निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान

 

राजेश बैरागी

जनपद गौतमबुद्धनगर में निजी स्कूलों के लिए जिलाधिकारी का आदेश कितना महत्व रखता है? पिछले महीने जिला फीस विनियमन समिति की बैठक में यह तय हो जाने और इस संबंध में आदेश जारी होने के बावजूद निजी स्कूलों ने फीस डेढ़ गुना कर दी है और तीन महीने की एकमुश्त फीस भी डंके की चोट पर वसूली जा रही है।
जनपद गौतमबुद्धनगर के नोएडा व ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में संचालित निजी स्कूलों का अपना विधान और अपनी मर्जी है। स्टूडेंट्स पैरेंट्स एसोसिएशन के शोर मचाने और जिला फीस विनियमन समिति जिसके अध्यक्ष स्वयं जिलाधिकारी हैं, के आदेश की धज्जियां उड़ाना कोई मुश्किल काम नहीं है।कोरोना महामारी से प्रभावित सभी अभिभावकों को राहत देने की दृष्टि से जिला फीस विनियमन समिति ने पिछले माह एक आंतरिक बैठक में इस वर्ष फीस में कोई वृद्धि न करने तथा अभिभावकों की सुविधानुसार मासिक स्तर पर फीस लेने का आदेश दिया था।मिली जानकारी के अनुसार इस आदेश को किसी भी निजी स्कूल ने तवज्जो नहीं दी है। ग्रेटर नोएडा स्थित जीसस एंड मैरी स्कूल ने फीस डेढ़ गुना कर दी है और तीन महीने की एकमुश्त फीस वसूली जा रही है। इन स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने की जिद इन स्कूलों को ‘एक अनार सौ बीमार’ जैसी हनक प्रदान करता है।अपनी शर्तों पर दाखिला और अपनी मर्जी से फीस वसूली। जिला फीस विनियमन समिति एक दिखावटी तंत्र है, उसकी किसे परवाह है।

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