images (86)

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून पर विशेष

* संजय पंकज

मनुष्य,प्रकृति,सृष्टि और परमात्मा के बीच एक निरंतरता का जो अटूट संबंध है उस संबंध को संवेदनशीलता के साथ जानने समझने और अनुभूत करने के लिए योग सबसे बड़ा माध्यम है। योग केवल कर्म का कौशल ही नहीं धर्म का यथार्थ बोध और मर्म का साक्षात्कार भी है। इसे किसी जाति,धर्म,संप्रदाय,भाषा,देश और मजहब से कुछ भी लेना-देना नहीं; यह तो तन,मन,चित्त,बुद्धि, प्राण,आत्मा, चेतना और परमात्म का ज्ञान-संज्ञान है।इसकी प्रस्तुति की क्रिया-प्रक्रिया है।

 

भारत के साधक ऋषियों ने प्रकृति के विस्तार और आलोक में इसे जाना
,समझा और साधा। जीवन जीने की कला और स्वास्थ्य की पूर्णतः वैज्ञानिक पद्धति यह योग आज संपूर्ण विश्व को स्वीकार्य है। इसे अनायास ही प्रचलन में नहीं लाया गया।बार बार देखा,समझा और परखा गया। व्यावहारिक रूप से इसका जब प्रयोग कसौटी पर खरा उतरा तब इसे सैद्धांतिक रूप से प्रतिपादित किया गया।
हम जिसे भारतीय मनीषा या प्रज्ञा कहते हैं वह सार्वभौमिक व्याप्ति है। प्रत्यक्ष सच तो यही है कि नीचे आधार-रूप धरती और ऊपर छत-रूप आकाश है। एक सूर्य-चंद्र है, दिन-रात है,हवा का प्रवाह है। हर मनुष्य के भीतर एक हृदय है, प्राण है।सबके लहू का रंग लाल और पसीने का स्वाद खारा है। सबकी हंसी और आंसुओं की भाषा एक है। कहने के लिए अलग-अलग देश है लेकिन देशांतरों के बीच कोई प्राकृतिक दीवार नहीं। हवा और प्रकाश सब जगह व्याप्त है। चिड़ियों के लिए कोई सरहद नहीं। धरती की उर्वरता में एक जैसी हरियाली, फूलों का एक जैसा आकर्षण और सुगंध का सम्मोहन भी कमोबेश एक समान ही। मनुष्य की विकृत जीवन-शैली के कारण उसके भीतर की दुष्प्रवृत्तियों ने उसे एक दूसरे से अलग कर दिया है। वह लड़ रहा है,एक दूसरे के साथ हिंसक व्यवहार कर रहा है। संवेदनहीन मनुष्य विवेक और परमात्म चिंतन से सर्वथा विलग हो जाता है। उसकी क्रूरता और ऐषणाएं बढ़ती चली जाती है।प्रकृति और समाज के साथ ही साथ वह स्वयं का भी कट्टर शत्रु हो जाता है। योग जोड़ता है। योग को साधता मनुष्य धीरे-धीरे स्वयं को जानने-समझने लगता है। वह सब में चैतन्य के दर्शन करता है। जड़ से लेकर चेतन तक, निर्जीव से सजीव तक वह परमात्मा को देखता है। योग चेतना की उर्ध्वमुखी यात्रा है।
वसुधैव कुटुंबकम के विराट भाव में भारत अर्थित होता है। धरती का कोई खंड विशेष भले ही भारत नाम से पूरे संसार में जाना जाता है मगर आत्मवत सर्वभूतेषु जैसे उदात्त और समदर्शी सांस्कृतिक विचार लेकर भारत देश देश और जन-जन में स्थित हो जाता है। भारत चरित्र,शील और निष्ठा है।भारत एक संस्कृति और चेतना का नाम है। बहुजन हिताय बहुजन सुखाय के साथ ही साथ ‘हम में तुम में खड्ग खंभ में व्यापे राम’ के विश्वासी वैभव का नाम भारत है। आलोक की यात्रा में समर्पित एक प्रवाह का नाम भारत है। कल्याणा और आकर्षण में रूपांतरित विग्रह का नाम भारत है। शिव और कृष्ण के शाश्वत सत्यराग के संवाहक का नाम भारत है। शिव योग के प्रवर्तक महायोगी योगीश्वर हैं। कृष्ण योग से संयुक्त गोपाल योगेश्वर हैं। यह गोपाल इंद्रियों के सम्यक अर्थ का ज्ञाता और प्रयोक्ता है। शिव और कृष्ण दोनों ही प्रेम के प्रतिमान उज्वलतम शिखर हैं। शिव योग की पराकाष्ठा में अर्धनारीश्वर होते हैं तो कृष्ण योग के महारास में स्त्री-संचेतना से संयुक्त होते हैं।सारी गोपिकाएं कृष्ण को अपने बाहर भीतर संपूर्णता में अनुभूत करती हैं। दोनों प्रेम और आनंद में तल्लीन होते हैं, लयनिष्ठ हो नाचते हैं। शिव नटराज हैं तो कृष्ण नटवर हैं। दोनों योगी हैं ,और योग एकलय कर देता है। भारत योग का स्रष्टा और द्रष्टा है। महर्षि पतंजलि ने इसे व्यवहारिक रूप दिया। इसके सोपानों का निर्माण किया। अष्टांग योग का प्रतिपादन किया। आसन से लेकर समाधि तक योग को क्रमशः साध्य बनाया। अलग-अलग भौगोलिक कारणों और प्राकृतिक वातावरण से भू-खंडों के स्वभाव भिन्न होते हैं मगर उनमें वायुमंडलीय एकरूपता होती है। योग इसी एकरूपता को अर्थात् प्राण को साधता है। आज जैसे पॉलीहाउस में वातावरण को अनुकूलित किया जाता है और बेमौसम भी विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों की पैदावार को तैयार किया जाता है ठीक वैसे ही योग सब कुछ को अनुकूल बना लेता है। कड़ाके की ठंड में सूर्यभेदन प्राणायाम शरीर में ताप भर देता है तो भीषण गर्मी में शीतली प्राणायाम ठंडापन ला देता है। शारीरिक-मानसिक उत्तेजना और उद्वेलन को योग शांत तथा स्थिर करता है। आवेश और आवेग को नियंत्रित करता है।
योग मनुष्य की असीम शक्ति को उजागर करता है। मनुष्य को उसके होने का अर्थ प्रदान करता है। आज कोरोनावायरस जैसे अनेक संक्रामक रोगों के संकट से मुक्त करने की क्षमता योग के पास है। इसे बार-बार कहने की आवश्यकता नहीं है। योग मनुष्य को सर्वांग सुगठित करता है और संपूर्णता के साथ जीने का कौशल प्रदान करता है। तन और मन दोनों को एकलय करके उसे आत्मा में स्थित करता हुआ परमात्मा के दर्शन की ओर ले जाता है।योग तन,मन,आत्मा और संपूर्ण अस्तित्व का आनंद है।
योग बुद्ध,महावीर,नानक, कबीर,रामकृष्ण,विवेकानंद, अरविन्द जैसा बनाता है। योग भौतिकता से अध्यात्म की ओर,अंधकार से प्रकाश की ओर,असत्य से सत्य की ओर,मृत्यु से अमरता की ओर ले जाता है। योगी जीवन की तरह मृत्यु को भी देखने लगता है। जगत के सारे प्राणियों में एक ही तत्व के दर्शन करता है। योग की पराकाष्ठा पर पहुंच कर राग-विराग से परे हो जाना सहज है। अध्यात्म मनुष्य की निर्मल, पावन और उदात्त उपलब्धता है। यह योग की तरह ही धर्म,संप्रदाय सबसे ऊपर है। यह कोई कर्मकांड नहीं है जिसे प्रदर्शित किया जाता है। यह तो अंतश्चेतना की वह यात्रा है जो सीधे-सीधे परम तत्व की ओर ले जाता है। सत्य का साक्षात्कार कराता है।ब्रह्मांड के सारे गोपन रहस्यों को उजागर करता है। संशय की हर परत को खोल कर रख देता है। अध्यात्म में डूबकर योगसिद्ध बुद्ध – ‘अप्प दीपो भव’ -कहते हैं तो कबीर आत्मा में अंतर्भुक्त होकर परमात्मा के दर्शन करते हैं और कहते हैं – ‘मोको कहां ढूंढे़ बंदे, मैं तो तेरे पास में’। कवयित्री मीरा द्वंद्वातीत होकर भक्ति और प्रेमयोग की पराकाष्ठा पर स्वरमुखर होती है – ‘जित देखूं उत श्याम’।
यह सच है कि स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता है मगर इस सच को भी अस्वीकृत नहीं किया जा सकता है कि स्वस्थ मन से ही तन को भी स्वस्थ रखा जा सकता है। योग मनुष्य को हर स्तर पर सुगठित, सुदृढ़, सुनियोजित,सुसंस्कृत, सुसंस्कारित और सुव्यवस्थित करता है। योग भारत की श्रेष्ठतम साधनात्मक उपलब्धि है। अमृत की अनंत धाराओं को आत्मसात कर आनंदोत्सव में सतत प्रवाहित समदर्शिता का अनंतराग है योग।


‘शुभानंदी’
नीतीश्वर मार्ग, आमगोला
मुजफ्फरपुर-842002
*मोबाइल 6200367503

Comment:

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meybet giriş
meybet giriş
betnano giriş
meritking giriş
hititbet giriş
meybet
meybet
orisbet giriş
orisbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
milanobet giriş
hiltonbet giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
hiltonbet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
hititbet
hititbet
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino
vdcasino
hititbet
hititbet
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet
hititbet giriş
betmarino
betmarino
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
norabahis giriş
celtabet giriş
celtabet giriş
pokerklas giriş
pokerklas giriş
meybet
meybet
hititbet giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino
vdcasino
meritbet giriş
meritbet giriş
vaycasino giriş
piabellacasino giriş
piabellacasino giriş
norabahis giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
pokerklas
pokerklas
norabahis giriş
vdcasino
vdcasino
pokerklas
pokerklas
hititbet giriş
Pokerklas giriş
pokerklas
pokerklas
hititbet
hititbet
betnano giriş
betasus giriş
pokerklas
pokerklas giriş
betpark giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betpark giriş
betorder
betorder
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
hititbet
timebet
timebet
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vdcasino giriş
pokerklas giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpas giriş
betpas giriş
favorisen giriş
favorisen giriş
norabahis giriş
norabahis