेद है, भुवःसामवेद है और स्वेर्वेद है यह सामवेद और स्व: यजुर्वेद है।यहॉ भुवः सामवेद और स्वः को यजुर्वेद बतलाना समस्त वैदिक संस्था के विरुद्ध है। वेदों में सर्वत्र भूवःवायुस्थानी होने से यजुर्वेद से ही संबंध रखता है और स्वः आदित्य स्थानी होने से सामवेद ही से संबंध रखता है क्योंकि वैदिक साहित्य में सर्वत्र यही लिखा हुआ है कि ‘अग्निऋ ग्वेदोंवायोयजुर्वेद:सूर्यात् सामवेद:’ अर्थात अग्नि से ऋग्वेद, वायु से यजुर्वेद और सूर्य से सामवेद का संबंध है।किंतु इस समस्त वैदिक संस्था के विरुद्ध, तैत्तिरीय उपनिषद् भुवःका सामवेद और स्व: का यजुर्वेद से संबंध बतलाता है,इसलिए मिश्रण करने वाले की वैदिक अनभिज्ञता प्रकट होती है।मिश्रण करनेवालों का वैदिक ज्ञान इसी तैत्तिरीय उपनिषदृ के आरंभ से भी प्रकट होता है।तैत्तिरीय उपनिषद् के आरंभ में लिखा है कि ‘नमस्ते वायो त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्यासि’ अर्थात् हे वायु! तू ही प्रत्यक्ष ब्रह्म है,अतः तुम को नमस्कार है।इस पर भाष्य करने वाले ‘वायु’ शब्द का अर्थ परमात्मा करते हैं,परंतु वहां तो ब्रह्म के साथ ‘प्रत्यक्ष’ शब्द रक्खा हुआ है,इसलिए इसका अर्थ परमात्मा नहीं हो सकता।ब्रह्य को कभी किसी ने साक्षात् नहीं किया।वह तो आत्मा से जाना जाता है।इसलिए यह प्रत्यक्ष शब्द इस भौतिक वायु – हवा – के ही लिए आया है। प्रत्यक्ष वायु को नमस्कार करने वाले ब्रह्मविद्या के कितने पंडित थे और उनको वैदिकता का कितना ज्ञान था,यह इसी से जाना जा सकता है और मिलावट का निभ्रान्ति अनुमान सहज ही हो सकता है।
इसके अतिरिक्त उपनिषदों के परस्पर विरोधी वाक्यों और विरोधी सिद्धांतों से भी मिश्रण ज्ञात हो जाता है। साधारण मनुष्य भी अपनी बात में विरोध बचाने का यत्न करते हैं, किंतु ब्रह्मविद्या के आचार्य द्वारा यदि विरोध रखने वाले सिद्धांत पास ही पास मिले तो यही समझना चाहिए कि दोनों विचार दो भिन्न-भिन्न संप्रदाय के आचार्यों के हैं। बृहदारण्यक 1/1 में लिखा है कि ‘आत्मा वा इदमेक एवाग्र आसीत्रान्यत्किंचनमिषत्’ अर्थात आरंभ में एक आत्मा ही थी और दूसरी चीज जरा भी नहीं थी। इसके विरुद्ध छान्दोग्य 6/1/1 में लिखा है कि – ‘.सदेवसो सोम्येदमग्र आसीदेकमेवाद्वितीयम्’ अर्थात् एक अकेला सत् ही था और दूसरी चीज नहीं थी। इन दोनों विरोधी सिद्धांतों का मतलब यह है कि एक आचार्य कहता है कि- सृष्टि के पूर्व केवल एक आत्मा ही थी और दूसरी वस्तु जरा भी नहीं थी।अर्थात् दूसरी वस्तु का अत्यंताभाव था और दूसरी संप्रदाय का आचार्य कहता है कि – नहीं आरंभ में केवल एक सत् ही था उसी से यह समस्त सृष्टि हुई परंतु इन दोनों के विरुद्ध उसी छान्दोग्य 6/1/1 में लिखा है कि – ‘तद्वैक आहुरसदेवेदमग्र आसीदेकमेवाद्वितीयं तस्मादसतःसदजायत’ अर्थात् एक कहता है कि आरंभ में अकेला असत् ही था।उसी से सत् की उत्पत्ति हुई।एक कहता है कि एक अद्वितीय सत् ही पहिले था पर दूसरा कहता है कि पहले एक अद्वितीय असत् ही था,उसी से सत् हुआ। इस सत् असत् की बहस पर छांदोग्य 6/2/2 में यह दलील दी गई है कि – ‘कथमसत: सजायेत।सत्तवेव सोम्येदमग्र आसीदेकमेबाद्वितीयम् तेत्तजोऽसृजत् तदापोसृजत्’ अर्थात् असत् से सत् कैसे हो सकता है।

Comment:

betgaranti giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
alobet
vegabet giriş
vegabet giriş
restbet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
roketbet giriş
imajbet giriş
ikimisli giriş
roketbet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
begaranti giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
roketbet giriş
vegabet giriş
vegabet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
Safirbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betnano giriş
norabahis giriş
betnano giriş
norabahis giriş
roketbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
sekabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
romabet giriş
romabet giriş
İmajbet güncel
Safirbet resmi adres
Safirbet giriş
betnano giriş
noktabet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
nitrobahis giriş