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5जी स्वास्थ्य व आधुनिक योग के लिए कितना सुरक्षित

योगेश कुमार गोयल

जूही चावला की याचिका में कहा गया था कि यदि टेलीकम्युनिकेशंस इंडस्ट्री की 5जी योजना सफल हो गई तो कोई भी व्यक्ति, जानवर, चिड़िया और यहां तक कि कोई पत्ता तक हर पल रेडियो फ्रीक्वेंसी रेडिएशन से बच नहीं सकेगा।

4 जून को दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री जूही चावला की भारत में 5जी नेटवर्क लगाने के खिलाफ दायर की गई जनहित याचिका को खारिज करते हुए उन पर यह कहते हुए 20 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया कि याचिकाकर्ताओं ने कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल किया है। उल्लेखनीय है कि जूही चावला सहित दो अन्य याचिकाकर्ताओं वीरेश मलिक और टीना वाच्छानी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 5जी तकनीक की टेस्टिंग को लेकर सवाल खड़े किए थे। याचिका में 5जी से संभावित खतरों का जिक्र करते हुए 2019 में बेल्जियम की पर्यावरण मंत्री सेलीन फ्रेमां के उस बयान का उल्लेख किया गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि ब्रसेल्स के लोग ‘गिनी पिग’ नहीं हैं, जिनके स्वास्थ्य को हम मुनाफे के लिए बेच दें और वह ऐसी तकनीक का स्वागत नहीं कर सकती, जिससे नागरिकों की सुरक्षा करने वाले रेडिएशन स्टैंडर्ड्स की इज्जत नहीं हो सकती, फिर चाहे वह 5जी ही हो।

याचिका में कहा गया कि इस मामले पर अध्ययन किया जाना चाहिए कि कहीं इस तकनीक के चलते इंसानों, जानवरों और प्रकृति को नुकसान तो नहीं हो रहा। याचिकाकर्ताओं ने करीब पांच हजार पन्नों वाली अपनी याचिका डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिकेशंस, साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड, आईसीएमआर, सीपीसीबी जैसी कुछ कई प्रमुख सरकारी एजेंसियों कुछ यूनिवर्सिटी तथा डब्ल्यूएचओ को पार्टी बनाते हुए अदालत से मांग की थी कि वह इन एजेंसियों को आदेश दे कि वे निष्पक्ष जांच करके पता लगाएं कि 5जी स्वास्थ्य के लिए कितना सुरक्षित है। याचिकाकर्ताओं के वकील दीपक खोसला ने अदालत से अनुरोध किया था कि 5जी तकनीक से गंभीर खतरे हैं, इसलिए इसे तब तक रोक दिया जाए, जब तक कि सरकार स्वयं पुष्टि न करे कि इससे कोई खतरा नहीं है।

बहरहाल, अदालत द्वारा याचिका को दोषपूर्ण, अदालत का समय बर्बाद करने वाली और प्रचार पाने के लिए दायर की गई याचिका बताते हुए न केवल इसे खारिज कर दिया गया बल्कि याचिकाकर्ताओं पर 20 लाख रुपये का जुर्माना भी ठोंक दिया। अदालत की नाराजगी की वजह यह भी थी कि जूही चावला ने सुनवाई का लिंक सोशल मीडिया पर शेयर किया था और कुछ अज्ञात लोगों ने उसी लिंक के जरिये तीन बार अदालती कार्यवाही के दौरान जूही चावला के गाने गाकर सुनवाई में व्यवधान उत्पन्न किया। इसलिए भी अदालत द्वारा सख्त शब्दों में कहा गया कि ऐसा लगता है कि यह याचिका पब्लिसिटी के लिए दायर की गई थी।

याचिका पर फैसला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका में कुछ ही ऐसी जानकारी हैं, जो सही हैं बाकी सिर्फ कयास ही लगाए गए हैं और संशय जाहिर किया गया है। दरअसल जब अदालत ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील से पूछा कि उन्होंने किस आधार पर यह संशय जाहिर किया और क्या इसे लेकर कोई जानकारी, स्टडी या रिपोर्ट है तो ‘नहीं’ में जवाब देते हुए दलील दी गई कि यही जानकारियां हासिल करने के लिए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उसी के बाद अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए याचिका को खारिज कर दिया कि अदालत उम्मीद करती है कि यदि अदालत में कोई याचिका दायर की जा रही है तो वह पूरे तथ्यों और जानकारी के साथ ही दायर हो, अदालत का समय बर्बाद करने के लिए नहीं।

जूही चावला की याचिका में कहा गया था कि यदि टेलीकम्युनिकेशंस इंडस्ट्री की 5जी योजना सफल हो गई तो कोई भी व्यक्ति, जानवर, चिड़िया और यहां तक कि कोई पत्ता तक हर पल रेडियो फ्रीक्वेंसी रेडिएशन से बच नहीं सकेगा और इस रेडिएशन का स्तर आज के स्तर से 10 से 100 गुना ज्यादा होगा। हालांकि विश्व के कई अन्य देशों में भी लोग ऐसी चिंताएं जताते रहे हैं कि 5जी रेडिएशन का एक्सपोजर बढ़ने से कैंसर जैसी प्राणघातक बीमारियां तेजी से बढ़ सकती हैं लेकिन अभी तक के अधिकांश अध्ययनों में यही कहा गया है कि 5जी एंटीना से निकलने वाले रेडिएशन का स्तर कम होता है। दरअसल मोबाइल सिग्नल भेजने या रिसीव करने के लिए 5जी तकनीक को कई नए बेस स्टेशनों की जरूरत पड़ती है। इस तकनीक को पुरानी तकनीक के मुकाबले जमीन के नजदीक ज्यादा ट्रांसमीटर की जरूरत होती है और ज्यादा ट्रांसमीटरों का अर्थ है कि वे 4-जी तकनीक के मुकाबले कम बिजली पर चल सकते हैं अर्थात् एंटीना से निकलने वाले रेडिएशन का स्तर कम होता है।

हालांकि इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च द्वारा मोबाइल फोन से पैदा होने वाले इलैक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड को इंसानों के लिए संभावित कैंसर पैदा करने वाला माना गया है लेकिन डब्ल्यूएचओ की एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तक इस संबंध में ऐसे कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं, जिनसे साबित होता हो कि मोबाइल फोन से पैदा होने वाले इलैक्ट्रोमैग्नेटिग फील्ड से इंसानों में पक्के तौर पर कैंसर होता है। वैसे भी 5जी तकनीक को दूसरी सेल्युलर तकनीकों से अलग माना जाता है। दरअसल 5जी नेटवर्क रेडियो तरंगों पर आधारित सिग्नलों पर निर्भर होता है, जो एंटीना तथा मोबाइल फोन के बीच प्रसारित होती हैं। यह तकनीक पुराने मोबाइल नेटवर्क से ज्यादा फ्रीक्वेंसी वाली तरंगों का इस्तेमाल करती है, जिससे बहुत तेज इंटरनेट स्पीड के साथ एक साथ बहुत ज्यादा मोबाइल फोनों पर इंटरनेट सुविधा का आनंद लिया जा सकता है।

5जी तकनीक से मानव स्वास्थ्य पर क्या खतरे उत्पन्न हो सकते हैं, इसका खुलासा तो दुनियाभर में निष्पक्ष वैज्ञानिक अध्ययनों के बाद ही हो सकेगा लेकिन इंटरनेशनल कमीशन ऑन नॉन आयोनाइजिंग रेडिएशन प्रोटेक्शन के अध्ययनकर्ताओं का यह अवश्य कहना है कि 5जी रेडिएशन से निकलने वाली गर्मी नुकसान नहीं पहुंचाती। उनके मुताबिक अगर 5जी रेडिएशन से कोई व्यक्ति सर्वाधिक रेडियो फ्रीक्वेंसी से भी एक्सपोज हुआ होगा तो वह भी इतना कम होगा कि उससे आज तक तापमान बढ़ा हुआ नहीं पाया गया। बहरहाल, वर्ष 2020 में डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक विश्व स्वास्थ्य संगठन 2022 में 5जी सहित सभी रेडियो फ्रीक्वेंसी के एक्सपोजर से स्वास्थ्य पर होने वाले खतरों पर एक रिपोर्ट प्रकाशित करेगा। उसके बाद ही यह खुलासा हो सकेगा कि 5जी रेडिएशन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है या नहीं और है तो किस हद तक?

जहां तक 5जी तकनीक को लेकर जूही चावला की याचिका की टाइमिंग का सवाल है तो यह पूरी तरह गलत था। दरअसल पिछले कुछ समय से भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में 5जी तकनीक को कोरोना संक्रमण से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि 5जी टेस्टिंग के कारण ही दुनियाभर में कोरोना वायरस का प्रसार हो रहा है। ऐसी ही अफवाहों के चलते पिछले साल ब्रिटेन में लोगों द्वारा कुछ 5जी टावरों को आग लगा दी गई थी। इस समय भारत में 5जी पर ट्रायल चल रहे हैं जबकि क्रांतिकारी मानी जाने वाली यह तकनीक अमेरिका, यूरोप, चीन, दक्षिण कोरिया इत्यादि विश्व के कई देशों में पहले से ही काम कर रही है। यह तकनीक क्रांतिकारी इसलिए मानी जाती है क्योंकि 5जी से इंटरनेट की गति कई गुना तेज हो जाती है और इंटरनेट आधारित बड़े-बड़े कार्य भी बहुत तीव्र गति से डाटा ट्रांसफर होने के कारण पलक झपकते ही सम्पन्न हो जाते हैं। इससे रक्षा, चिकित्सा, शिक्षा इत्यादि लगभग सभी क्षेत्रों में क्रांति आ जाएगी और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, टेली-सर्जरी, रोबोटिक सर्जरी इत्यादि को ज्यादा विकसित करने में मदद मिलेगी।

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