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शैतान शराब बनाम शरीफ लीवर

शैतान शराब बनाम शरीफ लीवर

शराब शैतान का पानी है जिस घर में शैतान नहीं पहुंच पाता वहां वह इसको भेज देता है| कहावत भी है” शराब अंदर, अक्ल बाहर” … सबसे पहले यह बुद्धि को ही भ्रष्ट करती है लेकिन यह बुद्धि को ही नहीं खाती एक ना एक दिन लोक परलोक के आधार शरीर को ही खा जाती है सभी जानते हैं समझते हैं । अधिकांश लोग यदि नहीं समझते तो यह किस तरीके से अंगों को नुकसान पहुंचाती है इस विषय में अनभिज्ञता है इसके शरीर अंगों पर दुष्प्रभाव की कार्यप्रणाली को समझना जरूरी हो जाता है ।शराब जिसे अल्कोहल विज्ञान की भाषा में एथेनॉल भी कहते हैं…. का प्रयोग सदियों से मनुष्य मस्तिष्क की कार्य प्रणाली को उत्तेजित या शांत करने के लिए करता आया है यह एक साइकोसोमेटिक ड्रग है….जो मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है ।शरीर का ऐसा कोई अंग नहीं आहार नाल से लेकर पेट आतं मस्तिष्क हृदय जिस पर इसका दुष्प्रभाव ना पड़ता हो ।यह सभी अंग शराब के सामने लाचार हो जाते हैं। यह अंग शराब के सामने मानो आत्मसमर्पण कर देते हैं।

लेकिन एक अंग है जो शराब के सामने आत्मसमर्पण नहीं करता साथ ही इन सभी अंगों के लिए अंधेरे में आशा की एक किरण बनकर उभरता है इन सभी अंगों को शराब जैसे नुकसानदायक रसायनों से बचाने के लिए पूरी जी जान लगा देता है| वह धैर्यवान परिश्रमी अंग केवल और केवल हमारा यकृत अर्थात लीवर है शरीर का त्वचा के बाद सबसे बड़ा अंग होने के साथ-साथ एक ग्रंथि भी है जो लगभग डेढ़ किलो वजनी फुटबॉल जितना बड़ा रंग रेडिश ब्राउन होता है। पसलियों के नीचे दाहिनी और स्थित होता है।

यकृत अर्थात लीवर को लीवर रोगों के विशेषज्ञ hepatologist रिसर्चर शरीर की केमिकल फैक्ट्री पावर हाउस कहते हैं…. लीवर 500 से अधिक कार्य शरीर में करता है। हम जो भी कुछ खाते हैं स्वास्थ्यपरक या नुकसानदायक चाहे दवा हो या भोजन सब कुछ लीवर से होकर गुजरता है। प्रत्येक पदार्थ को लीवर फिल्टर करता है डीटॉक्सिफाई करता है। जो अच्छा है उसे सभी अंगों के लिए रवाना कर देता है जो नुकसानदायक है उसे होल्ड कर ठिकाने लगाता है। विटामिन ए ,के ,विटामिन B12 को भी लीवर ही स्टोर करके रखता है। बाइल, कोलेस्ट्रॉल भी यही बनाता है… cholesterol हमारे शरीर का यातायात परिवहन मंत्री है… |

हम जो भी कुछ खाते हैं उसे गुलकोज में रूपांतर कर ग्लाइकोजन के रूप में लीवर भविष्य के लिए शरीर को ऊर्जा देने के लिए स्टोर करके रखता है यह शरीर का स्टोर हाउस भी है 21,21 दिन का आमरण अनशन सत्याग्रही लोग लीवर की इसी खासियत के कारण कर पाते हैं। खून के निर्माण से लेकर खून के बहने खून के जमने तक के लिए लीवर ही जिम्मेदार है। भोजन के पाचन से लेकर शरीर की लगभग पूरी रोग प्रतिरोधक क्षमता लीवर पर ही आश्रित है। दिल और दिमाग इसके बगैर लाचार है। एक खासियत और है इसकी यदि इसके 70 फ़ीसदी हिस्से को काटकर अलग कर दिया जाए तो यह छिपकली की पूछ की तरह 4 से लेकर 6 हफ्तों में पूरा हो जाता है अर्थात स्वस्थ लीवर में जबरदस्त रीजेनरेटिव कैपेसिटी होती है जो इसे चमत्कारी अंग बनाती है इसका एक नाम पुनर्नवा इसी कारण पड़ा है अर्थात यकृत पुनः नवीन निर्मित हो जाता है लेकिन हर चीज वस्तु प्रक्रिया की एक हद होती है। यह दुनिया का दस्तूर है जो सर्वाधिक जिम्मेदार धैर्यवान होता है सभी विपत्तियों चुनौतियों को लोग उसकी और ही हस्तांतरित कर देते हैं ऐसा ही हमारे शरीर में होता है।

इस आलेख में हम शराब के जब शरीर पर दुष्प्रभाव की बात कर रहे हैं तो शराब से निपटने का अर्थात उसे मेटाबोलाइज्ड कर शरीर से बाहर निकालने का कार्य लीवर को ही करना पड़ता है। लेकिन इस कार्य में हमारा लीवर शरीर के अंगों हमारे अमूल्य जीवन को बचाने के अपने मरते दम तक हर संभव प्रयास करता है खुद कुर्बान हो जाता है शराब से क्षतिग्रस्त हो जाता है। पर जो मूर्ख लोग शराब के आदी एल्कोहलिक होते हैं परिवार समाज को नहीं समझते उसकी परवाह नहीं करते हैं इस बेचारे लीवर की बेबसी को क्या समझेंगे? जब कोई शराबी चाहे वह नया हो या चाहे थोड़ी पीता हो या ज्यादा कभी कभार पीता हो या रोज-रोज ड्रिंक करता है शराब पीता है अल्कोहल पेट से होते हुए 90 फ़ीसदी आतं द्वारा सोख ली जाती है। शराब खून में मिलते ही लीवर सक्रिय हो जाता है वह अपना काम करना शुरू कर देता है। लिवर शराब को फिल्टर कर उससे विभिन्न चरणों में तोड़ते हुए पेशाब के रास्ते बाहर निकालना शुरू कर देता है। लिवर मैं जब शराब में पहुंचती है तो लीवर में पाए जाने वाला एडीएच एंजाइम अल्कोहल को एलेडिहाइङ रसायन के रूप में बदल देता है जो कि बहुत खतरनाक कैंसर कारक टॉक्सिक रसायन होता है। लीवर तेजी से दूसरा एंजाइम एलएडीएच बनाता है जो इस खतरनाक रसायन को एसीटेट में तब्दील कर देता है जो एक तरीके का सिरका ही होता है। फिर लीवर किडनी की सहायता से इस एसिटेट को पानी , कार्बन डाइऑक्साइड गैस के रूप में पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देता है। प्रति घंटे लीवर केवल 30ml अल्कोहल को ही डिटॉक्सिफाई कर सकता है सोचिए बेवड़े 1 घंटे में पैक पर पैक लगाए जाते हैं झूठे साहस का संचार उनमें में हो जाता है। ऐसे में लीवर को अपनी क्षमता से कई गुना अधिक कार्य करना पड़ता है लीवर की अन्य स्वस्थ कार्यप्रणाली भी अल्कोहल के कारण बाधित होती हैं लिवर फैटी हो जाता है। लीवर की कोशिकाएं सूज कर फट जाती है लीवर अपनी मदद खुद करता है लेकिन मरम्मत के इस कार्य में वह अपनी क्षमताओं को खो देता है। शराबी के शरीर में कुपोषण आने लगता है क्योंकि लीवर जरूरी चीजों को स्टोर नहीं कर पाता। लीवर में जब गड़बड़ होगी तो आस पड़ोस में भी समस्या पैदा हो जाती है तिल्ली पैंक्रियास सबसे पहले प्रभावित होते हैं तिल्ली का आकार बढ़ जाता है वह खून जमाने वाली कोशिकाओं प्लेटलेट को अधिक मात्रा में hold कर लेती हैं यही कारण है शराबी को ब्लीडिंग के चांस अधिक होने लगते हैं। पैंक्रियास की खराबी होने से डायबिटीज हो जाती है शराब की सफाई का कुछ काम पेनक्रियाज को भी करना पड़ता है पेनक्रियाज में सूजन हो जाती है उसे पेंक्रियाटाइटिस कहते हैं बहुत ही खतरनाक स्थिति होती है। खून में पित् रंजक पदार्थ ब्लूरिबिन सहित अन्य विजातीय तत्व बढ़ जाते है पेट में पानी बनने लगता है जिसे ascites कहते हैं पेट की दूषित पानी में मौकापरस्त बैक्टीरिया पनप जाते हैं खतरनाक जानलेवा इंफेक्शन हो जाता है यह सब इसलिए होता है क्योंकि खून को अनुशासन में नसों में दौड़ाने के लिए जिम्मेदार एल्बुमिन प्रोटीन लीवर कम बनाता है। पैरों में सूजन आने लगती है। लीवर कठोर हो जाता है लीवर में खून की सप्लाई करने वाली नस पोर्टल फूल जाती है लिवर में खून की सप्लाई धीरे-धीरे बाधित होने लगती है खून बैक मारता है तो आहार नाल की नस फट जाती है कभी पेट तो आंतों में ब्लीडिंग होने लगती है मुंह से खून की उल्टी आती हैं। यही सबसे खतरनाक कॉम्प्लिकेशन है शराब से लीवर के खराब होने पर। लिवर इतना क्षमता वान सहनशील है अंग है एक-दो दिन एक-दो वर्षों में खराब नहीं होता 5 से 10 वर्ष इसे खराब होने में लग जाते हैं शराब के निरंतर सेवन के कारण यदि मनुष्य समय रहते संभल जाए तो इस नरक यातना से बच सकता है। यदि भूख कम लगना उल्टी आना थकान बुखार शरीर पर लाल लाल दाने उभर आना आने जैसे लक्षणों पर कोई शराबी शराब छोड़ दे तो उसका लीवर पुनः क्षमतावान नया हो जाता है। लीवर को अब तक जो भी डैमेज हुआ है वह रिवर्स हो जाता है। लेकिन शराब इतनी आसानी से पीछा नहीं छोड़ती क्योंकि सुधार के अड्डे कम बिगाड़ के अड्डे ज्यादा है.. एक कहावत है “बैड हैबिट, डाई हार्ड “बुरी आदतें मुश्किल से पीछा छोड़ती है लेकिन संकल्प शक्ति यदि बलवान हो तो क्या संभव नहीं है?
कुछ लोग बेफिजूल के कुतर्क भी देते हैं मरना तो 1 दिन सभी को हो क्यों ना एंजॉय करके मरे ऐसे मूर्खों का हमारे पास कोई इलाज नहीं है , कुछ लोग वाजिब प्रश्न करते हैं कि एक इंसान ने जीवन भर शराब पी heavy drinker होने के बावजूद बुढ़ापे तक उसका लीवर एकदम स्वास्थ है उसको तो कोई परेशानी नहीं लेकिन अमुक व्यक्ति ने बहुत कम शराब पी फिर भी उसका लीवर इतनी जल्दी कैसे डैमेज हो गया इसका समाधान भी आनुवंशिक विज्ञान में छुपा हुआ है। हमने ऊपर शराब को लीवर में तोड़ने पाए जाने वाले दो एंजाइमों का उल्लेख किया है ऐसे व्यक्ति में जिसको शराब बहुत कम नुकसान पहुंचाती है हैवी मात्रा में पीने के बावजूद उस व्यक्ति के लिवर में यह enzyme काफी अधिक मात्रा में होते हैं अर्थात अल्कोहल मेटाबॉलिज्म बहुत तेजी से होता है ऐसे केवल 10 प्रतिशत लोग होते हैं। बाकी शेष 90 फ़ीसदी लोगों में यह सामान्य दर से ही होता है लीवर 1 घंटे में मात्र 10gram alcohol ही डिटॉक्सिफाई करता है| इसके साथ ही कुछ लोग शराब पीते हैं लेकिन उनकी लाइफस्टाइल खानपान उत्तम होता है ऐसे लोग जो पहले से ही डायबिटीज मोटापे ग्रस्त है आलसी सेडेंटरी लाइफ़स्टाइल है…फास्ट फूड खाते हैं नॉनवेज खाते हैं मसालेदार खाते हैं और ऊपर से शराब भी अधिक पीते हैं उनका permanent liver damage बहुत तेजी से होता है। यह सभी फेक्टर हैं जो मिलजुल कर काम करते हैं। डॉक्टरों की मजबूरी है वह अपने पेशेंट को शराब के लिए एकदम निषेध नहीं कर सकते डॉक्टरों ने शराब की सेफ लिमिट घोषित कर रखी है स्टैंडर्ड मात्रा बना रखी है जो व्हिस्की के लिए 90ml वाइन के लिए 300ml बियर के लिए 400ml है प्रतिदिन। अधिकांश तो पूरे दिन की इस लिमिट को पहले ही पैक में तोड़ देते हैं पटियाले पैक के नाम पर| उनका तो यमराज से एक ना एक दिन साक्षात्कार जरूरी हो जाता है|

हम कहते हैं शराब को आखिर पीना ही क्यों है?
डॉक्टरों की मजबूरी है वे नहीं चाहते उनके सुधारवादी उद्देश्यों से मरीज डॉक्टर से ही दूर हो जाए उसकी रोजी-रोटी बंद हो जाए। व्यक्ति चारित्रिक सुधार का काम सरकार समाज सुधारवादी संस्थाओं का है। वैदिक विश्व गुरु भारत में गुरुकुल शिक्षा प्रणाली ऋषि मुनि घूम घूम कर उपदेश करने वाले वाले परोपकारी सन्यासी यह काम भलीभांति करते थे। आज के रिपब्लिक भारत में सरकारों को बुराई में बुराई नजर नहीं आती सरकारों को केवल राजस्व दिखाई देता है। सरकारी सुहागन को सुहागन नहीं रहने देना चाहती उसे विधवा बनाकर विधवा पेंशन के पात्र बनाना चाहती हैं तभी तो शराबबंदी अनेक बार असफल हो चुकी है। नोटबंदी से ज्यादा जरूरी शराबबंदी है राष्ट्रीय स्तर पर। क्योंकि शराब के कारण देश का मानसिक शारीरिक स्वास्थ्य तो दांव पर लग ही रहा है आर्थिक संसाधनों का भी नुकसान हो रहा है।

आगे आप भली-भांति विचार करें।आओ मिलकर ले शराब मुक्त परिवार समाज का संकल्प। मद्यपान के विरुद्ध आर्य समाज की लड़ाई के साथ जुड़े चरित्र जीवन निर्माण के लिए अपने आसपास के आर्य समाज मंदिर के साप्ताहिक सत्संग में अवश्य हिस्सा लें|

आर्य सागर खारी✍✍✍

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