शत्रु राष्ट्र के सामान का बहिष्कार होना ही चाहिए

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(पूर्वकाल में लिखा गया लेख, जिसकी प्रासंगिकता आज भी है | )
यह सत्य है कि,
चीनी समान, जो पूर्ण भुगतान के साथ भारत के छोटे-बड़े व्यापारियों के पास पहूँच चुका है, और उनका भारी पूंजी भी लग चुका है, का क्या होगा ?
भारत में पाकिस्तानी कलाकार के साथ सिनेमा का निर्माण हो चुका है, जिसमें भारतीय पूंजी व अन्य बहुत से भारतीयों का व्यावसाय जुड़ा हुआ है, उनका क्या होगा ?

ऐसे भारतीय व्यावसाय को तो हानि अवश्य होगा |
स्वाधीनता संग्राम के समय बहुत से राष्ट्रवादियों ने विदेशी वस्तु का बहिष्कार करते हुए बहुमूल्य वस्तुओं का सामुहिक रुप से दहन किया था |
चीनी वस्तु को नहीं खरीदेगें | यह कहना सरल है,
परन्तु पूर्व के क्रय किये गये घर में रखा बहुमूल्य वस्तु का बहिष्कार क्या आप कर पायेगें ? यह भी विचारणीय है |
जब आप अपना हानि नहीं चाहते हैं तो मात्र भारतीय व्यावसायियों को हानि क्यों ?
वैसे चीन का मिडिया ने सही कहा है कि हम…..
यदि हम चीन को वास्तव में अपनी शक्ति दिखाना चाहते हैं तो चीनी वस्तु का घर व बाहर दोनों स्थान पर बहिष्कार करनी चाहिए |
चीनी सामाग्री व पाकिस्तानी कलाकार का विरोध करने वालों ,
राष्ट्रभक्ति की पराकाष्ठा उत्तम है, परन्तु सभी का कल्याण भी होना चाहिए |
राष्ट्रभक्ति के नाम पर व्यावसायी द्वारा क्रय की गई चीनी वस्तु का ही बहिष्कार क्यों? आपके घर व दूकान में लिया जा चुका वस्तु को बिना लाभालाभ की चिन्ता किये नष्ट करने की साहस भी करनी चाहिए |
चीनी वस्तु के बहिष्कार से पूर्व हमारे पास उसका विकल्प भी होनी चाहिए | प्रत्येक क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता है | कई क्षेत्रों में हम पिछड़े हैं, भ्रष्टाचार जैसे दानव के कारण ही अपनी बड़ी परियोजनाओं को कार्यान्वित हेतु विदेशी शक्ति को देना पड़ता है |
अतः बहिष्कार से पूर्व स्वयं को सुधारने व सक्षम बनाने की आवश्यकता है |
करोड़ों रुपये का फिल्म व्यावसाय करने को तैयार है, परन्तु प्रतिबन्ध से भारत को भी हानि है | हां, पाकिस्तानी कलाकार को लेकर फिल्म न बने या चीनी वस्तु के स्थान पर भारतीय वस्तु का प्रयोग बढ़े, ऐसा आगे भविष्य में प्रयास करनी चाहिए |
आज भी हम विदेशी भाषा (अंग्रेज़ी) अशुद्ध भी लिखने को गर्व समझते हैं, और हिन्दी लिखना अपना अपमान | जबकि चीन, जापान चीनी, जापानी भाषा को बढ़ावा देते हैं | यहाँ हमारी राष्ट्रभक्ति किस कोने में चली जाती है |
भाषण देना आसान है, कार्यान्वयन करना कठिन |
प्रतिक्रिया का अभिलाषी |
……….. राजेश बरनवाल.

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