Categories
राजनीति

यशवंत सिन्हा जैसे नेता अब ढूंढ रहे हैं दूसरे दलों में अपने भाग्य की लकीरें, गए टीएमसी में

अंजन कुमार ठाकुर

अभी के कालखंड में यशवंत सिन्हा के बराबरी के बौद्धिक और अनुभवी राजनेता शायद उंगलियों पर गिने जा सकते हैं। परंतु जब कांग्रेस के एक युवा नेता के पीछे पूरा विपक्ष दुबका पड़ा है, उस कालखंड में शायद अनुभव और समझ की जरूरत भारतीय राजनीति को नहीं है।

एक चुटकुला राजनीतिज्ञों के बारे में बड़ा चर्चित है के राजनेता पार्टियां बदल लेते हैं, दल बदल लेते हैं, विचारधारा बदल लेते हैं पर देश सेवा करना नहीं छोड़ते। विद्याचरण शुक्ल, सुखराम, नारायण दत्त तिवारी, शरद पवार, केसी पंत, नजमा हेपतुल्ला, शंकर सिंह वाघेला, संजय निरूपम, सुरेश प्रभु आदि कई उदाहरण हैं जिन्होंने सत्ता के गलियारों में घूमने के लिए विचारधारा की नाव को हीं भँवर में छोड़ दिया। जैसा कि आपको पता है कि राजनीति में उचित या अनुचित कुछ नहीं होता सिर्फ अवसर को पकड़ना या अवसर को गँवाना होता है, इसीलिए नैतिकता की बात करना बेकार है। लेकिन यशवंत सिन्हा जो एक प्रबुद्ध नौकरशाह रहे हैं और प्रभावी और प्रखर राजनीतिज्ञ भी, अतः उनके लिए यह कदम उनकी छवि से मेल नहीं खाता है।

क्षेत्रीय पार्टी को छोड़कर राष्ट्रीय पार्टी की ओर जहां जाना या छलांग लगाना शायद उचित माना भी जाए परंतु राष्ट्रीय पार्टी से क्षेत्रीय पार्टी की तरफ कूद जाना उतना गरिमामय नहीं दिखता है। चंद्रशेखर की सरकार में कैबिनेट मंत्री की सीट पर बैठने वाले यशवंत सिन्हा एनडीए सरकार में जसवंत सिंह के साथ वित्त और विदेश मंत्रालय की कुर्सी शेयर करते दिखे या एक्सचेंज करते दिखे परंतु मोदी के उत्थान के साथ भाजपा के वरिष्ठ राजनेताओं के मार्गदर्शक पद पर पदोन्नति से व्यथित दो सिन्हा सरनेम वाले नेताओं में से एक साहेब राष्ट्रीय स्तर की पार्टी कांग्रेस में दिखे और उनकी पत्नी एक क्षेत्रीय पार्टी में तो दूसरे सिन्हा साहेब राष्ट्रीय पार्टी से क्षेत्रीय पार्टी में छलांग लगा बैठे हैं।

अभी के कालखंड में यशवंत सिन्हा के बराबरी के बौद्धिक और अनुभवी राजनेता शायद उंगलियों पर गिने जा सकते हैं। परंतु जब कांग्रेस के एक युवा नेता के पीछे पूरा विपक्ष दुबका पड़ा है, उस कालखंड में शायद अनुभव और समझ की जरूरत भारतीय राजनीति को नहीं है। दरअसल यशवंत सिन्हा के चरित्र में एक आतुरता-सी आ गई है जिसकी वजह से वे दो चीजों को इग्नोर कर रहे हैं। उसमें पहला है मोदी के चमत्कारी व्यक्तित्व को अनुभव के आगे दोयम दर्जे का मानना और दूसरा वर्तमान दौर में पुरानी और आउटडेटेड राजनीतिक शैली के प्रति विश्वास रखना।

हर राजनेता को मानना चाहिए के हर नेतृत्व का एक कालखंड होता है और उस कालखंड के लिए समय स्वयं एक नेता को चुन लेता है। अटल के कालखंड में मृदुभाषी और एक दोयम दर्जे के अराजनयिक कवि को प्रधानमंत्री पद के लिए चुन लिया गया वहीं समय उपयुक्त नहीं होने के कारण देवीलाल, नाम आने के बाद भी प्रधानमंत्री नहीं बन पाए। उसी तरह बिहार में जिस नीतीश ने क्षेत्रीय राजनीति में लालू के कद को बढ़ाया बाद में उसी पद की तड़प उनमें देखी जा सकती थी और उस पद तक वह पहुँचे भी। राजनीति के रथ का सारथी कब रथी और महारथी बन जाये पता नहीं।

त्वरित सिसकियाँ भविष्य के चीत्कार पर हमेशा भारी होती हैं। दशकों के अनुभव को मार्गदर्शक मंडल नाम का झुनझुना जब पकड़ाया गया था उस समय यदि आक्रोश दिखाया जाता तो कुछ और बात होती। समय पर फन ना काढ़ पाने वाला साँप केंचुए से ज्यादा वज़नदार ही माना जायेगा प्रभावशाली नहीं। शक्तिहीन का धैर्य कायरता ही कहलाती है। आत्ममुग्धता और मोह वास्तविकता का आभास ज्ञानियों को भी नहीं होने देता। पर आज यशवन्त के भाग्य में यश नहीं है। क्या कीजियेगा… होता है।

आजकल बुद्धिजीवी बनाने के लिए मोदी विरोध एक अनिवार्य तत्व बन गया है। कीर्ति आजाद सहित ये सिन्हा द्वय और ऐसे कई विक्षुब्ध भाजपा को आखरी सलाम कह गए हैं परंतु ध्यान दें उसी समय खंड में अन्य दलों के सेक्यूलर नेता तथाकथित साम्प्रदायिक मोदी के साथ जुड़ रहे हैं। आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी आदि व्यक्तित्व को हाशिये पर डालना जरूर हास्यास्पद दिखता है परंतु जब प्रतिद्वन्द्वी विपक्ष युवा हो तो वृद्ध सारथी के भरोसे युद्ध जीतने की कामना, सलाह और उम्मीद तीनों हास्यास्पद है। कांग्रेस के एकीकृत स्वरूप को नेहरू का डीएनए सहारा देता है और भाजपा को संघ का विराट कलेवर जिसमें वंशवाद का कोई स्थान नहीं है। एकाध पिता या माता अपने बच्चे को सत्ता की सीढ़ियों तक खींच रहे हैं परंतु मसनद पर बैठाने के काबिल नहीं बन पाए, अधिक से अधिक भूतपूर्व एमएलए या भूतपूर्व एमपी का पद ही शाश्वत रख पाए हैं। इसीलिए श्री सिन्हा को अभी की तात्कालिक परिस्थितियों के अनुसार मोदी के वर्चस्व को और उनकी रणनीतियों को समुचित आदर देते हुए भाजपा को शक्ति सम्पन्न बनाना चाहिए था या राजनीति को छोड़ देना चाहिए। जब योग्य पुत्र जयन्त को सत्तारुढ़ दल पर्याप्त प्रशंसा और सम्मान दे रहा हो उस परिस्थिति में ईर्ष्यालु इन्द्र बनने की जरूरत ही क्या है?

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
Kolaybet Giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
bettilt giriş
Betgaranti
betgaranti
betgaranti giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
Betgaranti Giriş
Kolaybet Giriş
betgaranti giriş
holiganbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
perabet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betnano giriş
Kolaybet
kolaybet giriş
betnano giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betorder giriş
betorder giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betorder giriş
betorder giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
betgaranti international
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
kolaybet
kolaybet giriş
kolaybet güncel giriş
kolaybet
sahabet giriş
onwin giriş
kolaybet giriş
onwin giriş
kolaybet giriş
Kolaybet Giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet güncel giriş
sahabet güncel giriş
onwin güncel giriş
onwin güncel giriş
betpark
sahabet güncel giriş
sahabet güncel giriş
sahabet güncel giriş
sahabet güncel giriş
betpark
sahabet güncel giriş
sahabet güncel giriş