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उगता भारत न्यूज़

18 57 की क्रांति के अमर शहीद धन सिंह कोतवाल की स्मृति में किया गया एक वेबीनार का आयोजन : स्वामी कर्मवीर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित कार्यक्रम में डॉ सत्यपाल सिंह बोले – योग की शरण में जाने और पसीना बहाने से मिल सकती है कोरोना पर विजय

“1857 के क्रांति नायक अमर शहीद धनसिंह कोतवाल जी की संघर्ष गाथा और शहादत को नमन करते हुए वैश्विक महामारी कोरोना और समाधान” विषय पर 18 57 की क्रांति नायक अमर शहीद धन सिंह कोतवाल शोध संस्थान मेरठ उत्तर प्रदेश द्वारा एक वेबीनार का आयोजन किया गया।


इस अवसर पर स्वामी कर्मवीर जी महाराज की दिव्य उपस्थिति और सानिध्य लोगों को प्राप्त हुआ। स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने कहा कि भारतवर्ष में आज से नहीं पहले से ही मौसम बदलने पर नजला जुकाम आदि की समस्याएं आती रही हैं, लेकिन वर्तमान में कोरोना जैसी महामारी को कुछ अधिक प्रचार-प्रसार दे दिया गया है। उन्होंने कहा कि कोरोना कफ की बीमारी है। जिसे इसी दृष्टिकोण से लेना व समझना चाहिए।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि रोग निरोधक क्षमता बढ़ाने का हमें निरंतर प्रयास करना चाहिए। इसके लिए वेद और वैदिक संस्कृति की शरण में जाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पतंजलि योग पद्धति को अपनाना समय की आवश्यकता है। यदि हम पतंजलि योग पद्धति को अपनाएंगे तो रोग और रोगाणु हमारे निकट नहीं आ सकते। प्राणायाम जैसी महा औषधि को प्राप्त कर जो लोग योग की शरण में जाते हैं उनके लिए कोई भी बीमारी असाध्य नहीं रह जाती है। इससे फेफड़ों को शक्ति प्राप्त होती है और हमारे फेफड़े अधिक ऊर्जावान होकर कार्य करने में सक्षम हो जाते हैं।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि हमारे फेफड़े मधुमक्खी के छत्ता की तरह हैं । जिसमें अनेकों कोशिकाएं हैं। जिनमें मधु भरा रहता है। हमें इसे रोज ताजी हवा भेजने का प्रयास करना चाहिए । जिसे प्राणायाम के माध्यम से ही भेजा जा सकता है। योगाभ्यास और प्राणायाम करते रहने से कोरोना को मात दी जा सकती है। इसके अतिरिक्त हमें सकारात्मक सोच रखनी चाहिए । सकारात्मक सोच से भरे रहने से कोई भी रोग हमारे ऊपर आक्रमण नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा कि यज्ञ में गुग्गुल का प्रयोग अवश्य करें। मंत्रों का उच्चारण और इनका प्रभाव हमारे चित्त और मानस पर बहुत अधिक पड़ता है। इसलिए मंत्रों का शुद्ध उच्चारण करते रहे और उनके भावार्थ पर भी सकारात्मक चिंतन के साथ विचार करते रहें। इससे भी हमारी मानसिक शक्तियों का विकास होता है और वे सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर हमें जीने के लिए प्रेरित करती हैं । इसके अतिरिक्त समय पर खाना व समय पर उठना चाहिए। स्वस्थ रहना है , कोरोना को हराना है – हमें इस मंत्र को या नारे को आज की आवश्यकता के अनुरूप ढालकर एक संघर्ष के रूप में मैदान में उतर कर कार्य करना चाहिए। हमें सोचना चाहिए कि हम कोरोना जैसे शत्रु को हरा देंगे। स्वामी जी महाराज ने कहा कि गन्ने का रस हमें लेना चाहिए। यह कफ का नाश करता है। इसमें नींबू का प्रयोग भी हमें करना चाहिए।


इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और बागपत से वर्तमान सांसद डॉक्टर सत्यपाल सिंह ने कहा कि देश का जो मेहनती वर्ग है वह इस समय कोरोना जैसी गंभीर बीमारी से बचा हुआ है , क्योंकि वह रोज पसीना बहाता है। इसका मतलब हुआ कि जो लोग पसीना बहाने से बचते हैं, वही इस रोग की गिरफ्त में जल्दी आते हैं। इसके लिए आवश्यक है कि हम रोज प्राणायाम करें, अनुलोम विलोम करें इसके अतिरिक्त हमें इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि हमारी कृति, उक्ति और चित्ति में किसी प्रकार की असमानता ना हो। हम जैसा अंदर से हैं वैसा ही बाहर से बने। तनाव से बचें और न तनाव किसी को देने का विचार करें।
डॉक्टर सत्यपाल सिंह जो कि अपनी विद्वता और भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं ने कहा कि तनाव से बचने के लिए डॉक्टर कहते हैं कि अधिकतर बीमारियां हमें तनाव से ही लगती हैं। आदमी को दो नावों पर सवार नहीं होना चाहिए। किसी प्रकार के दबाव को अपने भीतर स्थान नहीं देना चाहिए, बल्कि सीधी सपाट सच्ची जिंदगी जीने के लिए अच्छे विचारों को अपना कर आगे बढ़ना चाहिए । यदि हम ऐसी सोच के साथ आगे बढ़ते हैं तो कभी बीमार नहीं होते ,लेकिन जब आदमी दो नावों पर सवार होता है तो बीमार होता है अर्थात अंदर कुछ और बाहर कुछ बोलने वाला व्यक्ति तनाव में शीघ्र आता है।
डॉ सिंह ने अपने विशिष्ट अंदाज में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आत्मानुशासन हमारे रिष8यों की एक बहुत बड़ी देन है। उन्होंने कहा कि आत्मानुशासन ही योग है। क्योंकि योग चित्त की वृत्तियों के विरोध का नाम है। चित्त की वृत्तियों का निरोध कर लेना अर्थात अपने आप को आत्मानुशासित कर लेना, मर्यादित कर लेना, संतुलित कर लेना ही योग् है। जो हमें दुख से हटा सके वह योग है। इस विषय को स्पष्ट करते हुए डॉ सत्यपाल सिंह ने कहा कि गीता में हमें यही बताया गया है कि दुख से हटने के लिए प्रयास करते रहना चाहिए। अपने आप को सकारात्मक बनाए रखें। अपने दुर्गुणों को देखें और दूसरों के गुणों को देखें। यदि ऐसी सोच अपनाएंगे तो निश्चित रूप से गंभीर बीमारी या महामारी से पार पा सकेंगे।
डॉक्टर सतपाल सिंह ने कहा कि हम प्रकृति के अनुसार नहीं रहते। रात को देर तक जागते हैं दिन में देर तक सोते हैं। यह प्रवृत्ति हमारे शरीर के लिए बहुत खतरनाक है। यदि हम प्रकृति के अनुसार अपने आप को ढालें तो निश्चित रूप से हम एक सार्थक जीवन जीने में सफल हो सकते हैं। डॉक्टर सतपाल सिंह ने कहा कि महाभारत में भीष्म पितामह की आयु 176 वर्ष थी लेकिन इसके उपरांत भी वह जवान योद्धा की तरह युद्ध करते थे और 10,000 से अधिक सैनिकों को रोज मारते थे। यदि हमारा आचार विचार सब कुछ प्रकृति के अनुसार हो जाए तो हम भी ऐसी अवस्था को प्राप्त हो सकते हैं। हमारा भोजन हमारे लिए औषधि बने हमें इस पर ध्यान देना चाहिए। रोज हमें पसीना बहाने का काम करना चाहिए। यदि हम ऐसा करेंगे तो निश्चित रूप से इस बीमारी से बचे रहेंगे। डॉक्टर सिंह ने कहा कि अपनों का साथ नहीं छोड़ना है ।उनसे भागना नहीं है, उनका साथ दीजिए। बीमारी को मिलकर परास्त किया जा सकता है , दूर भाग कर नहीं।


इस अवसर पर डॉ सतीश शास्त्री, राजबल सिंह, योगेंद्र कुमार ,लेफ्टिनेंट जनरल डीपी वत्स वर्तमान में राज्यसभा सदस्य, डॉक्टर विनोद , जागेश वर्मा, सिम्मी भाटी, लंदन से उपस्थित रही डॉक्टर रेणुका जेनर आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
वरिष्ठ समाजशास्त्री और विद्वान प्रोफेसर राकेश राणा ने कहा कि हमारे क्रांतिकारी रहे शहीद धन सिंह कोतवाल और उनके साथियों की भावनाएं भारतीयता को प्रकट करने की थी। यदि उनके सपनों का भारत हम बनाए होते तो निश्चित रूप से आज कोरोना जैसी बीमारी हमारे सामने नहीं होती । क्योंकि तब हम एलोपैथी की ओर न जाकर आयुर्वेद की ओर बढ़ते जो हमें स्वस्थ रखने में युवाओं से सहायक रहा है।


कार्यक्रम का सफल संचालन कर रहे और शहीद धन सिंह कोतवाल शुद्ध संस्थान मेरठ के अध्यक्ष वरिष्ठ समाजसेवी और ऐसे कार्यक्रमों को समय-समय पर आयोजित करने के लिए अपनी विशेष पहचान बना चुके तस्वीर चपराना ने इस अवसर पर कहा कि
आज हम न केवल क्रांतिकारी शहीद धन सिंह कोतवाल जी का सादर निर्माण कर रहे हैं बल्कि महाराणा प्रताप का भी सादर स्नान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन जैसे क्रांतिकारियों के कारण ही आज देश आजाद है इनके बलिदान, त्याग, तपस्या और राष्ट्रभक्ति से आज की पीढ़ी को भी शिक्षा लेने की आवश्यकता है। डॉक्टर चपराना ने कहा कि क्रांतिकारियों के बलिदानों को भुलाना किसी भी देश के लिए आत्महत्या के समान होता है । इसलिए क्रांतिकारियों का उचित सम्मान सत्कार और उनके जीवन से प्रेरणा लेने के लिए ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन उनका संगठन भविष्य में भी करता रहेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और समाजसेवी विजय पाल सिंह तोमर ने सभी विद्वानों का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया और शोध संस्थान को ऐसे कार्यक्रमों को करते रहने की अपनी ओर से प्रेरणा दी ।

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