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गौ और गोवंश

गौ दुग्ध और श्वास रोग

“गौ दुग्ध और श्वास रोग”

वर्ष 2020 में स्पेन कोरोना वैश्विक महामारी से बुरी तरह प्रभावित रहा। अब वहां कोरोना संक्रमण थम गया है। कोरोना संक्रमण से होने वाली lungs डिजीज का कोई अभी स्पेसिफिक ट्रीटमेंट मेडिकल साइंस में नहीं है केवल कुछ स्टेरॉइड एंटीवायरल मेडिसिन से लक्षणों का उपचार किया जा रहा है।

दूसरा विकल्प एक्वायर्ड आर्टिफिशियल पैसिव इम्यूनिटी अर्थात टीकाकरण है। साइंटिस्ट रिसर्चर तमाम कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम उपचार को लेकर अनेक पहलुओं पर शोध कर रहे हैं। ऐसा ही एक शोध मार्च 2021 गाय के दूध ,कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर स्पेन की University of Cordoba के एनिमल हेल्थ विभाग में हुआ। इस शोध के मुताबिक जो ऑनलाइन जनरल “फ्रंटियर ऑफ इम्यूनोलॉजी ” पर उपलब्ध है के मुताबिक गाय के दूध में पाए जाने वाली इम्यूनोग्लोबिन अर्थात रोग प्रतिरोधक एंटीबॉडी IgG इंसानों को संक्रमित करने वाले कोरोना परिवार के वायरस Sars-cov2 के संक्रमण के खिलाफ रोकथाम में असरकारक है । कोरोना वायरस का ही निकट संबंधी कोरोना वायरस परिवार का एक वायरस जिसे बोवाइन कोरोना वायरस कहते हैं जो पशुओं में साधारण जुकाम श्वसन मार्ग के संक्रमण के लिए जिम्मेदार होता है उसके खिलाफ प्रत्येक गाय आदि महाउपकारक पशुओं में एंटीबॉडी होती है जो उसके सीरम में तो मौजूद होती हैं उसके दूध में भी उसके बच्चे के लिए Natural passive इम्युनिटी के लिए उपलब्ध रहती है। जो दूध से प्रत्येक स्तनपान करने वाले जीव को उसकी माता से मिलती है। इंसानों में छोटे बच्चों में सांस नली फेफड़े पेट के संक्रमण के लिए जिम्मेदार बहुत से बैक्टीरिया वायरस के खिलाफ गाय का दूध बहुत ही असरकारक है यह तो पहले से ही अनेक अंतरराष्ट्रीय research में सिद्ध हो चुका है ईकोलाई एच पाइलोरी बैक्टीरिया स्ट्रैप्टॉकोक्कस निमोनियाई जैसे बैक्टीरिया वायरस जनित संक्रमण है जिनमें गाय का दूध संक्रमण पर ब्रेक लगाता है यह तो अब निर्विवाद वैज्ञानिक सत्य बन गया है। स्पेन के शोध के मुताबिक गाय की दूध की एंटीबॉडी कोरोना वायरस के स्पाइक्स S प्रोटीन को निष्क्रिय करती है। गाय आदि मैं संक्रमण के लिए जिम्मेदार बोवाइन कोरोना वायरस तथा इंसानों में संक्रमण के लिए जिम्मेदार Sars-cov2 (Nobel coronavirus) की जेनेटिक संरचना स्वभाव 96 फ़ीसदी मिलता है। इस शोध के मुताबिक गाय का दूध इम्यून माड्यूलेटर का कार्य करता है। यह सूजन रोधी साइटोकॉन का तेजी से निर्माण करता है Pre inflammatory साइटोकॉन स्टॉर्म के असर को कम करता है यह भी इस शोध से निकल कर आया है। इस शोध के आधार पर रिसर्चर काफी आशा जनक संभावनाएं तलाश रहे गंभीर कोरोना रोगियों के लिए। बड़ी हैरानी होती है सदियों से गाय को पूजने माता मानने वाले देश भारत में ऐसा एक भी शोध शीर्ष चिकित्सा संस्थानों में नहीं हुआ। हमने महाउपकारक गाय को राजनीतिक लाभ की विषय वस्तु बना दिया। वेदों में गाय को विश्व की माता कहा गया है इसका आधार विज्ञान सम्मत है गाय के दूध से सीधी natural passive इम्यूनिटी मिलती है। धनवंतरी चरक सुश्रुत आयुर्वेद के ग्रंथों में गाय का दूध गाय के रंग के आधार पर अनेक व्याधियों में इस्तेमाल में लाए जाने की बात की गई है। सभी गायों में काली गाय का दूध सर्वोत्तम माना गया है इसे वात नाशक माना गया है सफेद गाय का दूध कुछ भारी कफ कारक माना गया है पीली गाय का दूध वात पित्त नाशक माना गया है। वाराणसी में उत्पन्न वैद्य धनवंतरी के अनुसार गौ दूध पुराने ज्वर खांसी शरीर के सूखने गोला शरीर की जलन अतिसार थकावट मैं बहुत लाभप्रद है आयुर्वेद के ही ग्रंथ भाग प्रकाश के अनुसार छोटे बच्चे वाली गाय का दूध कफ निवारक है इस मामले में एक कदम बढ़ ईश्वर की वाणी वेद अथर्ववेद मे एक सुंदर उपदेश मंत्र में मिलता है जिसके मुताबिक नर बच्चों अर्थात बछड़े वाली गाय गाय का दूध सर्वाधिक उत्तम होता है। यूनानी चिकित्सा की पुस्तक मखजन -उल-अद्वियात के मुताबिक गाय का दूध मन मस्तिष्क को प्रसन्न करने वाला काया को तेजस्वी बनाता है। सिल (फेफड़ों के घाव) तथा छाती की रोगों के लिए अचूक औषधि है ।महात्मा गांधी नवजीवन पत्रिका के 29 जनवरी सन 1925 के अंक में लिखते हैं कि मेरी दृष्टि में गाय की रक्षा करना मानव जाति की उन्नति का एक बड़ा साधन है भारत में गाय से बढ़कर मनुष्य से सहानुभूति करने वाला दुखनिवारक सहायक अन्य कोई भी नहीं है। इसने मनुष्य को अनेक देन प्रदान की है। यह भारत के लाखों मनुष्य की माता है क्योंकि जिन बच्चों की माता मर जाती है उनका इसी के दूध पर पालन पोषण होता है जब तक हिंदू लोग गौ रक्षा करेंगे हिंदू जाति जीवित रहेगी तथा अपनी सभ्यता को बनाए रखेगी ।सन् 1897 में जब अखंड भारत के लाहौर में प्लेग की महामारी फैली थी तब डॉक्टरों में अपनी जांच रिपोर्ट में पाया था यह बताया था कि अविभाजित पंजाब के जन्मजात गौ प्रेमी गोपालक गुर्जरों के घरों में मोहल्लों में प्लेग का प्रवेश नहीं हुआ क्योंकि वह गाय के दूध उत्पादों का सेवन करते थे। ऐसे बहुत से सकारात्मक गौ की महिमा को उद्घाटित करने वाले शोध थे प्राच्य विद्या के सिद्धांत है जिन्हें दबाया गया। गाय की महिमा उसके दूध की चिकित्सीय प्रभावशीलता को लेकर शोध अनुसंधान तो दूर उसके प्रचार-प्रसार के लिए अभी हमारा तंत्र भी नहीं है यह लेख लिखा लेकिन आशंका है फेसबुक इसे भी प्रतिबंधित कर देगा अपने कम्युनिटी स्टैंडर्ड के खिलाफ मुताबिक बता कर जो उसने कोरोना महामारी को लेकर बनाए हैं।

आर्य सागर खारी ✍✍✍

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