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उगता भारत न्यूज़

18 57 के क्रांतिनायक धनसिंह कोतवाल शोध संस्थान मेरठ द्वारा मनाई गई महाराणा प्रताप की जयंती

 

मेरठ। यहां पर 18 57 की क्रांति नायक धनसिंह कोतवाल शोध संस्थान मेरठ द्वारा इतिहास के अमर सपूत महाराणा प्रताप की जयंती एक वेबीनार के माध्यम से मनाई गई। इस अवसर पर सांसद और कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विजय पालसिंह तोमर ने कहा कि महाराणा प्रताप का भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। उनकी महानता इसी बात से प्रकट हो जाती है कि देश का प्रत्येक व्यक्ति उन्हें सम्मान से स्मरण करता है।


श्री तोमर ने कहा कि महाराणा प्रताप अपने आप में एक गौरवमई इतिहास का पृष्ठ हैं। जिस पर जितना शोध किया जाए उतना कम है। क्योंकि उन पर किए गए शोध से हमें राष्ट्रबोध होता है। उन्होंने अपना सारा जीवन कष्ट पूर्ण ढंग से व्यतीत किया तो उसका कारण केवल एक ही था कि राष्ट्र उनके हृदय में धड़कता था। श्री तोमर ने कहा कि आज इतिहास के पुनरलेखन की आवश्यकता है जिसमें महाराणा प्रताप को समुचित स्थान दिया जाना समय की आवश्यकता है।


इंजीनियर अजयकुमार सिंह ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप ने निरंतर 10 वर्ष तक अकबर जैसे बादशाह की टक्कर ली और उसे बार-बार पराजित किया। इतिहास के इस कौतूहल से अब पर्दा उठना ही चाहिए कि महाराणा प्रताप ने मुगल सम्राट अकबर की सेना को बार-बार परास्त किया और अपने स्वाभिमान को गिरने नहीं दिया। इतिहासकार और राष्ट्रीय प्रेस महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप चित्तौड़ के लिए यदि समर्पित रहे तो उसका एक ही कारण था कि चित्तौड़ बप्पा रावल के जमाने में कभी विश्व राजधानी का गौरव प्राप्त कर चुकी थी। महाराणा प्रताप उसके पुराने गौरव को लौटाना चाहते थे। महाराणा प्रताप के नाम के साथ ही हमें पन्ना धाय के बलिदान को भी याद रखना चाहिए। साथ ही राणा सांगा, राणा उदय सिंह और गोरा बादल सहित जयमल फत्ता के गौरवमई इतिहास से भी शिक्षा देनी चाहिए । क्योंकि इन सब के योगदान से ही महाराणा का जीवन बना है। महाराणा प्रताप ने 12 साल तक राज किया और प्रजा का दिल जीता।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार और समाजसेवी राकेश छोकर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास की एक अप्रतिम धरोहर हैं। जिनके योगदान से आने वाली पीढ़ियां शिक्षा लेती रहेंगी। उन्होंने देश के लिए समर्पित होकर कार्य किया और अनेकों कष्ट सहे। जिनसे आज की युवा पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है। इसी प्रकार गायत्री सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन संघर्षों से निकलकर सोने से कुंदन बनने वाला जीवन था । जिन्होंने मुगलों की बहुत बड़ी बड़ी सेनाओं को अपनी छोटी सी सेनाओं के माध्यम से पराजित करने का अप्रतिम कार्य किया । उनके भीतर आत्मबल की कमी नहीं थी। तभी तो वह अकबर जैसे विशाल साम्राज्य के स्वामी के सामने भी झुके नहीं। यदि उन्हें उस समय अन्य राजपूत राजाओं से अपेक्षित सहयोग मिला होता तो आज का इतिहास भी दूसरा ही होता।


जम्मू से उपस्थित रहे देवेंद्र सिंह सांबा ने कहा कि जो देश अपने वीरों का वंदन करता है वह कभी बड़ी से बड़ी शक्ति के सामने भी परास्त पराजित नहीं हो सकता। महाराणा प्रताप के व्यक्तित्व से हमें ऐसी ही शिक्षा मिलती है। जबकि श्री एसके नागर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि धन सिंह कोतवाल शोध संस्थान जिस प्रकार हमारे इतिहास नायकों को हमारे सामने लाने का कार्य कर रहा है वह अपने आप में अप्रतिम कार्य है । इतिहास से महाराणा प्रताप से लेकर धन सिंह कोतवाल तक के क्रांतिकारियों को जिस प्रकार एक योजना के अंतर्गत हटाया गया है उन सब को स्थापित करना आज की पीढ़ी का बड़ा कार्य है जैसे शोध संस्थान प्रमुखता से कर रहा है। समाजशास्त्र के प्रोफेसर और वरिष्ठ चिंतक प्रोफेसर राकेश राणा ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप एक ऐसा व्यक्तित्व हैं जो प्रत्येक राष्ट्रवादी व्यक्ति के हृदय में दिल की धड़कन के रूप में धड़कता है। उनका महान व्यक्तित्व न केवल आज बल्कि आने वाली पीढ़ियों को युगों तक शिक्षा देता रहेगा।


वैबिनार में उपस्थित रहे श्री राज सिंह ,श्री राजबल सिंह, श्री प्रदीप सिंह, श्री बलबीर सिंह, श्री सुनील बासट्टा, सिम्मी भाटी , श्री तनु प्रसाद , श्री सुरजीत सिंह, श्री ललित राणा आदि ने अपने विचार व्यक्त किए और क्रांतिकारी धन सिंह कोतवाल और महाराणा प्रताप दोनों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर अपनी भावपूर्ण भावांजलि पुष्पांजलि दोनों महानायकों के प्रति समर्पित की।
कार्यक्रम के अंत में श्री भोपाल सिंह गुर्जर द्वारा सभी उपस्थित वक्ताओं और अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि महानायकों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारकर उनके जैसे काम करें और अपनी मां भारती के प्रति समर्पित होकर भारत को विश्व गुरु के पद पर विराजमान करने के लिए संकल्पित हों।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद विजयपालसिंह तोमर द्वारा की गई। जबकि सफल संचालन शोध संस्थान के चेयरमैन श्री तस्वीर सिंह चपराना द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यक्रम के विषय में प्रारंभ में ही अपनी भूमिका में यह स्पष्ट किया कि शोध संस्थान राष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाकर प्रत्येक राष्ट्रवादी व्यक्तित्व को उसका उचित सम्मान दिलाने के लिए कृत संकल्प है। इसमें किसी भी प्रकार का जातीय विद्वेष या सांप्रदायिक विद्वेष काम नहीं करता है, बल्कि शुद्ध राष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाकर अपने महानायकों के प्रति समर्पित होकर श्रद्धा भाव से कार्य करने को ही शोध संस्थान अपना धर्म समझता है । जिसके लिए शोध संस्थान का प्रत्येक सदस्य संकल्पित है।

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