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नई कहानी लिखते भारत और सऊदी अरब के संबंध

कमलेश पांडेय

2020 के दिसम्बर में भारतीय सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे ने सऊदी अरब का दौरा किया था। यह पहली बार था जब किसी भारतीय सेना प्रमुख ने भारत और सऊदी अरब के बीच बढ़ते संबंधों का एक स्पष्ट संकेत देते हुए पश्चिम एशियाई देश का दौरा किया था।

भारत और सऊदी अरब के बीच प्रगाढ़ होते जा रहे द्विपक्षीय सम्बन्धों का ही यह नतीजा है कि वर्ष 2021 में पहली बार दोनों देश युद्धाभ्यास करने जा रहे हैं। यह भारत व सऊदी अरब के बीच मजबूत होते रक्षा सम्बन्धों और अन्य क्षेत्रों में भी विकसित हो रहे विश्वास परक सहयोग संबंधों के नतीजे हैं, जिससे एशिया में भारत की स्थिति और मजबूत होगी, वहीं सऊदी अरब की स्थिति भी एशिया व यूरोप में मजबूत होगी।

गौरतलब है कि भारतीय और सऊदी अरब की सेनाएं पहली बार संयुक्त द्विपक्षीय अभ्यास करेंगी। खास बात यह है कि इतिहास में इन दोनों देशों के बीच यह पहला युद्धाभ्यास होगा। आपको यह स्पष्ट कर देना जरूरी है कि इससे पहले सऊदी अरब अपनी सेना को युद्ध की बारीकियां सिखाने के लिए पाकिस्तान और अमेरिका के भरोसे रहता था। लेकिन अब भारत की तरफ सऊदी अरब का बढ़ता झुकाव वैश्विक बिरादरी में उसके बढ़ते कद को अभिव्यक्त करता है। अभी सऊदी अरब की सेना भारत की यात्रा करके यहां युद्धाभ्यास करेगी, जबकि अगले वित्त वर्ष में होने वाले अभ्यासों के लिए भारतीय सेना सऊदी अरब की यात्रा करेगी।

गौरतलब है कि 2020 के दिसम्बर में भारतीय सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे ने सऊदी अरब का दौरा किया था। यह पहली बार था जब किसी भारतीय सेना प्रमुख ने भारत और सऊदी अरब के बीच बढ़ते संबंधों का एक स्पष्ट संकेत देते हुए पश्चिम एशियाई देश का दौरा किया था। तब द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के मुद्दे पर व्यापक चर्चा हुई थी। अपनी सऊदी अरब यात्रा के दौरान सेना प्रमुख नरवणे ने रॉयल सऊदी लैंड फोर्स के मुख्यालय, संयुक्त बल कमान मुख्यालय और किंग अब्दुल अजीज सैन्य अकादमी का दौरा किया था। तब उन्हें रॉयल सऊदी लैंडफोर्स के मुख्यालय में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने रॉयल सऊदी के कमांडर जनरल फहद बिन अब्दुल्ला मोहम्मद अल-मुतीर से भी मुलाकात करके द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के मुद्दे पर चर्चा की थी। इसके बाद उन्होंने संयुक्त बल सऊदी अरब के लेफ्टिनेंट जनरल मुतलाक बिन सलीम बिन अल-अजीमा कमांडर के साथ बातचीत की और रक्षा सहयोग पर विचारों का आदान-प्रदान किया। तब जनरल नरवणे के साथ गए प्रतिनिधिमंडल और उनकी पत्नी वीना नरवणे ने भी ऑल वीमेन सेंटर रियाद सऊदी अरबिया का दौरा किया। उनकी इस यात्रा से रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद जताई गई थी।

आपको यह स्पष्ट कर दें कि सऊदी अरब, भारत को ‘विज़न 2030’ के तहत किंगडम के रणनीतिक साझेदार देशों में से एक के रूप में पहचान देता है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच जुड़ाव बढ़ा है। 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सऊदी अरब यात्रा के दौरान रणनीतिक साझेदारी परिषद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। फरवरी 2019 में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने नई दिल्ली का दौरा किया था। इस यात्रा के दौरान प्रिंस ने भारत में 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के निवेश की घोषणा की थी। दोनों देशों के बीच घनिष्ठ हो रहे संबंधों के नतीजे अब भारतीय और सऊदी अरब की सेनाओं के पहली बार संयुक्त द्विपक्षीय अभ्यास करने का कार्यक्रम बनने से दिखने लगे हैं।

भारत-सऊदी अरब के बीच प्रगाढ़ होते सैन्य व अन्य सम्बन्धों से एक तरफ पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, बंगलादेश, मालदीव, श्रीलंका, नेपाल, म्यांमार, इंडोनेशिया आदि देशों की मानसिकता भारत के प्रति बदलेगी। वहीं, चीन, रूस, इंग्लैंड, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, जापान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, आशियान देश समूह व ब्राजील आदि साधन संपन्न देशों में भी भारत की सूझबूझ के प्रति एक सकारात्मक संदेश जाएगा। वैश्विक दुनियादारी में भारत के बढ़ते कद और उसे संतुलित रखने के लिहाज से भी सऊदी अरब के साथ हमारे प्रगाढ़ होते रिश्ते के अपने खास मायने हैं, जिसे समझने व समझाने की जरूरत है।

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