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स्वास्थ्य

कोरोना से लड़ने का सबसे कारगर हथियार ‘टीकाकरण’

विनोद गौतम

आरंभिक अध्ययनों में यह बात जरूर सामने आई है कि यह वेरिएंट कोरोना के इलाज के लिए भारत में हाल ही में स्वीकृत मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज थेरैपी रोधी है। यानी डेल्टा प्लस वायरस पर कासिरिविमैब और इम्डिविमैब दवाओं के कॉकटेल को बेअसर माना जा रहा है।

कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर से देश अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाया है कि कोरोना वायरस के एक नए वैरिएंट ‘डेल्टा-प्लस’ ने फिर से आशंका बढ़ा दी है। वायरस की यह नई किस्म डेल्टा वायरस में म्यूटेशन के बाद सामने आई है। इसी डेल्टा वायरस (बी.1.617.2) को भारत में कोरोना की दूसरी लहर के लहर के लिए जिम्मेदार माना गया है। कहा जा रहा है कि डेल्टा वायरस की स्पाइक प्रोटीन ‘के417एन’ में उत्परिवर्तन के कारण डेल्टा वायरस का नया रूप ‘डेल्टा प्लस’ सामने आया है। इसे एवाई.1 या फिर बी.1.617.2.1 के नाम से भी जाना जा रहा है।

काबिलेगौर है कि स्पाइक प्रोटीन के जरिए ही वायरस हमारे शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश करता है। इस तरह अगर ‘खान सर’ की चलताऊ भाषा में इसको समझने-समझाने का प्रयास किया जाए तो यूं कहा जा सकता है कि जिस्म की तालाबंद कोशिकाओं को खोलने के लिए अब यह नई चाबी के साथ आया है। अलबत्ता यह देखने वाली बात होगी कि नया वेरिएंट डेल्टा प्लस इसमें कितना सफल होगा। इसी से इसके अधिक या कम संक्रामक होने के बारे में पता चलेगा।

आरंभिक अध्ययनों में यह बात जरूर सामने आई है कि यह वेरिएंट कोरोना के इलाज के लिए भारत में हाल ही में स्वीकृत मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज थेरैपी रोधी है। यानी डेल्टा प्लस वायरस पर कासिरिविमैब और इम्डिविमैब दवाओं के कॉकटेल को बेअसर माना जा रहा है। यह थोड़ी मायूसी की बात जरूर है लेकिन इसका कतई यह मतलब नहीं है कि नया वेरिएंट डेल्टा प्लस अधिक संक्रामक या भयावह है। इससे अब तक कारगर समझी जा रही इस कॉकटेल एंटीबॉडी थेरैपी को झटका लगा है। दूसरी तरफ महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग ने इसी डेल्टा प्लस वायरस के कारण कोरोना की तीसरी लहर की आशंका व्यक्त की है। अच्छी बात यह है कि इसको लेकर महाराष्ट्र सरकार ने अभी से तैयारियां करने का दावा किया है। तीसरी लहर के लिए सरकारों के साथ-साथ आमजन को भी सजग रहना चाहिए। संतोषजनक यह है कि इन आशंकाओं का अभी कोई आधार नहीं है। आगे होने वाले अध्यनों और डेटा के आधार पर ही डेल्टा प्लस की गंभीरता का पता चलेगा।

नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने भी डेल्टा प्लस को अभी चिंता का विषय नहीं माना है। उन्होंने फिलहाल इसे ‘दिलचस्पी का विषय’ करार दिया है। इसके पीछे ठोस वजह यह है कि कोरोना वायरस का यह नया वैरिएंट डेल्टा प्लस इस साल मार्च से ही है और 27 जून तक इसके 63 जीनोम की पहचान कनाडा, रूस, भारत और अमेरिका समेत दुनिया के दस देशों में की गई है। इसमें भारत के 6 जीनोम हैं। जून के मध्य तक ब्रिटेन में कुल कोरोना मामलों में से 90 प्रतिशत मामले डेल्टा वेरिएंट के थे। इसमें से महज 36 मामले ही डेल्टा प्लस वेरिएंट के सामने आए। इस लिहाज से कहा जा सकता है कि मार्च में ही इस नए वेरिएंट के सामने आने के बावजूद इसके संक्रमण की रफ्तार उतनी नहीं दर्ज की गई है। इसके बरक्स ब्रिटेन के केंट में पहली बार दर्ज किए गए अल्फा म्यूटेंट को मूल कोरोना वायरस के मुकाबले 60-70 प्रतिशत ज्यादा संक्रामक माना गया गया था। इसी तरह ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में सामने आए बीटा म्यूटेंट को भी अधिक संक्रामक पाया गया। फिर उसके बाद भारत में कोरोना की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार माने जाने वाले डेल्टा वेरिएंट को अल्फा के मुकाबले 60 प्रतिशत अधिक संक्रामक माना गया। गत वर्ष अक्टूबर माह में सामने आए इस वेरिएंट ने अगले चंद माह में ही देश में किस कदर तबाही मचाई, यह हम सबके सामने है।

बहरहाल कोरोना का नया डेल्टा प्लस वेरिएंट अत्याधिक खतरनाक है या नहीं, इस बहस में पड़ने की बजाए हमें इससे सावधानी बरतना जरूरी है। इसके लिए बुनियादी उपाय तो कोरोना के तय प्रोटोकाल पर अमल करना ही है। इसमें मास्क लगाना, उचित शारिरिक दूरी बनाना और हाथ को साबुन और सैनिटाइजर से साफ करने जैसे मूलमंत्र शामिल हैं। इसी के जरिए ही कोरोना की चेन को तोड़ा जा सकता है। इसलिए हमें ध्यान रखना चाहिए कि कोरोना कम हुआ है, खत्म नहीं हुआ है।

इसके आलावा कोरोना से लड़ने का दूसरा सबसे कारगर हथियार टीकाकरण है। हालांकि कोरोना वायरस के नए-नए म्यूटेंट सामने आने पर यह बहस भी चल रही है कि इसके लिए बनी वैक्सीन इन नए वैरिएंट पर कारगर हैं या नहीं। विशेषज्ञों की राय अलग-अलग वैक्सीनों को लेकर भिन्न है। कुछ का मानना है कि एम-आरएनए वैक्सीन इस पर ज्यादा असरदार हैं। इनमें मॉडर्ना, फाइजर/बायोनटेक के टीके शामिल हैं। कुछ का मानना है कि जॉनसन एण्ड जॉनसन और एस्ट्राजेनेका की वायरल वेक्टर वैक्सीन कम कारगर है। पूरी तरह से स्वदेशी कोवैक्सीन को बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने भी डेल्टा वेरिएंट पर अपने टीके के प्रभावी होने के दावे किए हैं।

कोरोना से बचाव के लिए बने टीकों के कम या ज्यादा प्रभावी होने को लेकर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग हो सकती है लेकिन इस बात पर सभी एकमत हैं कि टीका ही एकमात्र कोरोना का सुरक्षा कवच है। कम से कम इसे लगाकर कोरोना से गंभीर तौर पर बीमार पड़ने, अस्पताल में जाने और गंभीर लक्षणों से तो बचा ही जा सकता है।

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